क्यों होते हैं गले में छाले? जानें थ्रोट अल्सर (Throat Ulcer) का कारण, लक्षण और इलाज के लिए घरेलू उपाय

गले में छाले होने पर व्यक्ति के लिए कुछ भी खाना-पीना मुश्किल हो जाता है क्योंकि असहनीय दर्द होता है। जानें इन छालों के होने का कारण और कुछ घरेलू उपचार

Kunal Mishra
Written by: Kunal MishraPublished at: Mar 30, 2021Updated at: Mar 30, 2021
क्यों होते हैं गले में छाले? जानें थ्रोट अल्सर (Throat Ulcer) का कारण, लक्षण और इलाज के लिए घरेलू उपाय

गले में होने वाले संक्रमण हमेशा ही पीड़ादायक होते है। ऐसे में गले में होने वाले छाले तो अधिकतर परेशानी देते है। गले और कान नाक जैसे संवेदनशील अंगों (Sensitive Parts) में भी छाले होते हैं। ऐसे ही गले में होने वाले छाले को थ्रोट अल्सर (Throat Ulcer) कहते हैं। क्या आप जानते हैं इसके बारे में। यह छाले गले के पीछे वाले हिस्से में होते है। इनका आकार छोटा होता है। यह दिखने में लाल रंग के होते हैं और इनपर सफेद रंग के धब्बे भी होते है। इस समस्या से ग्रस्त होने के बाद व्यक्ति को खाने-पीने, बोलने आदि में तकलीफ होती है। ऐसा महसूस होता है कि किसी ने आपके गले में कुछ रख दिया हो। वैसे तो गले में छाले होना किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है, लेकिन शुरूआत से ही इसका उपचार कराने से इसे नियंत्रित भी किया जा सकता है। समस्या ज़्यादा हो जाने के कारण कई बार इसके परिणाम स्वरूप गले में सूजन भी हो सकती है। इन छालों का आकार लगभग स्ट्रेप थ्रोट (Strep Throat) के समान ही होता है।

मुंह में छाले तो आए दिन होते ही रहते है जो कि कुछ दिनों में ही ठीक हो जाते है। उससे ज़्यादा तकलीफ नहीं होती। लेकिन गले के छाले बहुत दर्दनाक होते है। इन छालों पर खाना-पानी ऐसा लगता है मानो गले में सूइयां चुभ रही हों। कुछ ठंडा या गर्म खाते समय गले में जलन होती है। गले में छालों की वजह से बुखार भी आ सकता है। कई बार यह छाले खाने की नली (Esophagus), जो हमारे गले से लेकर पेट तक जुड़ी होती है, उसमें भी जगह बना लेते हैं। यह वॉइस बॉक्स में भी हो सकते है। इसके कई कारण होते है। समय पर ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए वरना आगे जाके कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। थ्रोट अल्सर की समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान भी यह छाले हो सकते है। 

आइए जानते है थ्रोट अल्सर के कारण  (Causes of Throat Ulcer)

एसिड रिफ्लक्स  (Acid Reflux) 

अम्ल प्रतिवाह या एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux) थ्रोट अल्सर का एक प्रमुख कारण है। जब पेट का एसिड खाने की नली (Esophagus) में उल्टा बह कर आता है। इससे हर्टबर्न (Heartburn) भी कहते है। इसके कारण गले में छाले पड़ जाते है और गले में व पेट के उपरी हिस्से में जलन महसूस होती है। वैसे तो एसिड रिफ्लक्स की समस्या अपच या खाना खाने के साथ पानी का सेवन करने से होती है। आपका पाचन तंत्र जब खाना पचाने में असमर्थ हो जाता है, तब एसिड रिफलक्स की समस्या होती है, जो मुंह के छालों का कारण भी बन सकती है। 

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सिगरेट- शराब का सेवन  (Consuming Cigarette-Alcohol)

सिगरेट-शराब का सेवन करने वाले लोगों के गले में छाले होने की आशंका बढ़ जाती है। सामान्य व्यक्ति की तुलना में थ्रोट अल्सर होने का खतरा ऐसे लोगों में ज्यादा होता है। सिगरेट के धुंए से वाल्व (पेट की लाइनिंग) कमजोर पड़ जाती है और एसिड रिफ्लक्स बार-बार होने लगता है, जिससे थ्रोट अल्सर का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही शराब थ्रोट अल्सर को ज़्यादा उत्तेजित कर सकती है। शराब का सेवन गले में दर्द और खराश देता है। थ्रोट अल्सर होने के बाद भी यदि सिगरेट और शराब का सेवन नहीं बंद किया गया तो इसे कैंसर में तब्दील होनें में समय नहीं लगता है।

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एलर्जी और इंफेक्शन  (Allergy and Infection)

थ्रोट अल्सर गले में होने वाली किसी एलर्जी या फंगल (Fungal), बैक्टिरियल (Bacterial) और वायरल इंफेक्शन (Viral Infection) के कारण भी हो सकता है। यह आपकी श्वास प्रणाली के संक्रमण और कान के संक्रमण के कारण भी हो सकती है। कई बार यह समस्या पोस्ट नेसल ड्रिप (नाक बहना) के कारण भी हो सकती है। जब ज़ुकाम के दौरान नाक से कफ़ बहकर गले में आता है तो यह अल्सर को बढ़ावा दे सकता है।

तम्बाकू और पान चबाना  (Chewing Tobacco)

तम्बाकू (Tobacco) और पान चबाने से भी गले में छाले पड़ते हैं यह तो आप बखूबी जानते होंगे। स्वाद और तलब को संतुष्ट करने के लिए लोग इन हानिकारक खाद्य पदार्थो का सेवन करने से बाज नहीं आते हैं। ऐसे पदार्थ आपके गले में जाकर स्किन और मसल्स (Muscles) को इची बना देते है। इनमें मौजूद जहरीले पदार्थ और कैमिकल आपके मुंह में घुलकर कैंसर का खतरा बढ़ा देते हैं।

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दवाईयों का रिएक्शन  (Reaction of Medicine)

 थ्रोट अल्सर बेहिसाब दवाइयों के सेवन से भी होता है। कई बार हम बिना जाने समझे कोई भी दवा खा लेते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप गले में और मुंह में छाले पैदा हो जाते हैं। इसी लिए कहा जाता है कि हमेशा दवाई चिकित्सक द्वारा सलाह लेने के बाद ही खानी चाहिए। ज्यादा एंटीबॉयोटिक दवाओं (Antibiotic Medicine) के साथ अन्य कई दवाओं का सेवन एक साथ कर लेने से मुंह में दर्द और छालों की समस्या होती है।

कीमोथेरेपी  (Chemotherapy)

 कैंसर (Cancer) के लिए की जाने वाली कीमोथेरेपी (Chemotherapy) के रिएक्शन से भी गले में छाले पड़ जाते है। यह थेरेपी गले में खुजली और जलन को भी बढ़ावा दे सकता है। कीमोथेरेपी और रेडिएशन गले में सूजन जैसी समस्याओं को भी बढ़ावा दे सकता है। हालांकि इस थेरेपी के बाद कई लोगों में बाल झड़ने, कमजोरी आने समेत कई साइड इफेक्ट देखे गए हैं। इस थेरेपी को लेने के बाद भी व्यक्ति में गले में छाले होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

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विटामिन बी की कमी  (Vitamin Deficiency) 

कई बार शरीर में विटामिन बी की कमी भी गले में छाले दे सकती है। अचानक से गले में छाले पड़ना आपको यह संकेत दे सकते हैं कि आपके शरीर में विटामिन बी की कमी है। विटामिन बी की कमी होने से गले और मुंह में छाले लालपन और सूजन होने लगती है। ऐसे में विटामिन की गोलिय़ां खाकर आप इससे आसानी से निजात पा सकते हैं।

डायबिटीज़  (Diabetes) 

डायबिटीज़ के कारण भी आपके गले और मुंह में छाले सूजन और लाल घाव बं सकते है। ऐसे में उल्टी और जी मचलने की स्थिति भी हो सकती है। गले में खुजली इरीटेशन समेत छाले पड़ जाते है।

यह हैं थ्रोट अल्सर के लक्षण  (Symptoms of Throat Ulcer)

  • गले में दर्द होना  (Sore Throat)
  • बुखार आना  (Fever)
  • जी मचलना और उल्टी आना  (Vomiting) 
  • मुंह में छाले पड़ना  (Sore Mouth)
  • गले में सूजन (Swelling In Throat) 
  • खांसी आना  (Cough)
  • बोलने में कठिनाई  (Trouble In Speaking)
  • हार्टबर्न की समस्या महसूस होना  (Feeling Heart Burn)
  • गले में लाल सफेद धब्बे वाले घाव बनना   (Red White Patchy Sores)

घरेलू उपचार और बचाव  (Home Remedies)

  •  दिन में दो बार एक चम्मच कच्चा शहद (raw honey) का सेवन करे।
  •  गर्म पानी में एक चम्मच शहद और नींबू का रस मिलाकर पिएं।
  •  गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करें।
  •  भिगोई हुई मेथी का सेवन करे।
  •  पतला मुलायम खाना जैसे की खिचड़ी या सूप ही खाएं।
  •  मसालेदार खाने को नजरंदाज करें।
  •  इम्यून सिस्टम को शक्तिशाली बनाने के लिए गुड से बने काढ़े का सेवन करे।
  •  अदरक और नींबू वाली हर्बल टी का सेवन करें।
  • किसी दूसरे व्यक्ति का जूठा खाना ना खांए और ना ही अपना जूठा खाना किसी को खिलाएं।
  • जंक फूड से परहेज करे। 

थ्रोट अल्सर की समस्या होने पर इसे हल्के में न लें। इसमें की गई थोड़ी सी भी लापरवाही बड़ी बीमारी का कारण बन सकती है। इस लेख में दिए गए लक्षणों से आप इसकी पहचान कर सकते हैं और घरेलू उपचारों का सहारा ले सकते हैं।

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