पेशाब के साथ पस आने के क्या हो सकते हैं कारण? यूरोलॉजिस्ट से जानें इसके लक्षण, खतरे और इलाज

यूरिनल इंफेक्शन की वजह से यूरिन में पस सेल्स की शिकायत हो सकती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं इस बार में विस्तार से

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraUpdated at: Apr 07, 2021 15:55 IST
पेशाब के साथ पस आने के क्या हो सकते हैं कारण? यूरोलॉजिस्ट से जानें इसके लक्षण, खतरे और इलाज

यूरिन में पस आना मृत व्हाइट ब्लड सेल्स से जुड़ी एक संक्रामक बीमारी है। इस समस्या से ग्रसित मरीजों के मूत्र मार्ग से असामान्य रूप से मवाद निकलता है। मवाद सफेद मृत कोशिकाओं और प्रोटीन युक्त पीले रंग का द्रव होता है, जिसे ल्यूकोसाइट्स भी कहा जाता है। मवाद अक्सर ऐसे स्थान पर जमता है, जहां पर किसी कारण से सूजन हुई हो। पटपड़गंज स्थित मैेक्स हॉस्पिटल और किडनी केयर क्लिनिक के यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर मयंक गुप्ता का कहना है कि किडनी और गाल ब्लैडर में इंफेक्शन की वजह से यूरिन में पस आने लगता है। डॉक्टर का कहना है कि यूरिन में पस सेल्स का मौजूद होना यूरिन में इंफेक्शन की ओर इशारा करता है। पेशाब में पस आने पर आमतौर पर पेशाब के रंग में बदलाव, पेशाब से अधिक गंध आना और चिपचिपाहट जैसे लक्षण दिखते हैं। डॉक्टर मयंक का कहना है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को यूरिन में पस आने की समस्या अधिक होती है। उन्हे यूरीनल इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है।  इसके अलावा इसके कई अन्य कारण और लक्षण हैं। चलिए विस्तार से जानते हैं इस बारे में -

यूरिन में पस आने के कारण (Causes of Pus Cells in urine)

  • इडियोपैथिक (जिसका कारण पता नहीं होता है)
  • महिलाओं में अधिक होने की संभावना होती है।
  • किडनी और गालब्लैडर में 
  • किसी तरह के ट्यूमर का होना
  • पेट अधिक खराब होने से भी यूरिन में पस आ सकता है।
  • मल्टीपल सेक्स पार्टनर होना।

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यूटीआई को लेकर है महिलाओं में मिथ 

डॉक्टर मयंक का कहना है कि यूरिन में पस आना एक संक्रामक बीमारी है। लेकिन कई महिलाओं में यह मिथ है कि पब्लिश टायलेट का इस्तेमाल करने से यूरीनल इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ती है। बल्कि ऐसा कुछ भी नहीं होता है। पब्लिक टायलेट के इस्तेमाल से यूरीनल इंफेक्शन होने का खतरा नहीं होता। भले ही आसपास यूरिन की छींटे क्यों न मौजूद हों, इससे महिला या फिर किसी भी व्यक्ति को कोई असर नहीं होता है। हालांकि, हमें हाइजीन का ख्याल रखना जरूरी है।

यूरिन में पस आने के लक्षण (Symptoms of Pus Cells in urine)

  • बार-बार पेशान आना
  • पेशाब का ब्लॉक होना।
  • पेशाब से ब्लड आना
  • पेशाब के रंग में बदलाव होना।
  • पेशाब से गंध आना
  • महिलाओं के पेल्विक में दर्द होना।
  • उल्टी या मतली महसूस होना।
  • झागदार पेशाब होना।
  • पेट में दर्द होना।
  • जननांगों से डिस्चार्ज होना।
  • ठंड लगकर बुखार आना।
  • पेशाब जल्दी-जल्दी आना।
  • पेशाब करने में जलन और दर्द होना। 

पेशाब में पस आने के जोखिम (Risk factors of Pus Cells in Urin)

  • बुजुर्ग लोग यूटीआई के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
  • पुरुषों की तुलना में महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन होने का खतरा अधिक रहता है।
  • गुर्दे की पथरी से ग्रसित लोगों को यूरिन में पस की परेशानी का खतरा रहता है।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान मूत्र में व्हाइट ब्लड सेल्स बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है।
  • कमजोर इम्यून वाले लोगों को भी इसका खतरा रहता है।

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पेशाब में पस आने का निदान (Pus Cells in Urine Diagnosis) 

यूरिन में पस सेल्स का निदान करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपकी मेडिकल हिस्ट्री जानने की कोशिश करेंगे। उसमें वह आपसे कुछ सवाल कर सकते हैं। जैसे- क्या आपको पथरी की समस्या है? क्या आपकी किडनी में किसी तरह की परेशानी? इत्यादि सवालों के आधार पर डॉक्टर पता लगाने की कोशिश करते हैं कि आपके यूरिन में पस सेल्स हैं या नहीं। इसके अलावा आपके लक्षणों से भी इसका निदान करने की कोशिश की जाती है। उचित और सही रिजल्ट प्राप्त करने के लिए डॉक्टर आपको यूरिन टेस्ट  के लिए कह सकते हैं।

यूरिन में पस आने का इलाज (Treatment of pus cells in Urine) 

यूरिन में पस की समस्या होने के कारणों के आधार पर डॉक्टर इसका इलाज करते हैं। जैसे अगर आपको किसी तरह की समस्या के कारण यह हुआ है, तो उसकी दवाईयों को पूरा करने के लिए कह सकते हैं।  

वहीं, यूटीआई के इलाज के लिए यूरिन टेस्ट किया जाता है। इसके बाद आपको एंटीबायोटिक दवाइयां दी जाती है। यूरिन में फंगल इंफेक्शन को रोकने के लिए एंटीफंगल दवाइयां भी लेने की सलाह दी जा सकती है।

यूरिनल में पस आने के बचाव (Prevention of Pus Cells in Urine) 

डॉक्टर मयंक बताते हैं कि यूटीआई के खतरे से बचने के लिए हमें निम्न बचाव अपनाने की आवश्यकता है। - 

  • अधिक समय तक पेशाब को न रोकें। लंबे समय तक पेशाब को रोकने से इंफेक्शन को बढ़ावा मिलता है। साथ ही इससे बैक्टीरिया का विकास होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • खुशबूदार सैनिटरी पैड का इस्तेमाल न करें। इससे यीस्ट और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।
  • अधिक से अधिक पानी पिएं। तरल पदार्थ के अधिक सेवन से बैक्टीरिया मूत्र मार्ग से बाहर निकल सकता है।
  • पर्सनल हाइजीन मेंटेन करें।
  • कैथेटर रिप्लेसमेंट का प्रयोग करें।
  • सैनिटरी पैड समय-समय पर बदलते रहें।

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  • प्रोबायोटिक्स आहार का सेवन करें।
  • स्टोन है, तो उसका इलाज समय पर कराएं।
  • लिक्विड चीजों का सेवन अधिक से अधिक करें।
  • सेक्स से पहले और सेक्स के बाद पेशाब जरूर करें
  • सेफ सेक्स करें। इससे यूटीआई के खतरे से बचा जा सकता है।
  • मल्टीपल पार्टनर न रखें। इससे यूरीनल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। 

यूरिन में किसी तरह की परेशानी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ताकि आप आगे होने वाले खतरे से बच सकेंगे। पेशाब में जलन या फिर पेट में किसी तरह की परेशानी होने पर घरेलू इलाज अपनाने के साथ-साथ डॉक्टर से संपर्क करना न भूलें।

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