प्रेगनेंसी के दौरान खुजली और पीलिया हो सकते हैं आईपीसी के लक्षण, जानें खतरे

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 05, 2018
Quick Bites

  • आईसीपी एक तरह का लिवर डिसआर्डर है, जो प्रेगनेंसी के दौरान होता है।
  • इसके के कारण गर्भवती के शरीर में खुजली की समस्या हो सकती है।
  • ये रोग कई बार गंभीर हो सकता है और जानलेवा हो सकता है।

प्रेगनेंसी एक कठिन समय है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस दौरान महिलाओं को कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से कई परेशानियां खतरनाक भी हो सकती हैं। प्रेगनेंसी के दौरान कई महिलाओं को इंट्राहेप्टिक कोलेस्टेसिस ऑफ प्रेगनेंसी या आईसीपी का सामना करना पड़ता है। आईसीपी के कारण बहुत सी महिलाओं को दूसरी या आखिरी तिमाही में खुजली की समस्या शुरू हो जाती है। आइए आपको बताते हैं क्या है आईसीपी और क्या हैं इसके लक्षण।

क्या है आईसीपी

आईसीपी यानी इंट्राहेप्टिक कोलेस्टेसिस ऑफ प्रेगनेंसी एक तरह का लिवर डिसआर्डर है, जो गर्भावस्था के दौरान हो जाता है। इसकी वजह से लिवर में बनने वाला बाइल जूस प्रभावित होता है। आपको बता दें कि बाइल जूस खाने को पचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महिला को आईसीपी की समस्या होने पर बाइल जूस का बनना कम हो जाता है और ब्लड में बाइल एसिड का निर्माण होने लगता है, जिससे खुजली की समस्या हो जाती है। आईसीपी के ही कारण कई महिलाओं को पीलिया का भी सामना करना पड़ता है। ये एक खतरनाक समस्या है, जो कई बार गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए खतरनाक हो सकती है।

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क्या हैं आईसीपी के लक्षण

  • पूरे शरीर में खुजली
  • गर्भावस्था के दौरान पीलिया होना
  • दिन भर थका हुआ महसूस करना
  • भूख न लगना
  • हल्के रंग का शौच होना
  • पेट के दाहिने हिस्से में दर्द होना

कब होता है आईसीपी का खतरा

कई महिलाओं में यह रोग गर्भावस्था के छठे सप्ताह से शुरू होता है। लेकिन ज्यादातर मामले में ये समस्या दूसरे और तीसरे तिमाही के दौरान शुरू होती है। इस दौरान पेशाब का रंग गहरा पीला हो जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पेट, हाथ और पैर के पंजों पर तेज खुजली होना उनके लिवर से संबंधित रोग – इंट्राहेप्टिक कोलेस्टासिस ऑफ प्रेग्नेंसी (आईसीपी) के लक्षण हो सकते हैं जिससे जच्चा-बच्चा की जान को खतरा है।

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क्या करें अगर शरीर में हो खुजली

खुजली होने वाली जगहों के आसपास मॉश्चाराइजर लगाकर रखें। खुजली होने पर ज्यादा तेजी से ना खुजलायें, बल्कि हाथों से सहला दें। डॉक्टर की सलाह से एंटी-इचिंग वाली क्रीम भी लगा सकती है। विटामिन ई युक्त क्रीम लगाकर भी त्वचा में नमी बनाई जा सकती है। त्वचा को शुष्क होने से बचाने के लिए आप गर्म पानी से स्नान कर सकती है। कमरे में ह्युमीडिफाइर लगा सकते है। सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क, आनुवंशिकता और ऐस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरौन हारमोन के बढ़ते स्तर पर निंयत्रण रखने की जरूरत है।  जितना हो सके तेज धूप के संपर्क से बचें। जब भी घर से बाहर निकलें एसपीएफ 30 वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं। पानी शरीर के भीतर के अवशोषकों को बाहर निकालने में काफी सहायक सिद्ध होता है। इसलिए त्वचा की साफ-सफाई हेतु नियमित 8 से 10 गिलास पानी रोज पिएं।

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