सीटी स्कैन (CT Scan) का रेडिएशन बना सकता है आपको कैंसर का शिकार, वैज्ञानिकों ने अध्ययन के बाद किया दावा

सीटी स्कैन (CT Scan) कराने वाले मरीज हो सकते हैं कुछ विशेष प्रकार के कैंसर का शिकार- ये दावा 13 साल तक चले एक अध्ययन के बाद ताईवान के वैज्ञानिकों ने किया है। 45 साल से कम उम्र के लोगों को बताया गया ज्यादा खतरा।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Nov 20, 2019
सीटी स्कैन (CT Scan) का रेडिएशन बना सकता है आपको कैंसर का शिकार, वैज्ञानिकों ने अध्ययन के बाद किया दावा

सीटी स्कैन (CT Scan) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कंप्यूटर और एक्स-रे मशीन की मदद से शरीर की क्रॉस सेक्शनल इमेज बनाई जाती है। ये जांच शरीर के भीतर पलने वाले रोग या समस्या के बारे में सामान्य एक्स-रे से कहीं ज्यादा जानकारियां देती है। सीटी स्कैन का प्रयोग आजकल बहुत सामान्य हो गया है। छोटे शहरों और गांवों में भी आजकल इसकी सुविधा उपलब्ध है। मगर एक नए अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। हाल मं प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक सीटी स्कैन दौरान प्रयोग किया जाने वाला रेडिएशन कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है। अध्ययन में बताया गया है कि सीटी स्कैन के कारण विशेष रूप से थायरॉइड कैंसर और ब्लड कैंसर (ल्यूकीमिया) का खतरा अधिक बढ़ जाता है।

13 साल तक किया गया रिसर्च, रिजल्ट देखकर हुई हैरानी

ये अध्ययन National Health Insurance के डाटा के आधार पर 2000 से 2013 के बीच किया गया है। शोधकर्ताओं ने मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट्स, रोगों की जांच, जांच के तरीके और दी गई दवाओं आदि का डाटा लिया और उसके आधार पर अध्ययन की प्रक्रिया पूरी की। अध्ययन में 22,853 मरीज थायरॉइड कैंसर के, 13,040 मरीज ब्लड कैंसर (ल्यूकीमिया) के और 20,157 मरीज लिम्फोमा कैंसर के पाए गए। इस अध्ययन को JNCI Cancer Spectrum नामक जर्नल में छापा गया है।

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45 से कम उम्र के लोगों को ज्यादा खतरा

शोधकर्ताओं ने बताया कि सीटी स्कैन के कारण लोगों में थायरॉइड कैंसर और ल्यूकीमिया का खतरा काफी हद तक बढ़ गया। खास बात ये रही कि इसका खतरा महिलाओं में ज्यादा पाया गया। इसके साथ ही 45 साल से कम उम्र के लोगों में भी इन रोगों के पनपने का खतरा सामान्य से ज्यादा पाया गया।

थायरॉइड कैंसर और ल्यूकीमिया का खतरा सबसे ज्यादा

अध्ययन को ज्यादा पारदर्शी रखने के लिए शोधकर्ताओं ने कुछ अन्य बातों का भी ख्याल रखा, जैसे- इस अध्ययन के दायरे में ऐसे लोगों को नहीं रखा गया जिन्हें 25 साल या इससे कम उम्र में कैंसर हुआ था, जो कैंसर का पता चलने के 3 साल पहले से दवाओं-इलाज में लगे हुए थे या जिन्हें सन् 2000 से पहले ही कैंसर होने की पुष्टि हो चुकी थी। इस तरह वैज्ञानिकों ने जो भी आंकड़े लिए वो ऐसे मरीजों के थे, जिन्हें न तो पहले से कैंसर था और न ही इसके होने की संभावना थी। अध्ययन के रिजल्ट के अनुसार ऐसे लोगों को ही थायरॉइड कैंसर और ल्यूकीमिया की समस्या हुई, जिनके सीटी स्कैन किए गए थे।

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क्या कहते हैं शोधकर्ता?

Taipei Medical University के वैज्ञानिक और रिसर्च पेपर के लेखक Yu-Hsuan Joni Shao ने कहा, "हमें अध्ययन में इस बात का पता चला है कि सीटी स्कैन के कारण सभी उम्र के लोगों में थायरॉइड कैंसर और ब्लड कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसका खतरा उन लोगों में ज्यादा पाया गया जिन्होंने कई-कई बार सीटी स्कैन टेस्ट कराया था। आज सीटी स्कैन का इस्तेमाल बहुत ज्यादा हो गया है इसलिए ये एक पब्लिक हेल्थ ईश्यू बन सकता है।"

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