पित्त दोष को शांत करने के लिए रोज करें ये 3 योगासन

Pitta Dosha : पित्त दोष कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। ऐसे में इसे शांत करना जरूरी होता है। इन योगासनों की मदद से पित्त दोष संतुलित करें।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Jun 10, 2021
पित्त दोष को शांत करने के लिए रोज करें ये 3 योगासन

एक स्वस्थ शरीर के लिए वात, पित्त और कफ का संतुलन में होना बहुत जरूरी होता है। इनमें से किसी का भी असंतुलन होने से शरीर में कई स्वास्थ्य समस्याएं या दोष पैदा हो सकते हैं। वायु दोष वायु से, कफ दोष पानी से और पित्त दोष अग्नि से होता है। पित्त दोष के कारण 40 तरह के रोग हो सकते हैं। ऐसे में इसे समय रहते संतुलन में करना बहुत जरूरी होता है। अगर आपके शरीर में लाल चकते, फोड़े-फुंसी होते हैं या आपको गुस्सा ज्यादा आता है तो ये पित्त दोष के लक्षण हो सकते हैं। साथ ही एसिडिटी, अपच और कब्ज भी पित्त दोष के लक्षण होते हैं। इसके लिए आपको अपने आहार-विहार का ध्यान रखना जरूरी होता है। पित्त दोष को शांत करने के लिए आपको ठंडी और मीठी चीजों का सेवन करना होता है। आप चाहें तो कुछ योगासनों की मदद से भी पित्त दोष को शांत या संतुलन में कर सकते हैं। शशांकासन, गोमुखासन और योगमुद्रासन इसमें काफी फायदेमंद हो सकते हैं। चलिए जानते हैं इन योगासनों को करने का तरीका और इनसे मिलने वाले फायदों के बारे में।

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शशांकासन (Shashankasana)

शशांकासन आसन को करना बेहद आसान होता है। आप इसे आसानी से घर पर भी कर सकते हैं। इस आसन को करने में ज्यादा समय नहीं लगता है, लेकिन इससे फायदे काफी ज्यादा मिलते हैं। नियमित रूप से शशांकासन या शशकासन करने से तनाव और चिंता दूर होती है। अगर आपको बहुत ज्यादा गुस्सा आता है, तो यह आसन आपके लिए भी फायदेमंद होता है। पित्त बढ़ने पर गुस्सा और तनाव बढ़ता है ऐसे में इस आसन को करने से इन दोनों में ही राहत मिलती है, जिससे पित्त दोष को शांत किया जा सकता है। इतना ही नहीं यह पाचन तंत्र, लीवर और किडनी को भी मजबूत बनाता है। इस रोज करने से पीठ, हाथ और पैरों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। यह दिल के रोगियों के लिए भी एक काफी अच्छा योगासन है। अपनी याद्दाश्त और फेफड़ों की शक्ति बढ़ाने के लिए आप इस आसन को रोज कर सकते हैं।

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कैसे करें शशांकासन (How to do Shashankasana)

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप जमीन पर एक मैट बिछा लें। 
  • इस पर वज्रासन में बैठ जाएं। आप चाहें तो पद्मासन में भी बैठ सकते हैं। 
  • अपनी कमर और रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखें।
  • अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाएं। इस दौरान अपने हाथों को कंधों की बराबर दूरी पर रखें।
  • अब सांस छोड़ते हुए अपने हाथों को नीचे आते हुए कमर से आगे की तरफ झकें।
  • अपनी ठोड़ी और हाथों को जमीन पर रखने की कोशिश करें। 
  • अब मुस्कुराहट के साथ बिल्कुल सामने की तरफ देखें। 
  • इस अवस्था में 10-30 सेकेंड तक रुकने के बाद लंबी सांस लेते हुए अपनी प्रारंभिक या सामान्य अवस्था में आ जाएं। 
  • इस आसन को आप 3-5 बार दोहरा सकते हैं। आप चाहें तो अपनी क्षमातानुसार इसका समय भी बढ़ा सकते हैं। 

शशांकासन करते हुए सावधानियां (Shashankasana Precautions)

शशांकासन आसन करते हुए आपको हमेशा कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। अगर आप एकदम स्वस्थ हैं, तो इसे बिना किसी भय के आसानी से कर सकते हैं। लेकिन अगर आप किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या या दर्द से जूझ रहे हैं, तो ऐसे में आपको इसे किसी एक्सपर्ट की देखरेख में ही करना चाहिए। अगर आपको पीठ दर्द की शिकायत रहती है, तो शशांकासन करने से आपको बचना चाहिए। साथ ही साइटिका, स्लिप डिस्क वाले लोगों को भी इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। हर्निया और पेट के मरीजों को शशांकासन करने में समस्या हो सकती है। हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों को किसी एक्सपर्ट की सलाह पर ही इस आसन को करना चाहिए।

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गोमुखासन (Gomukhasana)

आपको देखने में गोमुखासन भले ही कठिन लगता हो, लेकिन इस करना बेहद आसान है। इसमें आपको अपने हाथों और पैरों का इस्तेमाल करना होता है। नियमित रूप से इस आसन को करने से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। गोमुखासन पित्त से होने वाले रोगों को दूर करने में मददगार होता है। अगर इसे नियमित रूप से किया जाए तो इससे तनाव और गुस्सा कम होता है। इससे हाथ और पैरों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। इस आसन को करने से कंधों, गर्दन की अकड़न को दूर किया जा सकता है। सर्वाइकल के दौरान इसे करना काफी फायदेमंद होता है। यह फेफड़ों को मजबूत बनाने के साथ ही पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखता है। यह लीवर, किडनी को स्वस्थ रखता है और इससे सीने का भी विकास होता है।

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कैसे करें गोमुखासन (How to do Gomukhasana)

  •  इस आसन को करने के लिए भी आपको किसी शांतिपूर्ण और साफ जगह पर एक मैट बिछाना होता है।
  •  इस पर अपने दोनों पैरों को आगे करके बैठ जाएं।
  •  अपने दोनों हाथों को बगल में ही रखें। 
  •  अब अपने बाएं पैर को घुटने से मोड़े।
  •  इसके बाद अपने दाएं पैर को घुटने से मोड़ें और बाएं पैर के ऊपर रख दें। इस दौरान आपके दाएं पैर की एड़ी बाएं पैर की नितंब के पास रहेगी। 
  •  इतना होने के बाद अपने बाएं हाथ को कोहनी से मोड़कर पीठ पर ले जाएं और ऊपर को रखें।
  •  अब अपने दाएं हाथ को कोहनी से मोड़कर पीछे की तरफ से कंधों से नीचे लाएं।
  •  फिर अपने दोनों हाथों की उंगुलियों को इंटरलॉक कर लें।
  •  इस अवस्था में सांस लें और छोड़ें। कुछ देर इस अवस्था में रुकने के बाद आप सामान्य अवस्था में आ सकते हैं।
  •  इसके बाद ऐसा ही बाएं पैर और हाथ के साथ करें। इस दौरान आपको ध्यान रखना है कि जो पैर ऊपर है, वही हाथ कंधों से नीचे आएगा।
  •  इस प्रक्रिया को आप 4-5 बार दोहरा सकते हैं।  

गोमुखासन करते हुए सावधानियां (Gomukhasana Precautions)

वैसे तो सभी योगासन को खाली पेट ही करना चाहिए, लेकिन गोमुखासन को खाली पेट करना जरूरी होता है। अगर आप इसे शाम के समय करते हैं तो ध्यान रखें कि आपने 3-4 घंटे से कुछ न खाया हो। हाथ, पैर और घुटनों में दर्द होने पर आपको इस आसन को करने से बचना चाहिए। साथ ही बवासीर की समस्या होने पर भी इसे न करने की सलाह दी जाती है। अगर आपको हाल ही में ऑपरेशन हुआ है तो इसे किसी एक्सपर्ट की सलाह पर ही करें। इतना ही नहीं अगर आप किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, तो भी आपको इसे बिना एक्सपर्ट के नहीं करना चाहिए।

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योगमुद्रासन (Yoga Mudrasana)

योगमुद्रासन पित्त दोष को शांत करने के लिए काफी बेहतरीन योगासन है। इससे मन को शांति मिलती है और गुस्सा शांत होता है। साथ ही यह तनाव, चिंता और अवसाद को भी दूर करने में मदद करता है। इतना ही नहीं नियमित रूप से इस आसन को करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है। यह लीवर, अमाशय और छोटी आंत को भी मजबूत बनाने में मदद करता है। डायबिटीज रोगियों के लिए योगमुद्रासन करना काफी फायदेमंद हो सकता है। 

कैसे करें योगमुद्रासन (How to do Yoga Mudrasana)

  •  इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले आप एक मैट पर पद्मासन में बैठ जाएं।
  •  अपनी दोनों आंखों को बंद कर लें।
  •  अब अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाएं और बाएं हाथ की हथेली से दाएं हाथ की कलाई को पकड़ें। अब लंबी गहरी सांस लें।  
  •  सांस छोड़ते हुए आगे की तरफ झुक जाएं। इस अवस्था में कुछ देर रहें और सांस लें और छोड़ें।
  •  इसके बाद अपनी सामान्य अवस्था में आ जाएं।
  •  इस प्रक्रिया को आप 4-5 बार दोहरा सकते हैं।
  •  गर्भवती महिलाओं को इस आसन को करने से बचना चाहिए।
  • -अगर आपको साइटिका या स्लिप डिस्क की समस्या है, तो भी इसे करने से बचें।

अगर आप भी पित्त दोष से परेशान हैं, तो नियमित रूप से इन योगासनों को कर सकते हैं। ये योगासन आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं। लेकिन शुरुआत में इन्हें किसी एक्सपर्ट की देखरेख में ही करें। साथ ही अगर आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर या योगा एक्सपर्ट की सलाह पर ही इन योगासनों को करें।

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