कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे के बीच सोशल डिस्टेंसिंग है मजबूरी, रिश्ते भी हो रहे हैं प्रभावित

कोविड-19 के बढ़ते खतरे के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का फॉर्मूला है एक मजबूरी, कई रिश्ते भी हो रहे हैं प्रभावित। 

 
Vishal Singh
विविधWritten by: Vishal SinghPublished at: Mar 31, 2020
कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे के बीच सोशल डिस्टेंसिंग है मजबूरी, रिश्ते भी हो रहे हैं प्रभावित

दुनियाभर में कोरोना वायरस ने लोगों को आपस में ही दूर होने पर मजबूर कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग अपने परिवार के साथ भी नहीं रह पा रहें। लोग अपने आप में कोरोना वायरस के हल्के से लक्षण देखने के साथ ही अपने आपको क्वारंटीन में रखने पर मजबूर हैं। कोई अपने बच्चे से दूर है तो कोई अपने बूढ़े मां-बाप से दूर है। तेजी से कोरोना वायरस के फैलते प्रकोप की खबरें देख कर लोग अपने आपको और अपने परिवार को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। 

कोरोना वायरस की वजह से कई लोगों के रिश्तों में इसका प्रभाव पड़ रहा है। एक-दूसरे और अपने आपको सुरक्षित रखने के लिए लोग सोशल डिस्टेंसिंग का नुस्खा अपना रहे हैं। वजह सिर्फ एक है कोरोना वायरस, क्योंकि ये एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिसमें कई लोग जाने-अनजाने में अपने परिवार के सदस्यों को भी संक्रमित कर चुके हैं। 

covid-19

हालात ऐसे हैं कि हम एक दूसरे को छूने से डरने लगे हैं। इन सबके बीच इंसान हर कुछ भूल सकता है लेकिन अपने हाथ धोना या फिर खुद को सैनिटाइज करना नहीं भूलता। कई लोग ऐसे होंगे जो अपने पार्टनर या फिर अपने बच्चे के पास जाने से पहले नहाना सही समझता होगा। कई लोग ऐसे भी होंगे जो चाहकर भी अपने पार्टनर और अपने बच्चों के पास नहीं जा पा रहा। 

रिश्तों में पड़ रहा प्रभाव

रिश्तों में एक-दूसरे को छूना या स्पर्श करना एक तरह की भावना ही होती है। जिससे हम किसी को भी छूकर उसको अच्छी तरह समझ सकते हैं। चाहे वो बच्चे हो या फिर हमारा पार्टनर। कई रिलेशनशिप ऐसे भी होंगे जिनमें पार्टनर बिना अपने साथी से मिले या बिना उनके हाथ पकड़े अपने आपको अधूरा सा महसूस कर रहे होंगे। एक्सपर्ट्स भी ऐसा मानते हैं कि किसी अपने के हाथ से छूने पर शरीर में सकारात्मक हार्मोन्स पैदा होते हैं, जो आपको मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में आपकी मदद करते हैं। 

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असुरक्षित महसूस करना

रिश्तों में लोग अपनों को लेकर काफी चिंतित होते दिखाई दे रहे हैं। किसी के घर से अगर कोई बाहर जा रहा है तो लोग उन्हें लेकर परेशान रहते हैं कि कहीं वो इस घातक बीमारी की चपेट में न आ जाए। वहीं, अगर कोई सेल्फ क्वारंटाइन में हैं तो भी लोगों के मन में ये बात आने लगती है कि कहीं वो कोरोना वायरस के शिकार तो नहीं हो गए। इन सभी चीजों से हालात ऐसे पैदा हो रहे हैं जिसमें हर कोई किसी न किसी चीज को लेकर परेशान ही है। 

लगातार बढ़ रहा है तनाव

कोरोना वायरस या कोविड-19 ने ऐसी स्थिति को पैदा किया है जिसमें हम एक दूसरे से दूर होकर बात करने पर मजबूर हो गए हैं। हर कोई कोशिश कर रहा है कि वो किसी भी तरह स वायरस से अपनी दूरी बनाकर रखें। कई लोग इस वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण मानसिक रूप से अस्वस्थ होते दिख रहे हैं। दिन प्रतिदिन लोगों के मन में इसे लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है और डर पैदा हो रहा है। अपने आपको हर जगह असुरक्षित महसूस होना एक तरह का तनाव ही है। 

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ये सच है कि हम ऐसी स्थिति को मिनटों में सुधार नहीं सकते। लेकिन हम डट कर इस स्थिति का सामना जरूर कर सकते हैं। कई लोग मानसिक रूप से इस तरह स्वस्थ नहीं होते कि वो ऐसी स्थितियों का सामना कर सके। लेकिन उन्हें अपने आपको ऐसा बनाने की कोशिश करनी चाहिए। अगर आप अपने तनाव और असुरक्षा को लेकर परेशान हैं तो इसके लिए आप स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन कर अपने आपको सुरक्षित रख सकते हैं। इसके साथ ही अगर आप तनाव महसूस कर रहे हैं तो इसके लिए आपको रोजाना घर पर ही एक्सरसाइज या योगा का सहारा लेना चाहिए। 

 

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