मूड स्विंग्स या बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्या में फायदेमंद होते हैं ये 4 योगासन

बाइपोलर डिसआर्डर की समस्या में आप कुछ योगसान का अभ्यास कर सकते है। इससे समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। 

Dipti Kumari
Written by: Dipti KumariPublished at: Jun 22, 2022Updated at: Jun 22, 2022
मूड स्विंग्स या बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्या में फायदेमंद होते हैं ये 4 योगासन

बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक बीमारी है, जो आगे चलकर डिप्रेशन और मूड में बदलाव की वजह बनती है। इस बीमारी में मरीज की मनोदशा बदलती रहती है। वे कभी बहुत खुश होते हैं, तो कभी बहुत उदासी का अनुभव करते है। ऐसे में लोग खुद के व्यवहार पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं और अकेलेपन का अनुभव भी करने लगते है। बाइपोलर डिसआर्डर में मूड स्विंग के कारण कभी आप बहुत उत्तेजित, तो कभी आप बहुत निराश हो सकते हैं। इसमें एक समय पर आपको कोई गतिविधि अच्छी लग सकती है, तो दूसरे पल में हो सकता है कि आपको वो एक्टिविटी अच्छी न लगे। इस बीमारी से ग्रसित लोग अंदर से कमजोर और असमर्थ महसूस करते हैं। इसके लक्षणों की बात करें, तो इससे पीड़ित लोगों को नींद कम आती है। इसके अलावा एनर्जी की कमी, उदासी महसूस होना और बेवजह बोलना या चुप रहना इस समस्या के अन्य लक्षण हैं। इसके अलावा हमेशा कुछ न कुछ सोचते रहना और बेचैनी महसूस करना भी इसके लक्षण हो सकते हैं। बाइपोलर डिसआर्डर के कई कारण हो सकते हैं। ये कई लोगों में आनुवांशिक भी हो सकता है। इसके अलावा जीवन में किसी को अचानक खोने या किसी अप्रिय घटना के कारण भी ये दिक्कत हो सकती है। बहुत अधिक तनाव या शराब पीने के कारण भी इस डिसऑर्डर के होने का खतरा बढ़ जाता है। इस समस्या को अनदेखा करने पर रिश्ते टूटने, अपने काम में अच्छा प्रदर्शन न कर पाने और आत्महत्या करने जैसी भावनाएं मन में आ सकती है। लेकिन, ऐसा नहीं ही की आप इसे नियंत्रित नहीं कर सकते हैं। आप योग की मदद से अपनी कुछ परेशानियों को दूर कर सकते हैं। साथ ही योग करने से आप अपने दिमाग को शांत रख सकते हैं, मूड स्विंग को कम कर सकते हैं और गुस्से को नियंत्रित भी कर सकते हैं।

बाइपोलर डिसआर्डर में करें ये योग (Yoga for Bipolar Disorder)

1. गरुड़ासन

गुरुड़ासन के अभ्यास से आपको दिमाग को एकाग्र करने में मदद मिलती है। इससे आपका शारीरिक संतुलन बढ़ता है और मासंपेशियों को मजबूत करने में सहायता मिलती है। इससे आपको अंदर से काफी मजबूती का अनुभव होता है। गुरुड़ासन करने से आपके पीठ का ऊपरी हिस्सा, कमर और कंधे की मांसपेशियों में भी खिंचाव आता है। इससे आपको नींद भी अच्छी आती है और स्ट्रेस कम होता है। इसे आप सुबह या शाम के समय भी कर सकते हैं। आपको गुरुड़ासन करने से कम से कम 3-4 घंटें पहले से कुछ नहीं खाना चाहिए इसलिए सुबह का समय इस आसन को करने के लिए बेस्ट होता है। अगर आपके पैरों या कंधे में चोट हो, तो आप इस आसन का अभ्यास न करें। 

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2. उपविष्ठ कोणासन

इस आसन की मदद से आपको शरीर को लचीला बनाने में मदद मिलती है। दरअसल स्ट्रेस और व्यवहार में परिवर्तन के कारण आपके शरीर में दर्द और कमजोरी का अनुभव हो सकता है। ऐसे में आपको उपविष्ठ कोणासन का नियमित अभ्यास करना चाहिए। यह आपकी रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और मसल्स को स्ट्रेच करता है। यह आपके पाचन तंत्र को भी मजबूत कर सकता है। साथ ही ध्यान लगाने में भी मदद करता है। पैरों की मांसपेशियों भी स्ट्रांग होती है। इसे आप सुबह के समय ही करने की कोशिश करें ताकि पेट दर्द और मांसपेशियों में दर्द की समस्या न हो। 

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3. दंडासन

दंडासन के अभ्यास से आपके शरीर की मुद्रा में सुधार होता है। फेफड़ों में मजबूती आती है और पूरे शरीर में स्वच्छ वायु का संचार होता है। इससे घबराहट कम हो सकती है और स्मरण क्षमता का विकास हो सकता है। अपनी रीढ़ की हड्डियों को मजबूत करने और मांसपेशियों में खिंचाव के लिए आप इस योगासन का अभ्यास कर सकते हैं। अगर आपको अस्थमा की दिक्कत है, तो इस आसन का अभ्यास आपके लिए काफी फायदेमंद होता है। 

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4. पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन बाइपोलर डिसआर्डर में काफी फायदेमंद हो सकता है। इससे अनिद्रा और तनाव को कम कर सकते हैं। साथ ही यह पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाता है। इससे शरीर में लचीलापन आता है और हड्डियां मजबूत होती हैं। इसके अभ्यास से आपको बेहतर महसूस हो सकता है और बेचैनी कम हो सकती है। 

योग के दौरान आपको असुविधा और थकान महसूस होने पर इसे न करें। साथ ही अगर आपको शरीर के किसी हिस्से में चोट लगी है, तो आपको बिना एक्सपर्ट की सलाह के योग नहीं करना चाहिए। एक बात का और ध्यान रखें कि योग करने से पहले स्ट्रेचिंग जरूर करें ताकि शरीर में लचीलापन हो और चोट लगने की संभावना कम हो। 

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