World Kidney Day 2022: एक्सपर्ट बता रहे हैं किडनी रोगों के लक्षण, कारण और इसके उपचार के बारे में

मेदांता हॉस्पिटल के डॉ. विजय खेर से विश्व किडनी दिवस पर जानें किडनी से जुड़ी बीमारियों और इसके इलाज के बारे में विस्तार से।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Mar 14, 2019Updated at: Mar 10, 2022
World Kidney Day 2022: एक्सपर्ट बता रहे हैं किडनी रोगों के लक्षण, कारण और इसके उपचार के बारे में

10 मार्च को दुनियाभर में वर्ल्ड किडनी डे यानी विश्व किडनी दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्रॉनिक किडनी रोगों से दुनियाभर में करोड़ों लोग प्रभावित हैं। भारत में ये आठवां सबसे बड़ा रोग है, जिसके कारण सबसे ज्यादा लोगों की मौतें होती हैं। किडनी से जुड़ी बीमारियों, इसके लक्षणों और इलाज के बारे में मेदांता हॉस्पिटल, दिल्ली के किडनी एंड यूरोलॉजी इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. विजय खेर बता रहे हैं।

पिछले कुछ सालों में किडनी रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसका कारण यह है कि खानपान और जीवनशैली की गलत आदतों के कारण बहुत सारे लोग हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और तनाव का शिकार हो रहे हैं। किडनी रोग किसी भी उम्र और लिंग के व्यक्ति को हो सकता है।

किडनी रोगों के इलाज बहुत मंहगा है, यही कारण है कि गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इस इलाज का खर्च उठा पाना मुश्किल होता है। दुनियाभर में डायलिसिस, ट्रांसप्लांटेशन और सही इलाज के अभाव में हर साल 2.3 से 7.1 मिलियन लोगों की मौत हो जाती है।

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किडनी रोगों का कारण और लक्षण

आमतौर पर क्रॉनिक किडनी रोगों का मतलब है किडनी का सही तरह से काम न कर पाना। कई बार किडनी थोड़ी डैमेज होती है, जबकि कई बार पूरी तरह डैमेज हो जाती है, जिसे किडनी फेल्योर कहते हैं। किडनियां हमारे शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने का काम करती हैं। इसके अलावा किडनियां ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, शरीर में नमक और फ्लुइड को कंट्रोल करने और लाल रक्त कोशिकाएं बनाने के लिए हार्मोन्स का निर्माण करने में मदद करती है। किडनियां हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए भी जरूरी होती हैं। किडनी डैमेज होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, यूरिन इंफेक्शन, एचआईवी, मलेरिया, टीबी और हेपाटाइटिस आदि शामिल हैं।

क्रॉनिक किडनी डिजीज के लक्षणों में मूत्र के साथ खून आना, जल्दी-जल्दी या बहुत कम पेशाब लगना, पैरों और तलवों में सूजन, थकान और आलस, नींद की कमी या सोने में परेशानी होना, त्वचा का रूखा हो जाना या खुजली शुरू हो जाना, भूख कम लगना, बिना कारण वजन कम होना, जी मिचलाना और उल्टी आदि हैं।

किन्हें होता है खतरा

आमतौर पर किडनी की गंभीर बीमारियों का खतरा बड़ी उम्र के लोगों को होता है। इसके अलावा धूम्रपान करने वालों, डायबिटीज रोगियों, ब्ल्ड प्रेशर रोगियों, परिवार में किडनी के इतिहास आदि के कारण भी किडनी रोग हो सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि दर्दनिवारक दवाओं के ज्यादा सेवन या लंबे समय तक सेवन से भी क्रॉनिक किडनी रोग की संभावना बढ़ जाती है। किडनी रोगों के कारण दिल से जुड़ी बीमारियां जैसे हार्ट अटैक आदि भी हो सकते हैं।

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किडनी रोग की जांच कैसे होती है

  • यूरिन टेस्ट- यूरिन टेस्ट के द्वारा किडनी रोगों का पता लगाया जा सकता है।
  • ब्लड टेस्ट- किडनी कितनी सही तरह काम कर रही है इसका पता ब्लड यूरिया और क्रिएटिनिन टेस्ट के द्वारा लगाया जा सकता है।
  • इमेजिंग टेस्ट- अल्ट्रासाउंड के द्वारा किडनी के आकार या स्थिति में परिवर्तन के बारे में पता लगाया जा सकता है।
  • किडनी बायोप्सी- किडनी कितनी खराब हो चुकी है, इस बात का पता लगाने के लिए किडनी का बायोप्सी टेस्ट किया जाता है।

किडनी रोगों से बचाव के लिए क्या करें

किडनी रोगों से बचाव के लिए सबसे जरूरी यह है कि लक्षणों के दिखने पर आप चिकित्सक से मिलें और किडनी की जांच करवाएं। इसके अलावा इस रोग से बचाव के लिए आपको हेल्दी लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए।

  • किडनी को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना बहुत जरूरी है। अगर आप पर्याप्त पानी और अन्य तरल पदार्थ पीते हैं, तो शरीर से हानिकारक पदार्थ जैसे- सोडियम, यूरिया आदि मूत्र के रूप में बाहर निकल जाते हैं। सामान्य तौर पर हर व्यक्ति को एक दिन में कम से कम 1.5 से 2 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। हालांकि व्यक्ति के कार्य और जलवायु के अनुसार पानी की जरूरतें बदलती रहती हैं। आमतौर पर जो व्यक्ति जितना अधिक सोडियम खाता है, उसको उतना ज्यादा पानी पीना चाहिए।
  • घर में बनाए हुए हेल्दी आहार खाने से किडनियां स्वस्थ रहती हैं। अपने आहार में फलों, सब्जियों, प्रोटीन आदि को शामिल करें।
  • धूम्रपान की आदतें भी किडनी रोगों को बढ़ाती हैं। ज्यादा धूम्रपान करने से धमनियां डैमेज हो जाती हैं, जिससे किडनियों तक ठीक से रक्त का प्रवाह नहीं हो पाता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर और किडनी कैंसर का भी खतरा बढ़ता है।
  • किडनियों को स्वस्थ रखने के लिए वर्कआउट और एक्सरसाइज करना भी बहुत जरूरी है। एक्सरसाइज से कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और शरीर का वजन कम होते हैं। इससे आपका स्टेमिना बढ़ता है और इम्यूनिटी भी बढ़ती है।

भारत में नेशनल डायलिसिस स्कीम और आयुष्मान भारत के साझा प्रयासों द्वारा हर गरीब तक किडनी का इलाज उपलब्ध करवाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इस तरह की पहल से किडनी रोगियों को आसान इलाज भी उपलब्ध होगा और किडनी रोगों से बचाव में मदद मिलेगी।

- Dr Vijay Kher, Chairman, Kidney and Urology Institute, Medanta

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