आंखों में महसूस हो रहे दबाव का कारण हो सकता है ग्लूकोमा (मोतियाबिंद), जानें कैसे करता है ये आंखों को प्रभावित

अगर आपको भी आंखों में दबाव महसूस हो रहा है या धुंधला दिखने लगा है, तो ये मोतियाबिंद का संकेत हो सकता है। जानें इस बीमारी का आंखों पर प्रभाव।

Monika Agarwal
अन्य़ बीमारियांWritten by: Monika AgarwalPublished at: May 02, 2021Updated at: May 02, 2021
आंखों में महसूस हो रहे दबाव का कारण हो सकता है ग्लूकोमा (मोतियाबिंद), जानें कैसे करता है ये आंखों को प्रभावित

क्या आपको भी आंखों में दबाव महसूस होता है? आंखों में दबाव के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से एक ग्लूकोमा भी है। ग्लूकोमा को हिंदी में मोतियाबिंद कहते हैं और ये बड़ी उम्र के लोगों में एक आम समस्या है। मोतियाबिंद( ग्लूकोमा) के बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे कि ऑप्टिक नर्व डैमेज और दृष्टि हीनता। यानी ग्लूकोमा (Glaucoma) में आपकी दृष्टि कम हो सकती है या बिल्कुल खत्म भी हो सकती है। अगर इसे ट्रीट न किया जाए तो यह समय के साथ साथ और भी खराब हो सकती है। इस स्थिति में आपको आंख में एक दबाव बनने लगता है जो समय के साथ बढ़ता जाता है। इस दबाव या प्रेशर को इंट्राओक्युलर प्रेशर कहा जाता है।

ग्लूकोमा आपकी ऑप्टिक नर्व को नष्ट भी कर सकता है। यह नस आपके मस्तिष्क को तस्वीरें भेजती है। अगर इसकी स्थिति खराब होती गई तो कुछ ही सालों में आपको बिलकुल दिखना बंद भी हो सकता है। वैसे तो लोगों को ग्लूकोमा (Glaucoma) का कोई लक्षण देखने को नहीं मिलता है। इसलिए आपको नियमित रूप से अपने डॉक्टर से अपनी आंखें चेक करवाते रहना चाहिए ताकि आप लंबे समय की इस बीमारी से न जूझ पाएं। अगर एक बार आपकी दृष्टि चली जाती है तो उसे दोबारा नहीं लाया जा सकता है। लेकिन आपको जितना दिख रहा है उसको नियंत्रित करने के लिए आप आई प्रेशर को कम कर सकते हैं।

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मोतियाबिंद( ग्लूकोमा) का कारण (Causes of Glaucoma)

आपकी आंख के अंदर का फ्लूइड (तरल) आपकी आंख से बाहर एक जाली के जरिए आता है। अगर यह जाली जैसा चैनल ब्लॉक हो जाता है या आपकी आंख से बहुत ज्यादा फ्लूइड (तरल) निकलता है तो परेशानी होती है। कई बार डॉक्टर इस ब्लॉकेज का कारण पता नही कर पाते हैं। लेकिन इसका कारण जेनेटिक भी हो सकता है अर्थात अगर यह आपके माता पिता को है तो आपको भी हो सकता है। इसके कुछ कारणों में आंख में केमिकल चले जाना, आंख के अंदर रक्त कोशिकाओं का अवरुद्ध होना या कुछ सूजन जैसी स्थिति होती हैं। यह बहुत कम देखने को मिलती हैं।

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ग्लूकोमा का खतरा बढ़ाने वाले कारक (Risk Factors of Glaucoma)

यह ज्यादातर 40 साल से अधिक लोगों को होता है लेकिन कई बार यह शिशुओं, बच्चों और बड़ों सभी आयु वर्गों में भी देखने को मिलता है। इसके निम्न जोखिम हो सकते हैं-

  • अगर आप 40 वर्ष से ऊपर हैं।
  • ग्लूकोमा (Glaucoma) आपके किसी अन्य परिवार के सदस्य को भी है।
  • कम दिखता हो।
  • जब आपको डायबिटीज हो।
  • जब आप किसी प्रकार के स्टेरॉयड ले रहे हों।
  • आपको कभी आंखों में चोट लगी हो।
  • अगर आपकी आंखों पर अधिक दबाव हो।

मोतियाबिंद( ग्लूकोमा) के प्रकार (Types of Glaucoma)

ओपन एंगल मोतियाबिंद

यह सबसे मुख्य प्रकार है और आपके डॉक्टर इसे वाइड एंगल ग्लूकोमा (wide Angle Glaucoma) भी कह सकते हैं। इसमें आपकी आंख का सूखापन तो सही लगता है लेकिन इसमें तरल उस तरह नहीं बहता है जिस प्रकार वह होना चाहिए।

एंगल क्लोजर मोतियाबिंद

इस प्रकार का ग्लूकोमा (Glaucoma) एशिया में अधिक आम है और इसे एक्यूट या क्रोनिक एंगल मोतियाबिंद (Chronicle Angle Glaucoma) भी कहा जाता है। इसमें आंख का सूखापन ठीक नहीं होता क्योंकि आइरिस और कॉर्निया के बीच का भाग अधिक संकीर्ण हो जाता है। जिसके कारण आंखों में अचानक से दबाव बनने लगता है।

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सेकेंडरी मोतियाबिंद

यह तब होता है जब किसी अन्य कारणों जैसे डायबिटीज या कैटरैक्ट के द्वारा भी आपकी आंख में दबाव हो जाता है।

नॉर्मल टेंशन मोतियाबिंद

यह तब होता है जब आपको अपनी दृष्टि में अंधापन हो जाता है। इसमें आपकी ऑप्टिक नर्व डेमेज हो जाती है। कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि यह ओपन आई ग्लूकोमा (Open Eye Glaucoma) ही है।

पिगमेंट्री

इस प्रकार में आपकी आइरिस के छोटे छोटे तत्त्व आपकी आंख के तरल के अंदर चले जाते हैं और निकासी को ब्लॉक कर देते हैं।

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मोतियाबिंद( ग्लूकोमा) आई प्रेशर से कहीं बड़ी समस्या है

एक शोध के मुताबिक जो केमिकल नर्व सेल की सुरक्षा करता है, वह ग्लूकोमा (Glaucoma) को भी धीमा करता है और यह अंधेपन का एक मुख्य कारण माना गया है। मोतियाबिंद के मरीजों में फ्लूइड (तरल) प्रेशर बन सकता है जोकि आंखों की कोशिकाओं से जुड़ने वाली दिमाग की कोशिकाओं में भी हो सकता है। पहले के कुछ शोधों के मुताबिक अगर आपका आंखों का प्रेशर नियमित भी हो जाता है तो भी आपकी स्थिति बदतर ही होती जाती है। प्रेशर बनने और धुंधली दृष्टि के बीच का संबंध ज्यादा नहीं समझा गया है। सिटीकोलाइन नामक यौगिक हमारी आंखों और दिमाग के बीच के ऑप्टिक नर्व सिग्नल को रिस्टोर करता है। हालांकि जिन ग्लूकोमा (Glaucoma) के मरीजों को आई प्रेशर है उन्हें नर्व डेमेज का खतरा बहुत अधिक रहता है।

अगर आप समय रहते ही ग्लूकोमा (Glaucoma) का पता लगा लेते हैं तो आपके डॉक्टर आपको आई ड्रॉप या कुछ दवाइयां देकर भी ठीक कर सकते हैं तो कई बार आपके डॉक्टर आपको सर्जरी करवाने के लिए भी बोल सकते हैं। अगर आप नहीं चाहते कि आपको कोई इस प्रकार की आंखों की समस्या हो तो अपनी आंखों का नियमित रूप से चेकअप जरूर करवाएं।

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