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नस्य थेरेपी क्या है? आयुर्वेद एक्सपर्ट से जानें इसके फायदे और घर पर करने का तरीका

Nasya Therapy Benefits: नस्य थेरेपी स्वास्थ्य के लिए कई तरह से फायदेमंद है, जानें नस्य थेरेपी के फायदे और घर पर करने के आसान तरीका।

 
Vineet Kumar
Written by: Vineet KumarPublished at: May 12, 2022Updated at: May 12, 2022
नस्य थेरेपी क्या है? आयुर्वेद एक्सपर्ट से जानें इसके फायदे और घर पर करने का तरीका

नस्य आयुर्वेद की पांच शुद्धिकरण प्रक्रियाओं यानी पंचकर्म में से एक है। इसमें इसमें नाक के नथुनों के माध्यम से दवाएं डाली जाती हैं। यह प्रक्रिया कई रोगों के इलाज में मदद करती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से सिर और उससे संबंधित संरचनाओं के रोगों में किया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सक और आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर डॉ. भुवनेश्वरी की मानें तो आयुर्वेद में इस थेरेपी का उपयोग सिरदर्द से लेकर बांझपन तक विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार “नासा ही शिरसो द्वारं” यानी हमारी नाक ही हमारे मस्तिष्क तक पहुंचने का रास्ता है। नस्य थेरेपी एक आयुर्वेदिक इलाज है, इसे नस्य क कर्म के नाम से भी जाना जाता है। इस चिकित्सा में कई आयुर्वेदिक औषधियों को नाक के द्वारा आपके शरीर में पहुंचाया जाता है। इसके लिए देसी घी, क्वाथ और कई अन्य तेलों का भी इस्तेमाल किया जाता है। जो कई रोगों के उपचार में मदद करता है। इस लेख में हम जानेंगे नस्य थेरेपी के फायदे और घर पर करने का आसान तरीका।

नस्य थेरेपी के फायदे (Nasya Therapy Benefits In Hindi)

डॉ. भुवनेश्वरी के अनुसार नस्य चिकित्सा में नाक के माध्यम से दवाएं प्रशासित होती हैं, यह स्थानीय और साथ ही व्यवस्थित रूप से कार्य करती हैं। नाक के माध्यम से दी जाने वाली दवाएं नस्य श्रृंगतक मर्म तक पहुंचती है, मस्तिष्क में फैलती है और रोग पैदा करने के लिए जिम्मेदार रुग्ण दोष को समाप्त करती है। जिससे शरीर के कई रोगों को दूर करने में मदद मिलती है। यह साइनसाइटिस, सिरदर्द, अनिद्रा या नींद से संबंधित मुद्दों, माइग्रेन और बांझपन के रोगियों के उपचार में बहुत कारगर है। मालिश, भाप और तेल की बूंदों से नस्य की पूरी प्रक्रिया नाक के मार्ग को शांत करती है और जमा बलगम को साफ करती है। साथ ही आवाज में सुधार करती है और मस्तिष्क में केंद्रों को उत्तेजित करती है, संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार करती है क्योंकि हमारा मस्तिष्क, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र इसका मुख्य नियंत्रक है।

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घर पर नस्य कैसे करें (How To Do Nasya At Home In Hindi)

  • नस्य करने के लिए आपको सबसे पहले पीठ के बल आराम से लेट जाएं।
  • अब अपने सिर को नीचे की ओर झुकाते हुए अपने नथूनों को ऊपर की ओर रखें।
  • अगर आप नस्य को बिस्तर पर लेटकर कर रहे हैं, तो आप अपने सिर को बिस्तर से नीचे की लटकाकर भी रख सकते हैं।
  • सपोर्ट के लिए आप गर्दन के नीचे तकिया भी रख सकते हैं।
  • अब अपने नाक के प्रत्येक नथुने में नस्य तेल की बूंदे डालें, आप तेल की 2-3 बूंद डाल सकते हैं।
  • आपको नाक में तेल डालते समय बहुत सावधानी रखनी है। बूंद-बूंद करके नाक में तेल डालें। नाक के नथुनों को अंदर से अच्छी तरह कोट करें।
  • इसके बाद एक लंबी सांस लें और कुछ मिनटों के लिए रिलैक्स करें। जिससे नस्य नाक के जरिए अच्छी पर अंदर प्रवेश कर जाए।

अगर आपके लिए नस्य थेरेपी को लेटकर करना असुविधाजन है तो आप इन स्टेप्स के जरिए चिकित्सा का लाभ ले सकते हैं

  • अपनी छोटी वाली उंगली पर नस्य तेल की बूंद डालें और उंगली की मदद से उसे नाक में डालने की कोशिश करें।
  • लेकिन इस दौरान बहुत अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है, जिससे कि कोई नुकसान न हो।
  • उंगली की मदद से नाक के अंदर के हिस्से की अच्छी तरह मालिश करें।
  • उसके बाद एक लंबी सांस लें और रिलैक्स करें।

नस्य क्रिया कब करने से बचना चाहिए (When To Avoid Nasya Therapy In Hindi)

डॉ. भुवनेश्वरी के अनुसार अगर कोई रोगी थका हुआ, चिंतित, बेहोश, भूखा, प्यासा, बहुत बूढ़ा या बहुत छोटा तो नस्य क्रिया को करने से बचना चाहिए। साथ ही अगर महिला की डिलीवरी हुई तो उन्हें नस्य नहीं करना चाहिए। बहुत तेज बुखार है या सांस लेने में दिक्कत की समस्या है तो इससे बचें। इसके अलावा नहाने के तुरंत बाद या नहाने से ठीक पहले नस्य क्रिया नहीं करनी चाहिए। साथ ही खाना खाने या पानी पीने के बाद इस क्रिया को करने से बचें।

नोट: नस्य क्रिया करते समय प्रत्येक नाक के नथूने में 2-3 बूंद से ज्यादा नस्य न डालें। इसके अलावा नस्य क्रिया को करने से पहले भाप लेना और नाक की मालिश करना अनिवार्य है।

Inside Image Source: Shutterstock

(With Inputs: Dr. Bhuvneshwari - Govt. Ayurvedic medical officer, Punjab)

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