कैंसर की चिकित्सा और उससे बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 08, 2013
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Quick Bites

  • कैंसर से बचने के लिए तंबाकू का सेवन न करें।
  • अधिक वजन भी हो सकता है कैंसर का कारण।
  • अल्‍कोहल आदि का सेवन करते समय बरतें सावधानी।
  • नियमित जांच करवाते रहने से होगा आपको फायदा।

cancer ki chikitsha aur bachav

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसके नाम से ही हमें कंपकंपी सी हो जाती है। यह डर बहुत हद तक फिल्मों और सिरियल में भी दिखाया जाता है और कभी कभी फिल्म और सिरियल लोगों में इस बीमारी को लेकर भ्रांतियां फैलाने में भी पीछे नहीं रहते। कैंसर को जानना और समझना बहुत ज़रूरी है क्योंकि कई बार इस बीमारी की जानकारी ना होने से स्थितियां और बिगड़ सकती हैं।

 

कैंसर और ट्यूमर

शरीर के किसी भी भाग में सेल्स का लगातार बढ़ना ट्यूमर होता है। ट्यूमर दो तरीके के होते हैं बेनाइन और मैलिग्नेंट।

 

मैलिग्नेंट:

बेनाइन ट्यूमर तबतक नहीं फैलता है जबतक कि यह किसी वाइटल आर्गन जैसे की दिमाग में ना हो। मैलिगनैंट ट्यूमर कैंसर होते हैं। मैलिगनैंट ट्यूमर जहां होता है वहां के आसपास या वहां से दूर भी फैल सकता है जैसे दिमाग में, हड्डियों में ,लिवर या फेफड़ों में। कैंसर चाहे किसी भी प्रकार का हो वो जानलेवा भी हो सकता है।

 

कैंसर पुरूषों और स्त्रियों दोनों में ही हो सकता है। कैंसर होने की अधिक आशंका 40 वर्ष से ऊपर के लोगो में होती है। अन‍ियमित जीवनशैली, मोटापा, धूम्रपान करने वालों तम्बाकू या गुटका खाने वालों में यह रोग होने का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा कई अनुवांशिक कारण भी कैंसर के लिए उत्तरदायी होते हैं।


कैंसर के लक्षण

कैंसर के लक्षण इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि कैंसर शरीर के किस भाग में हुआ है जैसे सिर का या गले का कैंसर।

 

कैंसर के लक्षण:

  •   मुंह का अल्सर
  •   गले में लगातार दर्द
  •   आवाज में बदलाव
  •   गले में सूजन
  •   निगलने में परेशानी होना

 

कैंसर का पता करने के लिए क्लीनिकल टेस्ट होते हैं जैसे सी टी स्कैन, एम आर आई, मैमोग्राफी। एक्स रे से भी कैंसर का पता लगााने में मदद मिलती है। कैंसर का पता लगाने की एक नयी तकनीक है पीइटी ।

 

स्कैन

कैंसर को कन्फर्म करने के लिए शरीर का वो भाग जो प्रभावित होता है वहां से सूई की मदद से थोड़ा सा टिश्यू लिया जाता है और इस टेस्ट को बायोप्सी कहते हैं।

 

 

कैंसर का इलाज कैसे करे:

कैंसर के इलाज को 3 भागों में बांटा गया है ,सर्जरी ,रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी। तरह तरह के ट्यूमर की चिकित्सा के लिए तरह तरह की थेरेपी का प्रयोग होता है। सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी की मदद से कैंसर ठीक हो सकता है। थेरेपी किस प्रकार की होनी चाहिए यह बात कैंसर की स्थिति पर निर्भर करती है।

 


कैंसर से बचने के लिए क्‍या करें

 

तंबाकू का सेवन न करें

तंबाकू का सेवन, चाहे किसी भी रूप में किया जाए, वह आपके कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है। धूम्रपान कई प्रकार के कैंसर, जैसे फेफड़े का कैंसर, ब्‍लैडर कैंसर, गर्भाशय का कैंसर और किडनी कैंसर आदि का कारण होता है। और तंबाकू चबाना, मुंह, कैविटी और पेनक्रियाज कैंसर की बड़ी वजह माना जाता है। यहां तक कि परोक्ष धूम्रपान यानी पैसिव स्‍मोकिंग भी फेफड़ों के कैंसर की बड़ी वजह होता है। अगर आप कैंसर से दूर रहना चाहते हैं तो आपको तंबाकू सेवन से बचना होगा। आप इसमें डॉक्‍टरी सलाह भी ले सकते हैं।


आहार पर दें ध्‍यान

अगर आप अपना आहार चुनते हुए कुछ सावधानियां बरतें, तो भी कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। आपको अपने आहार में फल और सब्जियों को शामिल करना चाहिए। इसके साथ ही साबुत अनाज और बीन्‍स भी आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। साथ ही आपको वसायुक्‍त खाद्य पदार्थों से भी परहेज करना चाहिए, विशेषकर मांसाहार से मिलने वाली वसा आपके लिए अधिक खतरनाक हो सकती है। मोटापा कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। मोटापे से स्‍तन, कोलन, फेफड़े, किडनी और लीवर का कैंसर हो सकता है। इसके साथ ही अगर आप अल्‍कोहल का सेवन भी करते हैं, तो आपका कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

वजन रखें काबू

अधिक वजन स्‍तन, प्रोस्‍टेट, फेफड़े, कोलन और किडनी कैंसर का कारण बनता है। शारीरिक क्रियाकलापों से आप अधिक वजन को काबू कर सकते हैं। अगर आप शारीरिक रूप से सक्रिय हैं, तो आप कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। लेकिन, शारीरिक व्‍यायाम से फायदा पाने के लिए आपको सप्‍ताह में 150 मिनट तक मध्‍यम व्‍यायाम और  शारीरिक गतिविधियों में संलिप्‍त होना चाहिए। आप दोनों प्रकार के व्‍यायाम मिलाकर कर सकते हैं। आपको रोजाना 30 मिनट की शारीरिक गतिविधियां जरूर करनी चाहिए।

 

सूर्य की हानिकारक किरणों से बचें

अधिक समय तक सूर्य की रोशनी में रहने से त्‍वचा का कैंसर हो सकता है। ऐसे समय में अगर आप बाहर न ही रहें तो अच्‍छा। लेकिन किसी वजह से अगर बाहर जाना ही हो, तो सनस्‍क्रीन का इस्‍तेमाल करें। आंखों पर चश्‍मा लगायें और सिर को भी ढंककर रखें।

नियमित जांच करवायें

आपको स्‍वयं की नियमित जांच करवानी चाहिए। इसके साथ ही कुछ जांच ऐसी भी होती हैं, जो आप स्‍वयं कर सकती हैं। जैसे, त्‍वचा, कोलन, प्रोस्‍टेट, गर्भाशय और स्‍तन कैंसर की जांच स्‍वयं की जा सकती है। यदि आप समय रहते इनक लक्षणों को पहचान कर उनका इलाज कर लेते हैं, तो इससे इस बीमारी को गंभीर रूप धारण करने से पहले ही थामा जा सकेगा।

 

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