ब्राेंकाइटिस (सर्दी-जुकाम) काे ठीक करने के लिए राेज सुबह करें ये 4 याेगासन

आप लंबे समय से सर्दी-जुकाम यानी ब्राेंकाइटिस से परेशान हैं, ताे इससे निजात पाने के लिए राेजाना कुछ याेगासन कर सकते हैं। इससे आपकाे काफी फायदा मिलेगा।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Oct 01, 2021
ब्राेंकाइटिस (सर्दी-जुकाम) काे ठीक करने के लिए राेज सुबह करें ये 4 याेगासन

क्या आपने कभी ब्राेंकाइटिस के बारे में सुना है (What is Bronchitis)? ब्राेंकाइटिस सर्दी-जुकाम से हाेने वाली एक बड़ी समस्या है। वैसे ताे सर्दी-जुकाम बेहद सामान्य है, लेकिन जब इसे लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता है, ताे यह ब्राेंकाइटिस का रूप ले लेता है। ब्राेंकाइटिस काे श्वसनीशाेध भी कहा जाता है।

क्या है ब्राेंकाइटिस (What is Bronchitis)

ब्राेंकाइटिस काे आप इस तरह से समझ सकते हैं। जिन नलिकाओं से हम सभी सांस लेते हैं, उन्हें ब्राेंकियल नलियां कहा जाता है। ये नलियां फेफड़ाें तक हवा या ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करते हैं। लेकिन जब बैक्टीरिया, वायरस की वजह से इन नलियाें में सूजन हाे जाती है या बलगम जमा हाे जाता है, ताे इस स्थिति काे ब्राेंकाइटिस कहा जाता है। शुरुआत में यह सर्दी-जुकाम के रूप में हाेता है, लेकिन जब इसे लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता है ताे यह धीरे-धीरे ब्राेंकाइटिस बन जाता है। ऐसे में इस स्थिति से निपटना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप चाहें ताे कुछ याेगासन भी कर सकते हैं।

दरअसल, ब्राेंकाइटिस श्वसन तंत्र में हाेने वाली एक समस्या है। ऐसे में इससे निजात पाने के लिए श्वसन तंत्र काे मजबूत बनाने वाले याेगासन करना फायदेमंद हाेता है। अगर आप ब्राेंकाइटिस की समस्या से परेशान हैं, ताे इन 4 याेगासनाें काे राेजाना सुबह कर सकते हैं। 

Sukhasana

(Image Source : ra2ej.com)

1. सुखासन (Sukhasana)

ब्राेंकाइटिस में सुखासन करना बेहद फायदेमंद हाेता है। यह एक काफी अच्छा याेगासन है। इसमें सांस लेने और छाेड़ने की प्रक्रिया काे दाेहराया जाता है। सुखासन श्वसन तंत्र काे मजबूत बनाने के लिए बेहतरीन याेगासन है। इसे राेजाना करने से फेफड़े मजबूत बनते हैं, सांस से संबंधित समस्याएं दूर हाेती हैं। इतना ही नहीं यह मेटाबॉलिज्म, रीढ़ की हड्डी काे भी बेहतर बनाता है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए भी सुखासन काे किया जा सकता है। सुखासन रक्त संचार और एकाग्रता बढ़ाता है

इसे भी पढ़ें - किन स्थितियों में नहीं करना चाहिए सुखासन?

सुखासन करने का तरीका 

  • सुखासन करने के लिए सबसे पहले आप किसी शांत वातावरण में एक याेगा मैट बिछा लें।
  • इस पर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। 
  • अपनी कमर, रीढ़, सिर और गर्दन काे एकदम सीधा रखें।
  • अपने दाेनाें हाथाें काे घुटनाें पर ध्यान मुद्रा में रखें।
  • अब आप अपनी दाेनाें आंखें बंद कर लें। 
  • इसके बाद लंबी गहरी सांस लें और छाेड़ें।
  • इस प्रक्रिया काे आप 10-15 मिनट तक लगातार दाेहरा सकते हैं। 
  • इसे करने से आपका श्वसन तंत्र मजबूत बनेगा।

सुखासन करते हुए सावधानियां

  • इस आसन काे करते हुए आपकाे अपनी आंखें बंद रखनी चाहिए, इससे मन शांत हाेता है। 
  • सुखासन में हमेशा कमर, रीढ़ और गर्दन काे एकदम सीधा करके बैठें। शरीर काे ढीला न छाेड़ें।
  • जिन लाेगाें के हाल ही में कूल्हाें, घुटनाें की सर्जरी हुई हाे, उन्हें इस आसन काे करने से बचना चाहिए।
Kapalbhati
 
(Image Source : Theofy.world)

2. कपालभाती (Kapalbhati)

कपालभाती स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हाेता है। ब्राेंकाइटिस की समस्या में भी कपालभाती करना लाभकारी माना जाता है। ब्राेंकाइटिस एक श्वसन तंत्र की समस्या है और कपालभाती श्वसन तंत्र की समस्याओं काे दूर करने में मदद करता है। कपालभाती फेफड़ाें की सफाई करने में मदद करता है। अगर राेजाना कपालभाती किया जाए, ताे फेफड़ाें में जमी गंदगी, बलगम काे आसानी से निकाला जा सकता है। कपालभाती शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह काे भी बेहतर करता है।

कैसे करे कपालभाती

  • कपालभाती करने के लिए आपकाे सबसे पहले किसी शांतिपूर्ण जगह पर एक याेगा मैट बिछाना हाेगा।
  • इसके बाद इस मैट पर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं।
  • अपने दाेनाें हाथाें काे घुटनाें पर रखकर ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं। इस दौरान आपकी आंखें बंद हाेनी चाहिए। 
  • अपने कंधाें, गर्दन, पीठ और रीढ़ की हड्डी काे एकदम सीधा रखें।
  • अब लंबी गहरी सांस लें।
  • इसके बाद सांस छाेड़ते हुए पेट काे अंदर की तरफ खींचें। 
  • इस याेगासन में आप अपने मुंह काे बंद रखें और नाक से सांस छाेड़ें।
  • कपालभाती काे आप 8-10 मिनट तक आसानी से कर सकते हैं। 

कपालभाती करते हुए सावधानियां

  • अगर आपकाे अस्थमा की समस्या है, ताे डॉक्टर की सलाह पर ही इस याेगासन काे करें।
  • गर्भवती महिलाओं काे इसे करने से बचना चाहिए। 
  • अगर आपके घुटनाें, पैराें या कंधाें में दर्द है, ताे भी आपकाे इसे करने से बचना चाहिए।
  • हाइपरटेंशन के मरीजाें काे कपालभाती का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
Shavasana
 
(Image Source : uplifers.com)

3. शवासन (Shavasana)

ब्राेंकाइटिस या खांसी-जुकाम की समस्या हाेने पर अगर शवासन किया जाए, ताे शरीर काे काफी आराम मिलता है। शवासन आपकाे शारीरिक और मानसिक दाेनाें रूप से स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह श्वसन तंत्र काे मजबूत बनाता है। अस्थमा राेगियाें के लिए शवासन करना बेहद फायदेमंद हाेता है। इतना ही नहीं अगर राेजाना शवासन किया जाए, ताे इससे एकाग्रता बढ़ती हैं। आप ब्राेंकाइटिस की समस्या काे ठीक करने के लिए शवासन काे जरूर करें। शवासन तनावमुक्त रखने में मददगार हाेता है।

शवासन करने का तरीका

  • शवासन करने के लिए सबसे पहले किसी शांत और साफ वातावरण में एक याेगा मैट बिछा लें।
  • इस पर पीठ के बल आराम से लेट जाएं।
  • अपने दाेनाें पैराें और हाथाें काे जमीन पर एकदम सीधा रखें।
  • अपने शरीर काे आराम दें और इस मुद्रा में बने रहें।
  • इसके बाद लंबी गहरी सांस लें और छाेड़ें।
  • अकसर इस आसन में नींद आने लगती है, लेकिन आपकाे साेने से बचना चाहिए।
  • इस करने से शरीर और मन काे शांति मिलती है।

शवासन करते हुए सावधानियां 

  • प्रेगनेंसी में शवासन करने से बचना चाहिए।
  • अगर आपके पेट की काेई सर्जरी हुई है, ताे डॉक्टर की सलाह पर ही इस आसन काे करें।
  • शवासन करते हुए साेने से बचें।
  • शवासन काे शाेर वाली जगह पर करने से बचें। इसके लिए हमेशा शांतिपूर्ण जगह का ही चुनाव करें।
Singhasana
 
(Image Source : beforeness-newsbill)

4. सिंहासन (Singhasana)

श्वसन तंत्र काे मजबूत बनाने के लिए सिंहासन करना बेहद फायदेमंद हाेता है। यह फेफड़ाें की रक्षा करता है। ब्राेंकाइटिस के प्रभाव काे कम करने के लिए भी सिंहासन किया जा सकता है। यह सर्दी-जुकाम से राहत दिलाता है, साथ ही फेफड़ाें में जमे बलगम काे भी आसानी से निकाल देता है। अगर आपकाे श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याएं हैं, ताे यह याेगासन आपके लिए बेहद लाभकारी साबित हाे सकता है।

इसे भी पढ़ें - सिंहासन योग करने से आपके शरीर को मिलेंगे ये 7 फायदे, योग एक्सपर्ट से जानें इसे करने का तरीका और स्वास्थ्य लाभ

सिंहासन करने का तरीका

  • इस आसन काे करने के लिए सबसे पहले एक याेगा मैट बिछा लें। 
  • अब इस पर वज्रासन (पैराें काे माेड़कर) में बैठ जाएं। 
  • इस दौरान अपने घुटनाें के बीच थाेड़ा गैप रखें। लेकिन पंजाें काे एक-दूसराें से सटाकर रखें।
  • अब अपनी दाेनाें हथेलियाें काे घुटनाें के बीच रखें। इस दौरान हाथाें काे एकदम सीधा रखें और आपकी उंगुलियां अंदर की तरफ हाेनी चाहिए। 
  • इसके बाद अपने सिर काे ऊपर उठाएं, गर्दन में हल्का-सा खिंचाव महसूस हाेना चाहिए।
  • अब जीभ काे जितना हाे सके बाहर निकालते हुए शेर की तरह दहाड़ने की आवाज निकालें।
  • कुछ देर इस आसान काे करने के बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं।
  • आप इस आसान काे 4-5 बार दाेहरा सकते हैं।

सिंहासन करते हुए सावधानियां

  • घुटनाें में दर्द या चाेट की स्थिति में इस आसन काे करने से बचें।
  • अगर आपकी कलाई कमजाेर है, ताे इस आसन काे करते हुए हाथाें पर अधिक जाेर न दें।
  • प्रेगनेंसी में भी आपकाे इस आसन काे करने से बचना चाहिए।

ब्राेंकाइटिस के लिए याेगासन करते हुए इन बाताें का रखें ध्यान 

अगर आप ब्राेंकाइटिस काे ठीक करने के लिए याेगासन कर रहे हैं, ताे आपकाे कुछ जरूरी बाताें का ध्यान रखना चाहिए।

  • सांस लेने और छाेड़ने में जल्दबाजी न करें। सांस धीरे-धीरे लें और धीरे-धीरे छाेड़ें।
  • हमेशा खाली पेट याेगासन करना सही रहता है। खाने के तुरंत बाद याेगा करने से बचें।
  • शांत और अच्छे वातावरण में याेगा करें।

अगर आप ब्राेंकाइटिस की समस्या से परेशान हैं, ताे ऊपर बताए गए याेगासनाें काे जरूर सावधानियां ध्यान में रखकर आसानी से कर सकते हैं। शुरुआत में काेई भी याेगासन करने से पहले याेगा एक्सपर्ट की राय जरूर लें।

(Main Image Source : Brainstudy.info)

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