कुपोषित बच्चों की संख्या भारत में सबसे ज्यादा : रिपोर्ट

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 13, 2017
Quick Bites

  • दक्षिण एशिया में कुपोषण में भारत सबसे आगे है।
  • हर साल 5 साल से कम 10 लाख बच्चों की मौत होती है।
  • कई संगठनों द्वारा किये गये अध्ययनों में यह पता चला।

बच्चे के समुचित विकास यानी शारीरिक और मानसिक विकास के पोषण की जरूरत होती है। बच्चे के जन्म के बाद उसका पहला आहार मां का दूध होता है। लेकिन अगर मां का खानपान सही नहीं है तो उसके दूध में बच्चे के विकास के लिए जरूरी पौष्टिकता नहीं मिलेगी। इसलिए प्रसव के बाद मां को स्वस्थ आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है। अगर बच्चे को सही आहार न मिले तो वह कुपोषण का शिकार हो सकता है।

यूं देखा जाये तो दुनियाभर में कई देश ऐसे हैं जो बहुत पिछड़े हुए हैं। भारत गरीब नहीं विकासशील देशों में शायद सबसे आगे की कतार में है। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत में कुपोषित बच्चों की संख्या दुनियाभर से कहीं अधिक है। इस लेख में जानते हैं भारत में कितने बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।

इसे भी पढ़ें, बच्‍चों को पर्यावरण हितैषी बनाने के फायदों के बारे में जानें

भारत में कुपोषण एसीएफ की रिपोर्ट

कुपोषण को लेकर हर साल कई सारे सर्वे किये जाते हैं और उनके परिणाम बहुत ही चिंताजनक होते हैं। भारत में हर साल 5 साल से कम उम्र के करीब 10 लाख बच्चे कुपोषण के कारण मर जाते हैं। इसलिए भारत दुनियाभर में इस मामले में सबसे आगे है।

राजस्थान के बारन और मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में किये गये एक शोध में यह बात सामने आई कि इन मौतों को रोका जा सकता है। इसके लिए जागरुकता के साथ-साथ बच्चों को सही पोषण की भी जरूरत है। भारत में इतनी खराब स्थिति है कि इसे मेडिकल इमर्जेंसी करार दिया जाना चाहिए।

इसे भी पढ़ें, इसलिए शिशु के लिए अमृत है मां का दूध

इस रिपोर्ट की मानें तो कुपोषण की संख्या भारत में दक्षिण एशिया के अन्य देशों से बहुत ज्याथदा है। यह रिपोर्ट भारत में जातिगत आधार पर निकाला गया है, जिसके अनुसार अनुसूचित जनजाति (28 फीसदी), अनुसूचित जाति (21 फीसदी), अन्य पिछड़ा वर्ग (20 फीसदी) और ग्रामीण समुदाय (21 फीसदी) में स्थित बदतर है।

एनएफएचएस के अनुसार

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे यानी एनएफएचएस की तीसरी रिपोर्ट के अनुसार, 40 प्रतिशत बच्चों का विकास ही नहीं हो पाता और 60 प्रतिशत बच्चों का वजन कम है।

डब्यूएचओ के अनुसार

संयुक्त राष्ट्र की मानें तो भारत में हर साल कुपोषण की वजह से मरने वाले 5 साल से कम उम्र वाले बच्चों की संख्या 10 लाख से भी अधिक है। दक्षिण एशिया में भारत कुपोषण के मामले में सबसे खराब हालत में है। इसमें राजस्थान और मप्र की स्थिति सबसे अधिक खराब है। संयुक्त राष्ट्र ने भारत में जो आंकड़े पाए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय स्तर से कई गुना ज्यादा हैं।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Parenting In Hindi


Loading...
Is it Helpful Article?YES1233 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK