खतरनाक है इम्यून सिस्टम का अतिसक्रीय हो जाना, जानें बच्चों में ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण और लक्षण

इम्यून सिस्टम का अतिसक्रीय हो जाना किसी के लिए भी जानलेवा है। वहीं बच्चों में इसे पहचानना और मुश्किल हो जाता है इसलिए आइए जानते हैं इस बारे में।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Nov 24, 2019Updated at: Nov 24, 2019
खतरनाक है इम्यून सिस्टम का अतिसक्रीय हो जाना, जानें बच्चों में ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण और लक्षण

हमारे स्वयं के अंग या जैविक प्रणाली आम तौर पर बहुत अपने ही ढ़ंग से काम करते हैं। जैसे कि हमारा इम्यून सिस्टम जो अपने हिसाब से बनाता है और शरीर में काम करता है। हम सभी जानते हैं कि हमारा शरीर कई इंफेक्शन से खुद ही लड़ता है पर हम में किसी को नहीं पता कि वास्तव में ये होता कैसे है। कुल मिलाकर हमें यही समझना चाहिए कि शरीर के हर अंग की अपनी ही प्रणाली है। पर कभी कभार हमनें गड़बड़ी आ जाती है और ये बड़ी तेज गति से काम करने लगते हैं, जो आपके लिए पूरी तरह से नुकसानदेह हो सकता है। बच्चों में इम्यून सिस्टम का ज्यादा एक्टिवेट हो जाना उनके लिए जानलेवा हो सकता है। आइए आज हम समते हैं कि बच्चों में इम्यून सिस्टम के ओवरएक्टिव होने पर क्या होता है।

Inside_autoimmune disorder in kids

इम्यून सिस्टम अधिक एक्टिव कैसे हो जाता है?

इम्यून सिस्टम सेल्स टिश्यूज और अंगों का एक जटिल नेटवर्क है। कई बार हानिकारक माइक्रोब्स से लड़ने में ये एक्टिव हो जाते हैं, पर इसी समय ये माइक्रोब्स इन्हें नुकसान पहुंचा देते हैं और शरीर में वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण और फैल जाता है। ऐसे में जब शरीर की लड़ाकू कोशिकाएं सुपर सक्रिय हो जाती हैं तो अनियमित हो सकती हैं। एक अतिसक्रिय प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर की हेल्दी सेल्स और टिशूज पर आक्रमण करती हैं, जिससे हम स्वप्रतिरक्षी विकारों को ट्रिगर करते हैं। हालांकि इसका कारण अभी तक खोजा नहीं जा सका है, लेकिन विशेषज्ञ इसे दोषपूर्ण आनुवांशिक बताते हैं। दुर्भाग्य से, ऑटोइम्यून विकार ज्यादातर अपरिवर्तित रहते हैं। यह मुख्य रूप से है क्योंकि क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी अभी भी हमारे देश में एक नवजात अवस्था में ही ऐसे जीन्स को ठीक नहीं कर पाती है। आइए अब जानते हैं कि ये बच्चों को बीमार कैसे कर सकती है

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ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण क्या हैं?

लक्षणों का एक भी सेट नहीं है जो ऑटोइम्यून बीमारी के स्पेक्ट्रम को कवर करता है। सबसे आम लक्षण निरर्थक होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक ऐसी स्थिति के कारण हो सकते हैं जिसका प्रतिरक्षा प्रणाली से कोई लेना-देना नहीं है। इससे डॉक्टरों को ऑटोइम्यून बीमारियों का निदान करना कठिन हो सकता है। नतीजतन, एक बच्चे को अपने लक्षणों के संभावित कारण को कम करने के लिए कई परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है।

बच्चों में इम्यून सिस्टम के अधिक एक्टिव होने के लक्षण-

  • कम श्रेणी बुखार
  • थकान और रीढ़ की हड्डी में तेज दर्द
  • चक्कर आना
  • वजन घटना
  • चकत्ते और त्वचा के घाव
  • जोड़ों में अकड़न
  • बालों का अधिक झड़ना
  • सूखी आंखें और मुँह

बच्चों को किस प्रकार से ऑटोइम्यून रोग प्रभावित करते हैं?

प्रतिरक्षा प्रणाली को पूरे शरीर की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। जब यह खराब हो जाता है, तो यह शरीर के किसी भी हिस्से पर त्वचा से लेकर जोड़ों तक रक्त वाहिकाओं पर हमला कर सकता है - जो सभी अलग-अलग तरीकों से प्रतिक्रिया करते हैं और अक्सर अलग-अलग उपचार रणनीतियों की आवश्यकता होती है।सामान्य तौर पर, ऑटोइम्यून रोग अक्सर दो बुनियादी समूहों में से एक में आते हैं। जैसे कि पहला अंग-विशिष्ट विकार यानी किसी एक अंग में और दूसरा सेल्स और टिश्यूज में। इन दोनों के कारण से बच्चों को इन बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे-

अतिसक्रीय इम्यून सिस्टम से बच्चों में होने वाली बीमारियां-

  • एडिसन ग्रंथियों पर एडिसन रोग से बच्चे प्रभावित हो सकते हैं।
  • ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस हो सकता है जो लीवर को खराब कर देता है। 
  • मल्टीपल स्केलेरोसिस (एमएस) सेंट्रस नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है
  • टाइप 1 डायबिटीज।
  • गैस और पेट में पथरी की गंभीर समस्याएं।
  • किशोर इडियोपैथिक गठिया जोड़ों और कभी-कभी त्वचा और फेफड़ों को प्रभावित करता है।
  • जोड़ों, त्वचा, गुर्दे, हृदय, मस्तिष्क और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है
  • पूरे शरीर में स्क्लेरोडर्मा का हो जाना इत्यादि।

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