क्या आपको भी सुनाई देती हैं तरह-तरह की आवाजें? कहीं आप इन मानसिक बीमारियों के शिकार तो नहीं?

अगर आपको भी अजीब-अजीब आवाजें सुनाई देती हैं, तो ये किसी मानसिक बीमारी का कारण हो सकता है। जानें इसके संभावित कारण।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatUpdated at: Apr 02, 2021 10:00 IST
क्या आपको भी सुनाई देती हैं तरह-तरह की आवाजें? कहीं आप इन मानसिक बीमारियों के शिकार तो नहीं?

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क्या आपको या आपके किसी जानने वालों को कुछ आवाजों से परेशानी होती हैं? अलग-अलग तरह की आवाजों से उन्हें चिढ़ होती हैं? असहज हो जाते हैं या गुस्सा आने लगता है? अगर ऐसा है तो हो सकता है कि आप किसी मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं। यह सिजोफ्रेनिया, मिसोफोनिया ऑब्सेसिव कंपल्सन डिसऑर्डर या बाइपोलर डिसऑर्डर हो सकता है। ये सभी मानसिक विकार हैं, जिनमें व्यक्ति को किसी खास तरह की आवाज से बेचैनी होती हैं। इन बीमारियों में अलग-अलग लोग अलग-अलग तरीके से रिएक्ट करते हैं। द हैप्पी ट्री के डायरेक्टर और मनोचिकित्सक डॉ. अनुनीत सभरवाल से जानें उन मानसिक बीमारियों के बारे में, जिनमें  व्यक्ति को तरह-तरह की आवाजें सुनाई देती हैं।

सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia)

schizophrenia disorder

सिजीफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है। इसमें रोगी को कुछ आवजों से बेचैनी होती है। इसमें कई बार मरीज को ऐसी आवाजें भी सुनाई देती हैं, जो वास्तविक नहीं होती है। यह बीमारी ज्यादातर बचपन या किशोरावस्था में होती है। इसके मरीजों को भ्रम और डरावनी चीजें दिखने की शिकायत होती हैं। मानसिक बीमारियों में सिजोफ्रेनिया को सबसे खतरनाक माना जाता है। इसके मरीज कई बार इलाज का विरोध भी करते हैं। इसके सभी मरीजों में एक जैसे लक्षण हो यह जरूरी नहीं है। इसमें मरीज समाज से कटकर रहने लगता है, अपनी भावनाओं को जाहिर नहीं कर पाते हैं। सिजोफ्रेनिया आनुवांशिक, पारिवारिक कारणों और तनावपूर्ण अनुभव से हो सकता है। 

मिसोफोनिया (Misophonia)

मिसोफोनिया के लक्षणों में खाना चबाने या चाय कॉफी सुड़ककर पीने, सीटी या किसी खास वाद्य यंत्र (Musical Instrument), घड़ी की सुई की आवाज, दरवाजे या किसी और खटखटाहट से असहज होना शामिल हैं। कुछ लोग इनमें से किसी एक या कई आवाज सुनकर झुंझला जाते हैं, अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाते और कई बार तो आक्रामक व्यवहार करने लगते हैं। इसे सेलेक्टिव साउंड सेंसिविटी डिसऑर्डर (Selective Sound Sensitive Disorder) भी कहते हैं। इसमें कई बार व्यक्ति डिप्रेशन में भी चला जाता है। कुछ मरीज आवाज की वजह से भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से भी डरने लगते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आनुवंशिक भी हो सकता है। माता-पिता को यह परेशानी हो तो कम या ज्यादा अनुपात में बच्चों में भी यह समस्या देखने को मिल सकती है। 

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ऑब्सेसिव कंपल्सन डिसऑर्डर (Obsessive Compulsion Disorder)

यह एक मानसिक डिसऑर्डर है, जिसमें रोगी को किसी एक या एक से अधिक चीजों की आवाज से घबराहट, बेचैनी हो सकती है। किसी मरीज को कीबोर्ड, पन्नों के फड़फड़ाने या सीटी की आवाज से घबराहट, बेचैनी या उलझन हो सकती है।  

बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder)

बाइपोलर डिसऑर्ड एक गंभीर मानसिक विकार है, जिसमें मरीज को किसी वास्तविक या आभासी आवाज से परेशानी हो सकती है। इसके मरीज कई बार अपनी कल्पना के आधार पर भी आवाज महसूस करने लगते हैं और बेचैन हो जाते हैं। 

शारीरिक रूप से भी हो सकते हैं प्रभावित (Can also be Physically Affected)

इन मानसिक बीमारियों का असर कभी-कभी शारीरिक रूप से भी हो सकता है। कुछ रोगी इन बीमारियों के कारण अपने प्रति लापरवाह रहने लगते हैं। ऐसे में वजन का ज्यादा बढ़ना या कम होना संभव है। बीपी, डायबिटीज या किसी अन्य बीमारी के मरीजों को ये समस्याएं हो तो उनकी सेहत पर भी इनका असर दिखता है। 

कैसे होती है इन बीमारियों की शुरुआत (How do these disease start)

कुछ लोगों में ये बीमारियां जन्मजात से भी हो सकती है। कभी-कभी किसी हादसे या जीवन परिस्थिति में आए बदलावों के बाद भी इस बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे नजर आने लगते हैं। लंबे समय से अकेले सुनसान जगहों पर रहने से भी ऐसी मानसिक बीमारियां होने लगती है। 

उपचार (Treatment)

किसी भी दूसरे मानसिक विकारों की तरह सही ट्रीटमेंट और सतर्कता बरतकर इन मानसिक समस्याओं का भी उपचार किया जा सकता है। 

साउंड थेरेपी (Therapy)

साउंड थेरेपी इन मानसिक बीमारियों के इलाज में बहुत कारगर रहती है। आवाज से जुड़े डर को निकालने के लिए साउंड थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें रोगी को आवाज के साथ सहज होने की ट्रेनिंग दी जाती है।

काउंसलिंग (Counseling)

Counseling in disorder

मनोचिकित्सक इन बीमारियों के इलाज के लिए काउंसलिंग की सलाह भी देते हैं। सही समय पर अगर काउंसलिंग हो, तो आवाज से जुड़े डर और असहजता खत्म हो जाती है। काउंसलिंग के कुछ सेशन के बाद आवाज से होने वाली बेचैनी धीरे-धीरे कम होने लगती है। 

रीट्रीटिंग थेरेपी (Retreating Therapy) 

आवाज से होने वाली परेशानी और डर को निकालने के लिए इस थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें रोगी को थेरेपी के जरिए आवाज की दुनिया से पहले परिचित कराया जाता है और फिर धीरे-धीरे ध्वनियों को लेकर रोगी सहज होने लगता है।

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मानसिक सहयोग (Mental Support)

मानसिक विकार में रोगी के ठीक होने के लिए उसके आसपास मौजूद लोगों का सहयोग बेहद जरूरी होता है। इसके रोगी हमेशा प्रोत्साहित करते रहें और यकीन दिलाएं कि सही उपचार से यह समस्या दूर हो सकती है। 

अगर समस्या गंभीर हो और रोगी का व्यवहार बेहद आक्रामक होने लगे तो डॉक्टर कुछ और उपायों और दवाइयों का भी सहारा लेते हैं। आवाज से होने वाली परेशानी से घबराने या इसे छुपाने की जरूरत नहीं है। अगर आप या आपका कोई अपना इससे जूझ रहा है, तो तुरंत मनोचिकित्सक की सलाह लें। मानसिक परेशानियां भी शारीरिक समस्याओं की तरह सही देखभाल से ठीक हो सकती है। इसमें भी अपनों के सहयोग और भरोसे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसके अलावा कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि महज डिप्रेशन या तनाव में रहने की वजह से भी किसी शख्स को खास तरह की आवाज परेशान कर सकती है।

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