क्‍या कोरोनावारस पर पड़ेगा बारिश का असर, मानसून में COVID-19 फैलेगा या नहीं, जानिए वैज्ञानिकों की राय

बारिश आने के साथ कई बीमारियां भी आती हैं, मगर कोरोना वायरस को लेकर यह उम्‍मीद जताई जा रही है कि बारिश इसे रोक सकती है।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Jun 15, 2020Updated at: Jun 15, 2020
क्‍या कोरोनावारस पर पड़ेगा बारिश का असर, मानसून में COVID-19 फैलेगा या नहीं, जानिए वैज्ञानिकों की राय

भारत में कोरोनावायरस का पहला मरीज दिसंबर में सामने आया था। इसके बाद धीरे-धीरे COVID-19 के मामले बढ़ते गए। जब कोरोनावायरस धीमी गति से फैल रहा था तो लोग ये कयास लगा रहे थे कि गर्मी आते-आते ये खत्‍म होने लगेगा। मगर क्‍या ऐसा हुआ? जवाब है 'नहीं'...अब जब मानसून शुरू हो रहा है तो लोग इसे बारिश के मौसम से भी जोड़कर देखने लगे हैं। अधिकांश लोगों को लगता है कि बारिश के साथ कोरोना भी नष्‍ट हो जाएगा। मगर ये सवाल यहां भी है कि क्‍या मानसून कोरोना वायरस पर असर डालेगा? 

दरअसल, COVID-19 एक नया वायरस है, वैज्ञानिक अभी तक सुनिश्चित नहीं सके हैं कि बारिश वायरस के व्यवहार को कैसे प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रयास यह है कि बरसात के मौसम में कोविड-19 से समानता रखने वाले विषाणुओं के व्यवहार के तरीके का पता लगाया जाए।

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अभी भी वैज्ञानिकों की पकड़ से दूर है कोरोनावायरस

दरअसल, बारिश अपने साथ कई वेक्टर जनित रोग लाती है जैसे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया। डेंगू के मामले में, कुछ अध्ययनों से पता चला है कि अत्यधिक बारिश मच्छरों के प्रजनन चक्र को रोकता है और इसके प्रजनन स्थलों को नष्‍ट कर देते हैं। वहीं अगर इन्फ्लूएंजा और कोविड-19 की तुलना करें तो यह दोनों ही एक श्वसन रोग है, हालांकि दोनों वायरस जिस तरह से मनुष्य को प्रभावित करते हैं, उसमें महत्वपूर्ण अंतर हैं।

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वैज्ञानिकों की राय

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर डॉ एम एस चड्ढा, जिन्होंने आरएसवी (Respiratory syncytial virus) पर काफी काम किया है, उन्‍होंने कहा कि यह निर्धारित करने में कई साल लग सकते हैं कि अलग-अलग मौसमों से नॉवेल कोरोनोवायरस कैसे प्रभावित होता है। चूंकि आरएसवी संक्रमण और अन्य श्वसन रोग आम तौर पर मौसमी पैटर्न का पालन करते हैं, इसलिए कई वर्षों के लिए साल-दर-साल कोविड-19 की निगरानी करना इसके नेचर को निर्धारित करने की कुंजी होगी।

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मौसम और मानव व्यवहार

मुंबई में सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन बेसिक साइंसेज के वैज्ञानिक डॉ सुभोजीत सेन ने कहा कि वायरल डिजीज फैलने के तीन प्रमुख कारक हैं- मौसमी बदलाव, मनुष्‍य का बिहैविरल पैटर्न और वायरस की आंतरिक विशेषताएं, जैसे वायरस की संक्रामकता, रोगजनकता। उन्होंने बारिश के मौसम के दौरान कुछ ऐसी चीजों की ओर इशारा किया, जिनसे उम्मीद की जा सकती है कि इस तरह की बीमारियां कैसे फैल सकती हैं।

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उदाहरण के लिए, सड़कों पर थूकना एक आम समस्या है जिससे वायरस के संचरण का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही उन्‍होंने यह भी उम्मीद जताई कि बारिश सड़कों को धोएगी या वायरस को डायल्‍यूट कर सकती है। इसके अलावा, बारिश के दौरान, लोग घरों या कार्यालयों में लंबे समय तक वक्‍त बिताते हैं, इससे भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की कम संख्या होने की संभावना है।

Inputs: The Indian Express  

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