Virabhadrasana 1, 2 & 3: वीरभद्रासन 1, 2 और 3 में क्या है अंतर? जानें इन तीनों को करने की विधि और फायदे

वीरभद्रासन 1,2 और 3 एक दूसरे से कितने भिन्न है, ये जानना जरूरी है। साथ ही इन तीनों को करने से सेहत को क्या-क्या फायदे होते हैं? जानते हैं...

Garima Garg
Written by: Garima GargUpdated at: Apr 27, 2021 13:48 IST
Virabhadrasana 1, 2 & 3: वीरभद्रासन 1, 2 और 3 में क्या है अंतर? जानें इन तीनों को करने की विधि और फायदे

वीरभद्रासन (Virabhadrasana 1, 2 & 3) जिसे इंग्लिश में वॉरियर्स पोज भी कहा जाता है। यह तीन प्रकार का होता है- वीरभद्रासन 1, वीरभद्रासन 2 और वीरभद्रासन 3। इन तीनों को करने से सेहत को अलग अलग तरीके से लाभ होते हैं। ऐसे में सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि वीरभद्रासन के तीनों प्रकार एक दूसरे से कितने अलग है। साथ ही इन तीनों के फायदे और विधि भी जानना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि वीरभद्रासन 1, 2 और 3 को करने की विधि (steps of Virabhadrasana 1, 2 & 3) क्या है। साथ ही इसके फायदे (benefits of Virabhadrasana 1, 2 & 3) भी जानेंगे। पढ़ते हैं आगे...

वीरभद्रासन 1 करने की विधि

सबसे पहले जमीन पर मैट बिछाएं और उस पर खड़े हो जाएं। अब गहरी लंबी सांस लें और अपने बाएं पैर को अंदर की तरफ मोड़ें। वही दाहिने पैर को बाहर की तरफ मोड़ें। अब अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ लेकर जाएं और अपनी नजरों को भी अपने हाथों पर टिकाएं। गहरी लंबी सांस लेते रहें। आपके दोनों  पैर एक ही रेखा में होने चाहिए। अब 30 से 40 सेकंड तक इस स्थिति में बने रहें। समय आप अपनी क्षमता के अनुसार भी निर्धारित कर सकते हैं। अब पहले की स्थिति में आने के लिए सबसे पहले अपने हाथों को नीचा कर लें। और अपने सर को भी नीचे ले आएं। अब ये प्रक्रिया दूसरे पैर से करें।

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वीरभद्रासन 2 करने की विधि

इस आसन को करते वक्त भी सबसे पहले जमीन पर मैट बिछाए और उस पर खड़े हो जाएं और गहरी लंबी सांस लें। अब अपने बाएं पैर को अंदर की तरफ मोड़ें और दाएं पैर को पीछे की तरफ लेकर जाएं। दोनों पैर एक ही रेखा में होने चाहिए। अब अपने दाएं हाथ को कंधे की सीध में और बाएं हाथ को भी कंधे की सीध में लेकर आएं। अब बाएं हाथ की करफ अपना सर घुमाएं और नजरों को भी बाएं हाथ की सीध में रखें। समय आप अपनी क्षमता के अनुसार भी निर्धारित कर सकते हैं। अब पहले की स्थिति में आने के लिए सबसे पहले अपने हाथों को नीचा कर लें। और अपने सर को भी नीचे ले आएं। अब ये प्रक्रिया दूसरे पैर से करें।

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वीरभद्रासन 3 करने की विधि

वीरभद्रासन 3 को करने के लिए भी सबसे पहले जमीन पर मैट बिछाएं और उस पर खड़े हो जाएं। ताड़ासन की स्थिति में आने के बाद अपने दोनों पैरों को सीधा रखें और शरीर को झुका कर अपने दोनों हाथों को जमीन पर रखें। अब अपने बाएं पैर को उठाएं और पीछे की ओर ले जानें का प्रयास करें। आपका पैर सीधा होना चाहिए। इसके बाद दोनों हाथों को कंधे की सीध में एक ही दिशा में लेकर जाएं। अपने दोनों हाथों को सीधा करें और जमीन के समांतर ले आएं। हाथों की तरफ आपकी नजरें भी होनी चाहिए। दूसरी तरफ बाएं पैर को सीध में रखें। अब 30 से 40 सेकंड तक इस स्थिति में बने रहें। समय आप अपनी क्षमता के अनुसार भी निर्धारित कर सकते हैं। अब पहले की स्थिति में आने के लिए सबसे पहले अपने हाथों को नीचा कर लें। और अपने सर को भी नीचे ले आएं। अब ये प्रक्रिया दूसरे पैर से करें।

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वीरभद्रासन 1, 2 & 3  को करते वक्त बरतने वाली सावधानी

1 - वीरभद्रासन वे लोग ना करें, जिन्हें दिल की समस्या है या जिन लोगों के गर्दन, हथेली, कंधे, हाथ में चोट लगी है।

2 - अगर किसी व्यक्ति को हाई बीपी या दस्त की समस्या हो रही है तो वह वीरभद्रासन को ना करें। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को गर्दन की समस्या है या कंधों की समस्याएं तो वे भी इस आसन को ना करें।

3 - वीरभद्रासन 3 को वह व्यक्ति ना करें, जिन्हें जिसके कंधे में या गर्दन में किसी प्रकार की चोट लगी है। अगर किसी व्यक्ति के रीढ़ की हड्डी में दिक्कत है तो वे भी इस आसन को करने से बचें। घुटनों में दर्द और पेट में दर्द के दौरान भी इस आसन को न करें।

वीरभद्रासन 1, 2 और 3 को करने के फायदे

1 - इस आसन को करने से कंधे, जांघ, पेट, पीठ आदि में मजबूती आती है।

2 - साइटिका की समस्या भी दूर हो जाती है।

3 - कूल्हों को मजबूती मिलती है।

4 - पाचन क्रिया तंदुरुस्त बनी रहती है।

5 - जांघों को मजबूती मिलती है।

6 - कमर दर्द से छुटकारा मिलता है और ऑस्टियोपोरोसिस और बांझपन की समस्या से भी आराम मिलता है।

7 - फेफड़ों और छाती को भी मजबूती मिलती है।

8 - पिंडली की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और खिंचाव आता है।

नोट - ऊपर बताए गए बिंदु से पता चलता है कि यह तीनों आसन एक दूसरे से ज्यादा अलग नहीं है। लेकिन हां, इनके करने का तरीका थोड़ा अलग है, जिससे शरीर को अलग अलग तरीके से फायदे भी मिलते हैं।

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