एक्सरसाइज नहीं करने वाले लोगों को कोरोना का ज्यादा खतरा : स्टडी

रिसर्च में दावा किया गया है कि जो लोग रोजाना एक्सरसाइज नहीं करते, उनमें कोरोना से मौत का खतरा ज्यादा होता है। दूसरी लहर में व्यायाम जरूरी है।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Apr 26, 2021Updated at: Apr 26, 2021
एक्सरसाइज नहीं करने वाले लोगों को कोरोना का ज्यादा खतरा : स्टडी

व्यायाम करने से शरीर के कई रोग खत्म होते हैं। सिर्फ खत्म ही नहीं बल्कि कोई नया रोग अगर बन रहा है तो उसे भी बनने से पहले खत्म कर देते हैं। हाल ही में एक रिसर्च में दावा किया गया है कि शारीरिक व्यायाम की कमी कोविड-19 वायरस को बढ़ावा दे सकती है। स्टडी में बताया गया है कि जो लोग एक्सरसाइज नहीं करते हैं, उनमें कोविड-19 के परिणाम खतरनाक होते हैं। वे कोविड-19 के लिए ज्यादा प्रोन होते हैं। इससे उनकी मौत भी हो सकती है। ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन (British Journal of Sports Medicine) में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग कम एक्सरसाइज कर रहे हैं उनमें कोरोना से मौत की आशंका ज्यादा है। यह स्टडी लगभग 50 हजार कोरोना संक्रमित अमेरिकी लोगों के बीच जनवरी 2020 से अक्तूबर 2020 के बीच की गई। कोरोना की दूसरी लहर उनके के लिए मौत का सबब बन सकती है, अगर ने नियमित तौर पर व्यायाम नहीं करते हैं।

दूसरी लहर का असर

कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव ज्यादा आक्रामक है। जिन लोगों को वैक्सीन लगी, उनमें बेशक कोरोना से मौत का आंकड़ा कम हुआ हो पर जिनको अभी तक वैक्सीन नहीं लगी है, उनमें कोरोना का खतरा ज्यादा है। तो वहीं, जिन लोगों को टीका लग भी चुका है, उनमें फिर से कोरोना हो रहा है, ऐसे में कोरोना से बचने के सभी एहतियात अपनाने होंगे। दूसरी लहर से बचने के लिए नियमित तौर पर एक्सरसाइज करना जरूरी है। अमेरिकी संस्था Centers for Disease Control and Prevention (CDC) ने कोविड-19 के लिए कई जोखिमों को आइडेंटिफाइड किया है। जिनमें बढ़ती उम्र, डायबिटिज, मोटापा और हृदय रोग शामिल हैं। संस्था ने दावा किया है कि अगर आप एक्सरसाइज नहीं करते हैं तो आपको कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जिनमें से कोविड-19 भी एक गंभीर संक्रामक रोग शामिल है।

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रिपोर्ट का दावा

रिसर्च में 48 440 लोगों को शामिल किया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन लोगों ने दो साल पहले कोई शारीरिक एक्सरसाइज नहीं की उन्हें कोरोना की दूसरी लहर में अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ गई। इन मरीजों में मोटापा और उच्च रक्तचाप जैसे लक्षण दिखाई दिए। इस रिसर्च में 47 वर्ष के युवाओं को शामिल किया गया था। जिसमें 61.9 फीसद महिलाएं शामिल थीं। इनमें से 6.4 फीसद लगातार व्यायाम कर रहे थे। 14.4 लगातार कोई शारीरिक व्यायाम नहीं कर रहे थे। बचे हुए बाकी लोग किसी तरह की कोई एक्टिविटी कर रहे थे। स्टडी में शामिल 51.4 फीसद में कोई कोमोर्बिडिटिज (comorbidities ) नहीं थी। जबकि 17.4 में एक थी। 31.3 फीसद में दो और दो से ज्यादा कोमोर्बिडिटिज थीं। इनमें जिन लोगों ने शारीरिक व्यायाम किया उनमें केवल कोरोना का खतरा ही कम नहीं हुआ बल्कि मोटापा, डायबिटिज आदि परेशानियां कम हुईं।

कोविड मरीजों में व्यायाम की कमी ने पहुंचाया अस्पताल

सभी कोविड मरीजों में से जिन लोगों ने शारीरिक व्यायाम नहीं किया था उनमें से 8.6 फीसद को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। 2.4 फीसद आइसीयू में भर्ती किए गए और 1.6 फीसद की मौत हो गई। जिन लोगों ने लगातार व्यायाम किया उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत नहीं आई।

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रिसर्च के परिणाम

रिसर्च के निष्कर्ष में कहा गया है कि एक्सरसाइज करने से इम्युन सिस्टम मजबूत होता है। साथ ही इन लोगों में वायरल इन्फेक्शन के खतरे भी कम देखे गए। नियमित व्यायाम सिस्टमिक इन्फ्लेशन (systemic inflammation) को कम करता है। यह सिस्टमिक इनफ्लेशन फेफड़ों को अधिक खराब करता है। जो कोविड के लिए अधिक सहायक बन जाता है। एक्सरसाइज करने से हृदय रोग भी नहीं होते हैं। तो वहीं शारीरिक व्यायाम करने से फेफड़ों की मजबूती, मानसिक स्वास्थ्य की बेहतरी और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इन रोगों में कमी से कोविड-19 का खतरा कम हो जाता है। स्वस्थ रहने के लिए 150 मिनट की वॉक जरूरी है। अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि जिन लोगों ने कोई शारीरिक व्यायाम नहीं किया उनमें मौत का खतरा 2.5 गुना ज्यादा रहता है।

दुनियाभर में टीकाकरण की कमी है। तो वहीं, लोगों का मास्क न पहनना या सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर पाने की वजह से भी कोरोना का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में खुद को सुरक्षित रखने का एक ही तरीका है कि नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम घर पर ही किया जाए। शारीरिक व्यायाम से केवल कोरोना ही नहीं बल्कि कैंसर, हृदय रोग और मोटापा जैसी परेशानियां भी दूर रहती हैं। 

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