कितनी स्वस्थ हैं आपकी किडनियां? जानने के लिए जरूरी है 'किडनी फंक्शन टेस्ट', जानें कैसे होता है ये टेस्ट

किडनी फंक्शन टेस्ट द्वारा ये पता लगाया जाता है कि किडनियां कितनी स्वस्थ हैं। आजकल किडनी की बढ़ती बीमारियों को देखते हुए ये टेस्ट सभी के लिए जरूरी है।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavUpdated at: Nov 26, 2020 19:40 IST
कितनी स्वस्थ हैं आपकी किडनियां? जानने के लिए जरूरी है 'किडनी फंक्शन टेस्ट', जानें कैसे होता है ये टेस्ट

किडनी का स्वस्थ रहना हमारे जीवन के लिए जरूरी है। हम सभी के शरीर में 2 किडनियां होती हैं। किडनियां खून में मौजूद टॉक्सिन्स (खराब पदार्थों) को छान कर साफ करती हैं, ताकि ये खराब पदार्थ आपके शरीर से पेशाब के रूप में बाहर निकल सकें। किडनियां हमारे शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स का संतुलन भी रखती हैं। आमतौर पर किडनी फंक्शन टेस्ट तब करवाया जाता है, जब डॉक्टर को ये लगता है कि आपकी किडनियां ठीक से काम नहीं कर रही हैं। अगर आप साल में सिर्फ 1 बार अपना किडनी फंक्शन टेस्ट करवा लें, तो किडनी की बीमारियों से बचाव संभव है, क्योंकि इससे समय रहते होने वाली बीमारी का पता चल सकता है।

क्या है किडनी फंक्शन टेस्ट

किडनी फंक्शन टेस्ट इसलिए किया जाता है, ताकि ये पता लगाया सके कि आपकी किडनियां सही काम कर रही हैं या नहीं। किडनी फंक्शन टेस्ट में 2 प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं, जिन्हें ACR (एल्बुमिन टू क्रिएटिनिन रेशियो) और GFR (ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट) कहते हैं। ये टेस्ट आमतौर पर 500 से 700 रुपए में हो जाता है।

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ACR में किया जाता है यूरिन (पेशाब) की जांच

ACR टेस्ट में आपके यूरिन की जांच की जाती है। एसीआर यानी एल्बुमिन टू क्रिएटिनिन रेशियो। एल्बुमिन एक तरह का प्रोटीन है जो हमारे शरीर के लिए जरूरी है। मगर ये प्रोटीन आपके खून में होना चाहिए, न कि पेशाब में। इसलिए अगर ACR टेस्ट में आपके यूरिन में एल्बुमिन पाया जाता है, तो इसका अर्थ है कि आपकी किडनियां ठीक से काम नहीं कर रही हैं।

GFR में की जाती है खून की जांच

GFR टेस्ट में आपके खून में क्रिएटिनिन नाम के तत्व की जांच की जाती है। क्रिएटिनिन एक तरह का अपशिष्ट पदार्थ है, जिसको शरीर से बाहर निकल जाना चाहिए। मगर किडनियों के ठीक से काम न कर पाने के कारण किडनियां खून से इस तत्व को अलग नहीं कर पाती हैं। GFR टेस्ट में मिले क्रिएटिनिन की मात्रा के आधार पर ही ये पता लगाया जाता है कि आपकी किडनियां कितनी ठीक तरह काम कर रही हैं।

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खराब किडनी की स्थिति जानने के लिए किडनी बायोप्सी टेस्ट

किडनी बायोप्सी टेस्ट में किडनी से एक छोटा टिशू (ऊतक) का टुकड़ा निकाला जाता है और इसी टिशू की जांच से रोग के प्रकार और उसकी स्टेज के बारे में पता लगाया जाता है। इस जांच से यह भी पता चल जाता है कि किडनियां कितनी खराब हो चुकी है।

टेस्ट करवाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी

किडनी फंक्शन टेस्ट करवाने से पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि टेस्ट से आपको सही जानकारी मिल सके।

  • आमतौर पर किडनी फंक्शन टेस्ट के लिए सुबह के सबसे पहले यूरिन को सही माना जाता है।
  • किडनी फंक्शन टेस्ट से कम से कम 24 घंटे पहले से आपको एल्कोहल और नशीले पदार्थों का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए।
  • कई बार डॉक्टर्स आपको टेस्ट से 10-12 घंटे पहले से ही उपवास रखने (कुछ न खाने) की सलाह देते हैं। इस दौरान आप सिर्फ पानी पी सकते हैं।
  • खून की जांच के लिए जांचकर्ता आपके शरीर से थोड़ी मात्रा में खून का सैंपल निकालते हैं, जिसकी जांच की जाती है।

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