दिन में ज्यादा नींद का कारण हो सकता है नार्कोलेप्सी रोग, जानें लक्षण और बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 16, 2018
Quick Bites

  • नार्कोलेप्सी नींद से जुड़ा एक डिस्आर्डर है।
  • दिन में ज्यादा नींद आना इस रोग का लक्षण होता है।
  • नार्कोलेप्सी का आसानी से इलाज संभव है।

नार्कोलेप्सी नींद से जुड़ा एक डिस्आर्डर है, जिसमें व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा नींद आती है। आमतौर पर दिन में ज्यादा नींद आना इस रोग का लक्षण होता है। नार्कोलेप्सी के कारण व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अचानक सो सकता है। कई बार तो मरीज बैठे-बैठे, हंसते हुए या रोते समय भी सोने लगता है। आमतौर पर किसी को ज्यादा नींद आने पर लोग समझते हैं कि ये ज्यादा थकान या ज्यादा खाने का परिणाम है मगर नार्कोलेप्सी को मेडिकल साइंस में एक न्यूरोलॉजिकल समस्या माना जाता है, जिसका आसानी से इलाज संभव है। आइये आपको बताते हैं क्या है नार्कोलेप्सी और कैसे करें इससे बचाव।

क्या है नार्कोलेप्सी

नार्कोलेप्सी एक तरह का स्लीप डिस्आर्डर है, जिसमें मरीज़ कभी भी अचानक सो जाता है। इस डिस्आर्डर के कारण रातभर पूरी नींद लेने के बावजूद मरीज दिन भर उनींदा और थका हुआ महसूस करता है। इस रोग से प्रभावित मरीज कितना भी सो ले लेकिन उसे ऐसा लगता है, जैसे वह सोया ही नहीं है। यह बीमारी ज्यादातर 15 से 25 साल की उम्र के लोगों को अपना शिकार बनाती है और ये पुरुष या महिला किसी को भी हो सकती है।

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क्या हैं नार्कोलेप्सी के लक्षण

  • नार्कोलेप्सी के मरीज को पूरे दिन नींद आती रहती है।
  • 8-9 घंटे नींद लेने के बाद भी मरीज को नींद अधूरी लगती है।
  • ज्यादा नींद के साथ-साथ मरीज को आलस और थकान की समस्या होती है।
  • मरीज कहीं भी और कभी भी सो जाता है जैसे- हंसते हुए, रोते हुए, बैठे हुए या खाते हुए।
  • आमतौर पर नार्कोलेप्सी के मरीज सुबह बहुत देर से उठते हैं।
  • नार्कोलेप्सी के मरीज को कई बार स्लीप पैरालिसिस की समस्या भी हो सकती है।

क्या है नार्कोलेप्सी का इलाज

सोने और जागने का समय करें निर्धारित

नार्कोलेप्सी के मरीजों के लिए सोना का शेड्यूल बनाना बहुत जरूरी है। हर रोज एक ही समय पर सोने के लिए बिस्तर पर जाएं और सुबह बिस्तर छोड़ें। बेडरूम में रीडिंग या फिर टीवी देखने जैसी एक्टीविटी न करें, इससे नींद में खलल पड़ सकता है।

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दिन में कई बार नींद की झपकियां लें

पूरे दिन के दौरान बराबर अंतराल पर नींद की छोटी छोटी झपकियां लें। ये झपकी 15-20 मिनट की हो सकती हैं। झपकी लेने से आपको ताज़गी महसूस होती और अगले तीन चार घंटे के लिए आपको नींद नहीं आएगी। कुछ लोगों को यदि अधिक जरूरत हो तो झपकी का समय बढ़ाया भी जा सकता है।

डॉक्टर से लें सलाह

नार्कोलेप्सी का इलाज संभव है इसलिए ऐसी समस्या होने पर या इसके लक्षण दिखाई देने पर आपको डाक्टर से संपर्क करना चाहिए। नार्कोलेप्सी के इलाज के लिए 'मोडाफाइनिल' नाम की दवा का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं इसलिए इसे बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेना चाहिए।

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