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बच्चे को नई चीजें सीखने- समझने में होती है कठिनाई? जानें लर्निंग डिसेबिलिटी के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

बच्चों में सीखने और समझने की लालसा ज्यादा होती है। अगर आपके बच्चे में इस तरह की लालसा नहीं है, तो इसका कारण लर्निंग डिसेबिलिटी हो सकता है।

 

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: May 05, 2022Updated at: May 05, 2022
बच्चे को नई चीजें सीखने- समझने में होती है कठिनाई? जानें लर्निंग डिसेबिलिटी के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

लर्निंग डिसेबिलिटी (Learning Disability) बच्चों में होने वाली एक ऐसी समस्या है, जिसमें उनके सीखने की क्षमता प्रभावित होती है। इस समस्या से ग्रसित बच्चों को पढ़ने, लिखने और समझने में काफी ज्यादा परेशानी होती है। इसलिए वह अन्य बच्चों की तुलना में कमजोर होते हैं। यह एक तरह का मेंटल डिअऑर्डर होता है, जो कई बच्चों में देखने को मिल सकता है। इसलिए अगर आपके बच्चों में भी इस तरह की परेशानी नजर आ रही है, तो इसे हल्के में न लें। हमारे देश में कई ऐसे पेरेंट्स हैं, जो पढ़ाई में कमजोर होने की समस्या को बीमारी नहीं समझते हैं। ऐसे में अगर आपके बच्चों में सीखने और समझने की क्षमता कम है, तो इसपर ध्यान दें। वहीं, किसी एक्सपर्ट से सलाह जरूर लेँ। इस विषय पर जानकारी के लिए हमने ग्वालियर स्थित विजयाराजे सिंधिया कॉलेज की मोनवैज्ञानिक प्रोफेसर डॉक्टर नीरा श्रीवास्तव से बातचीत की। आइए जानते हैं क्या कहती हैं एक्सपर्ट? 

क्या है लर्निंग डिसेबिलिटी? (What is Learning Disability)

डॉक्टर बताती हैं कि लर्निंग डिसेबिलिटी एक ऐसी परेशानी है, जो किसी व्यक्ति की सुनने, सोचने, बोलने, लिखने, समझने या फिर अंकों के जोड़ने की क्षमता को प्रभावित करती है। कुछ लोगों को इनमें से एक या एक अधिक से अधिक क्षमताओं में बाधा उत्पन्न हो सकती है। लर्निंग डिसेबिलिटी व्यक्ति की सामान्य सीखने की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करती है। 

नीरा श्रीवास्तव का कहना है कि इस समस्या से ग्रसित बच्चों या किसी व्यक्ति को शब्दों के उच्चारण को करने में काफी परेशानी होती है। उन्हें किसी भी चीज को सीखने में मन नहीं लगता है। ऐसे व्यक्ति या बच्चे सीखने में आलस करते हैं। साथ ही उससे किसी भी तरह भागने की कोशिश करते हैं।

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लर्निंग डिसेबिलिटी के कारण (Learning Disability Causes)

  • डॉक्टर नीरा का कहना है कि स्पेसिफिक लर्निंग डिसेबिलिटी (Specific Learning Disability) या लर्निंग डिसेबिलिटी एक तंत्रिका तंत्र से जुड़ी परेशानी है। इसके अलावा बच्चों में इस तरह की परेशानी होने के कई अन्य कारण हो सकते हैं। जैसे-
  • अनुवांशिक कारक - अगर किसी बच्चे के माता-पिता या फिर परिवार में किसी अन्य सदस्य को इस तरह की समस्या है, तो बच्चे को भी यह परेशानी हो सकती है।
  • नर्वस सिस्टम में किसी तरह की समस्या होने पर बच्चों में लर्निंग डिसेबिलिटी की परेशानी देखी जा सकती है। 
  • जन्म से पूर्व अगर बच्चा किसी तरह से प्रभावित हुआ है, तो उसमें यह परेशानी हो सकती है। जैसे- मां के द्वार अधिक दवाओं का सेवन, प्रेग्नेंसी में एल्कोहल का सेवन, गर्भावस्था में पोषक तत्वों की कमी, मां को कोई गंभीर बीमारी इत्यादि। 
  • जन्म के समय कुछ स्थितियों की वजह से भी बच्चो को लर्निंग डिसेबिलिटी हो सकती है। जैसे- जन्म के समय पर्याप्त रूप से ऑक्सीजन न मिल पाना, डिलीवरी के दौरान किसी औजार से बच्चे के मस्तिष्क में चोट लगना इत्यादि।
  • एक्सीडेंट से मस्तिष्क में चोट लगना। 
  • लैड पैंट जैसी चीजें बच्चे के शरीर में जाना इत्यादि।

लर्निंग डिसेबिलिटी के लक्षण (Learning Disability Symptoms)

लर्निंग डिसेबिलिटी के लक्षण उसके प्रकार पर निर्भर करते हैं। इसे तीन भागों में विभाजित किया गया है। डिस्लेक्सिया ( पढ़ने सम्बन्धी समस्या), डिसग्राफिआ (लिखने सम्बन्धी समस्या), डिस्कैलक्युलिआ (जोड़ने घटाने सम्बन्धी समस्या)। 

डिस्लेक्सिया (dyslexia) के लक्षण

  • इस तरह के बच्चे टीचर पर पूरी तरह से निर्भर रहते हैं। 
  • उनके याद करने की क्षमता काफी कमजोर होती है। 
  • इस स्थिति से ग्रसित बच्चे पढ़ना, लिखना बिल्कुल भी नहीं चाहते हैं। 
  • शब्दों का उच्चारण करने में काफी ज्यादा परेशानी आती है। 

डिसग्राफिआ (disgrafia) के लक्षण

  • डिसग्राफिआ से प्रभावित बच्चों की हैंड राइटिंग काफई खराब होती है। 
  • यह लिखते समय वाक्यों की संचरना काफी खराब करते हैं। 
  • इस तरह के बच्चे अक्षरों और शब्दों के बीच काफी ज्यादा स्पेस छोड़ देते हैं।

डिस्कैलक्युलिआ (dyscalculia) के लक्षण

  • बच्चे को गिनने में काफी परेशानी होती है।
  • वह बड़ा, छोटा, ज्यादा, कम कुछ भी समझ नहीं पाते हैं। 
  • संख्याओं को क्रम पलटने पर कंफ्यूज हो जाते हैं। 

लर्निंग डिसेबिलिटी का इलाज (Learning Disability Treatment)

लर्निंग डिसेबिलिटी ( Learning Disability) का कोई सटीक इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, माता-पिता के कुछ प्रयासों से बच्चों की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। 

  • बच्चों को प्यार से सिखाने की कोशिश करें। 
  • माता-पिता को टीचर से बच्चे की स्थिति के बारे में चर्चा करनी चाहिए, साथ ही उन्हें स्पेशल तरीके से सिखाने की सलाह देनी चाहिए।
  • बच्चों को सही निर्देशों का पालन करना सिखाने की कोशिश करें। कभी भी सिखाने के दौरान उन्हें डांटे नहीं, इससे वह सीखने की प्रक्रिया से और अधिक दूर भागेंगे। 
  • बच्चों को पढ़ाते समय कुछ मजेदार टेक्नीक को अपनाएं।

लर्निंग डिसेबिलिटी के बचाव (Learning Disability Prevention)

  • प्रेग्नेंसी में बिना वजह दवाओं का सेवन न करें। किसी भी दवा का सेवन करने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।
  • गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान और नशीली चीजों का सेवन करने से बचें। 
  • प्रेग्नेंसी में खानपान पर ध्यान दें, शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करें।
  • प्रेग्नेंसी में अत्यधिक शारीरिक गतिविधि को करने से बचें।  
  • डिलीवरी से पहले इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे को पर्याप्त रूप से ऑक्सीजन मिल सके। 
  • डिलीवरी के दौरान बच्चे को किसी भी तरह का चोट न लगने दें। डॉक्टर को भी इस बात का ध्यान रखने के लिए कहें। 

लर्निंग डिसेबिलिटी एक मानसिक समस्या है। यह समस्या बच्चों में अक्सर देखी जा सकती है। इसलिए अगर आपका बच्चा इस तरह की समस्या से जूझ रहे है, तो उसे नजरअंदाज न करें। बल्कि उनका साथ देकर उन्हें सही  और उचित तरीके से सीखने के लिए प्रोत्साहित करें।

 

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