जानें मच्छर के काटने के बाद कैसे फैलता है चिकनगुनिया का वायरस और क्या हैं इसके लक्षण

आमतौर पर चिकगुनिया के वायरस के शरीर में प्रवेश करने के 2-3 दिन बाद इसके लक्षण दिखना शुरू होते हैं। जानें इस दौरान चिकनगुनिया का वायरस आपके शरीर में क्या करता है और आपको कैसे बीमार बनाता है।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Aug 05, 2013
जानें मच्छर के काटने के बाद कैसे फैलता है चिकनगुनिया का वायरस और क्या हैं इसके लक्षण

चिकनगुनिया रोग, चिकनगुनिया नामक वायरस के कारण फैलता है, जो मच्छरों के काटने से मरीज के शरीर में प्रवेश करता है। आमतौर पर जब वायरस शरीर में प्रवेश करता है, उसके तुरंत बाद मरीज के शरीर में इसके लक्षण नहीं दिखते हैं। बल्कि चिकनगुनिया के लक्षण आमतौर पर मच्छरों के काटने के 2-3 बाद दिखना शूरू होते हैं। इस दौरान वायरस धीरे-धीरे मरीज के शरीर में अपनी संख्या बढ़ाता और शरीर के महत्वपूर्ण सिस्टम्स पर अटैक करता है। हर वायरस का एक लाइफ साइकल होता है, जिसके अनुसार ही वो वायरस व्यक्ति के शरीर में असर दिखाता है। आइए आपको बताते हैं कैसे चिकनगुनिया का वायरस आपके शरीर में पहुंचने के बाद आपको बीमार बनाता है और क्या हैं इस रोग के पहले लक्षण।

चिकनगनुनिया का वायरस

मनुष्य जब भी चिकनगुनिया वायरस का इलाज करवाता है, तो उसे इस वायरस के पूरे चक्र को नष्ट करना होता है। चिकनगुनिया वायरस अलग-अलग स्टेज में आकर मनुष्य के शरीर पर कुप्रभाव छोड़ता है। आइए जानें आखिरकार इस वायरस के जीवन चक्र में क्या–क्या चीजें शामिल हैं और किन-किन रूपों में चिकनगुनिया वायरस मानव के शरीर में पनपता है।

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आरंभिक संक्रमण

जब एक मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काटता है तो चिकनगुनिया वायरस के कण उस मच्छर में मौजूद हो जाते हैं ऐसे में जब वही मच्छर हेल्दी व्यक्ति को काटता है, तो वह व्यक्ति भी चिकनगुनिया का शिकार हो जाता है। मादा एडिस मच्छर के काटने से व्यक्ति के रक्त में चिकनगुनिया वायरस का संचरण होता है। ये वायरस स्वतंत्र कोशिकाओं के माध्यम से प्लाज्मा झिल्ली को नष्ट करने का काम करता है।

सेलुलर वायरस स्टेज

ये वायरस सेल में से साइटोप्लांज्म (cytoplasm) में प्रवेश कर नाभिक के जरिए आगे बढ़ते हैं। इसके बाद शरीर में जमा आनुवंशिक सामग्री में प्रवेश करते है। जब ये वायरस कण नाभिक के अंदर अपना जीनोम छोड़ देते हैं तो आसपास की अन्य कोशिकाएं भी इससे संक्रमित हो जाती है और यह चक्रीय प्रक्रिया एक बार पूरी होने के बाद बार-बार चलती रहती है।

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संक्रामक स्टेज 

एक बार जब वायरस व्यक्ति के शरीर में आ जाता है तो ये रक्त के जरिए शरीर को संक्रमित करता रहता है। चिकनगुनिया वायरस रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में फैलता रहता है।

चिह्न और लक्षण

सामान्यत: चिकनगुनिया होने पर शरीर का तापमान बढ़ जाता है यानी बुखार आ जाता है। इसके अलावा जोड़ों में दर्द, सिर दर्द, मिचली, उल्टियां, ठंड लगना, और चकत्ते आदि चिकनगुनिया के लक्षण हैं। साथ ही जीभ बेस्वाद हो जाती है। लेकिन इन बीमारियों के साथ ही चिकनगुनिया किसी भी अन्य बीमारी से घातक बीमारी है।

परीक्षण

चिकनगुनिया वायरस के लक्षणों को जांचने के लिए सीवीसी, ब्लड कल्च़र, आईजीएम और आईजीजी टेस्ट करवाएं जाते है।

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