हाईवे के पास रह रहे लोगों में लगातार बढ़ रहा है 'मल्टीपल स्केलेरोसिस' का खतरा, शोध में हुआ खुलासा

मल्टीपल स्क्लेरोसिस यानी एमएस केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली यानी ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड की बीमारी है, जिसका समय पर उपचार न कराने से ये गंभीर हो जाता है। 

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariUpdated at: Jan 28, 2020 09:23 IST
हाईवे के पास रह रहे लोगों में लगातार बढ़ रहा है 'मल्टीपल स्केलेरोसिस' का खतरा, शोध में हुआ खुलासा

हाईवे रोडया राजमार्गों के पास रह रहे लोगों में पार्किंसंस रोग या अल्जाइमर की शिकायत हो सकती है। दरअसल ये हम नहीं, हाल ही में आए एक शोध के आंकड़े बता रहे हैं। इस शोध की मानें, तो जिन लोगों का घर हाईवे रोड के पास है उनमें मल्टीपल स्केलेरोसिस (एमएस) की अधिक संभावनाएं हैं। एक पर्यावरणीय स्वास्थ्य पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों के लिए में ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मेट्रो वैंकूवर में 678,000 वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया है। उन्होंने पाया कि एक प्रमुख सड़क से 50 मीटर या राजमार्ग से 150 मीटर से कम दूरी पर रहने से तंत्रिका संबंधी विकारों के विकास के एक उच्च जोखिम के साथ जुड़ा हुआ है। वहीं इसके कारण वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों का भी जोखिम लगातार बढ़ रहा है।

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क्या कहता है शोध 

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के अध्ययन लेखक वीरन युची ने इस पर शोध किया है। उनकी मानें, तो पहली बार हमने वायु प्रदूषण और यातायात निकटता के बीच एक लिंक की पुष्टि की है, जो डिमेंशिया, पार्किंसंस, अल्जाइमर और जनसंख्या स्तर पर एमएस के उच्च जोखिम बढ़ा रहा है। इस तरह के न्यूरोलॉजिकल विकार, विकारों की एक लंबी सीमा का वर्णन करते हैं। ये दुनिया भर में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक के रूप में तेजी से पहचाना जाता है।

क्या है मल्टीपल स्केलेरोसिस (Multiple Sclerosis)?

मल्टीपल स्केलेरोसिस यानी एमएस केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली यानी ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड की एक ऐसी बीमारी है, जो व्हाइट ब्लड सेल्स (डब्ल्यूबीसी) के लिंफोसाइट के प्रतिक्रियावादी होने के कारण होती है। दरअसल ये ब्लड सेल 'लिंफोसाइट' कभी-कभार अचानक अपने ही ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड में घुसकर इसकी तंत्रिका तारों पर आक्रमण कर इन्हें नष्ट करने लगता है। इससे ब्रेन, स्पाइनल कॉर्ड और शरीर के विभिन्न अंगों के बीच सूचनाओं का संचार रुक जाता है, जिससे शरीर के अंदर हो रही प्रतिक्रियाओं को महसूस करने में दिक्कत होने लगती है।

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लगातार बढ़ रही हैं न्यूरोलॉजिकल बीमारियां

न्यूरोलॉजिकल विकारों से जुड़े जोखिम कारकों का बात करें, तो इनमें से अधिकांश लाइलाज हैं और आमतौर पर समय के साथ और गंभीर हो जाते हैं। अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने 45 से 84 वर्ष की उम्र के बीच 678,000 वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया, जो 1994 से 1998 तक मेट्रो वैंकूवर में रहते थे और 1999 से 2003 तक एक अनुवर्ती अवधि के दौरान थे। उन्होंने सड़क निकटता, वायु प्रदूषण, शोर के लिए व्यक्तिगत परेशानियों का अनुभव किया। 

शोधकर्ताओं ने इस दौरान मानसिक बीमारियों के 13,170 मामलों में, पार्किंसंस रोग के 4,201 मामलों, अल्जाइमर रोग के 1,277 मामलों और एमएस के 658 मामलों की पहचान की। गैर-अल्जाइमर मनोभ्रंश और पार्किंसंस रोग के लिए विशेष रूप से, प्रमुख सड़कों या राजमार्ग के पास रहने वाले ये 14 प्रतिशत तक था उनकी तुलना में जो रोड के बिलकुल करीब नहीं रहते थे।

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जब शोधकर्ताओं ने हरियाली वाली जगह का हिसाब लगाया, तो उन्होंने पाया कि यहां रहने वाले लोगों में तंत्रिका संबंधी विकारों पर वायु प्रदूषण का प्रभाव कम था। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि यह सुरक्षात्मक प्रभाव कई कारकों के कारण हो सकता है। वरिष्ठ लेखक माइकल ब्रेयर की मानें, तो ऐसे लोगों के लिए जो उच्च स्तर के हरित क्षेत्र के संपर्क में हैं, उनके शारीरिक रूप से सक्रिय होने की संभावना अधिक है और उनकी मानसिक स्थिति बाकी लोगों की तुलना में ज्यादा बेहतर होती है।

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