थायरॉइड बन सकता है हार्ट अटैक और ब्रेन डैमेज का कारण, बरतें ये सावधानियां

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 09, 2018
Quick Bites

  • थायरॉइड बीमारी लंबे समय तक रहने पर दिल और दिमाग को प्रभावित करती है।
  • आयोडीन की कमी से यह समस्या और अधिक बढ़ जाती है।
  • गर्भवती स्त्रियों में होने वाले शिशु के लिए खतरनाक है थायरॉइड की समस्या।

भारत में थायरॉइड के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। थायरॉइड का मु्ख्या कारण शरीर में आयोडिन की कमी और मोटापा है। थॉयराइड रोग कई तरह से लोगों को प्रभावित करता है। गले में होने वाले इस रोग की वजह से कई अन्य रोगों का खतरा बढ़ जाता है। जिन परिवारों में थायरॉइड की बीमारियों का इतिहास होता है, उनमें इस बीमारी की संभावना अधिक होती है। क्या आप जानते हैं कि थायरॉइड के मरीजों को हार्ट अटैक और ब्रेन डैमेज का खतरा होता है क्योंकि ये बीमारी लंबे समय में दिल और दिमाग को प्रभावित करती है। थायरॉइड गले में मौजूद एक अंग है, जो थायरॉक्सिन हार्मोन का निर्माण करता है। इसी हार्मोन के असंतुलन के कारण थायरॉइड की बीमारी होती है।

दिल और दिमाग की बीमारियों का खतरा

थायरॉइड की समस्या का अगर समय से इलाज नहीं किया जाए, तो व्यक्ति को अचानक कार्डियक अरेस्ट, एरिथमिया (हार्टबीट असामान्य होना), ऑस्टियोपोरोसिस, कार्डियक डायलेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा गर्भावस्था में ऐसा होने पर गर्भपात, समयपूर्व प्रसव, प्रीक्लैम्पिसिया (गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ना), गर्भ का विकास ठीक से न होना जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा शोध बताते हैं कि बहुत सारे मरीजों में थायरॉइड ब्रेन डैमेज का भी कारण बन सकता है।

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महिलाओं को ज्यादा खतरा

महिलाओं में हॉर्मोनों का बदलाव आने की संभावना पुरुषों की तुलना में अधिक होती है। आयोडीन की कमी से यह समस्या और अधिक बढ़ जाती है। तनाव का असर भी टीएसएच हार्मोन पर पड़ता है। इसलिए महिलाओं को हर साल थॉयराइड ग्लैंड की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए, इससे कोई भी समस्या तुरंत पकड़ में आ जाती है और समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है।

हायपोथायरॉइडिज्म है खतरनाक

हायपोथायरॉइडिज्म, थायरॉइड ग्लैंड से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसका इलाज न किए जाने पर यह गॉयटर (घेंघा) का रूप ले सकता है। घेंघा के कारण गर्दन में सूजन आ जाती है। इसके अलावा हायपोथायरॉइडिज्म के कारण आथरोस्क्लेरोसिस, स्ट्रोक, कॉलेस्ट्रॉल बढ़ना, बांझपन, कमजोरी आदि का भी खतरा होता है।
हाइपरथॉयराइडिज्म में जब थायरॉइड ज्यादा सक्रिय होता है तो ग्लैंड से हॉर्मोन ज्यादा बनता है, जो ग्रेव्स डीजीज या ट्यूमर तक का कारण बन सकता है। ग्रेव्स डीजीज में मरीज में एंटीबॉडी बनने लगते हैं जिससे थायरॉइड ग्लैंड ज्यादा हॉर्मोन बनाने लगती है।

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आयोडीन का ज्यादा सेवन भी है खतरनाक

आमतौर पर ज्यादातर लोग यही जानते हैं कि आयोडीन की कमी से थायरॉइड रोग होता है। मगर आपको बता दें कि आयोडीन के ज्यादा सेवन से भी इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा हॉर्मोन युक्त दवाओं के सेवन से भी हायपरथायरॉइडिज्म हो सकता है। इसके लक्षण हैं ज्यादा पसीना आना, थायरॉइड ग्लैंड का आकार बढ़ जाना, हार्ट रेट बढ़ना, आंखों के आसपास सूजन, बाल पतले होना, त्वचा मुलायम होना। लेकिन ऐसे मामले कम पाए जाते हैं।

जीवनशैली में बदलाव से बचाव संभव

डॉक्टर इन बीमारियों से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव लाने की सलाह देते हैं, खासतौर पर उन लोगों को ये बदलाव लाने चाहिए जिनके परिवार में इस बीमारी का इतिहास है। इसमें नियमित जांच, खूब पानी पीने, संतुलिस आहार, नियमित रूप से व्यायाम, धूम्रपान या शराब का सेवन नहीं करने और अपने आप दवा नहीं लेने जैसे सुझाव शामिल हैं।

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