मां से दूर होने पर शिशु रोए तो ये हैं सेपरेशन एंग्जाइटी के लक्षण, जानें कारण और उपचार

 जब भी बच्चे अपनी मां से दूर होते हैं तो वे रोना शुरू कर देते हैं। लेकिन अगर वह पल भर के लिए भी मां का साथ छोड़ने पर रोए तो यह सोचने वाली बात है।

Garima Garg
Written by: Garima GargUpdated at: Oct 20, 2020 13:56 IST
मां से दूर होने पर शिशु रोए तो ये हैं सेपरेशन एंग्जाइटी के लक्षण, जानें कारण और उपचार

बच्चा मां के साथ प्यार और सुरक्षा महसूस करता है। यही कारण होता है कि वह अपनी मां से एक पल के लिए भी दूर नहीं रहना चाहता। लेकिन यह है स्वस्थ भावनात्मक विकास के लिए सही नहीं है। स्वस्थ भावनात्मक विकास के लिए मां का कुछ पलों के लिए दूर रहना बेहद जरूरी है। वरना ऐसे बच्चे थोड़ी सी उम्र बढ़ने पर सेपरेशन एंजायटी जैसी मनोवैज्ञानिक समस्या के शिकार हो जाते हैं। इसके उसके व्यक्तित्व के विकास में भी कमी आनी शुरू हो जाती है। जिसके कारण वह अनेक मानसिक बीमारियों से जूझने लगता है। इस लेख के माध्यम से आज हम आपको बताएंगे कि सेपरेशन एंजायटी किस कारण होती है? साथ ही इसके लक्षण और उपचार क्या है? पढ़ते हैं आगे....

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सेपरेशन एंजायटी के लक्षण

कहते हैं कि 6 महीने तक के बच्चे को मां से दूर रहने का ख्याल नहीं सताता है। इस उम्र में वे  केवल ममता के भूखे होते हैं। ऐसे बच्चे किसी भी दूसरी स्त्री की साथ कंफर्टेबल महसूस कर सकते हैं। लेकिन दसवे-ग्यारवें महीने तक बच्चा मां का चेहरा पहचानना और उसकी खूशबू को समझना शुरू कर देता है। यही कारण होता है कि मां के लगातार रहने की वजह से बच्चा उनके साथ भावनात्मक बंधन महसूस करता है। ऐसे में मां के अलग हो जाने पर ऐसे बच्चे रो कर अपनी असहमति जाहिर करते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे उनके लक्षण भी बदलते रहते हैं। कुछ बच्चे बेहद जिद्दी मिजाज के हो जाते हैं तो कुछ बार-बार मां के पास जाने की जिद करते हैं। वे कभी अपनी मां से अलग नहीं रह पाते अगर आपका बच्चा भी इस उम्र में है तो आपको बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

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सेपरेशन एंजायटी के उपचार

अगर आपका बच्चा आपके पल भर के दूर होने पर रोना शुरू कर देता है तो छोटे स्तर से शुरुआत करें। कुछ कुछ मिनटों के लिए उससे दूरी बनाना शुरू करें। इसके लिए आप किसी खेल या अन्य सदस्य की मदद भी ले सकती हैं। उदाहरण के तौर पर अगर आप छुपन छुपाई खेलती हैं तो अपनी हथेलियां से या किसी कपड़े से अपना चेहरा छुपा लें और बच्चे से कहें कि वह आपको ढूंढे। ऐसे में उसके चेहरे पर आए चौंकने वाले भाव से घबराएं नहीं। जब वे इस खेल का आदि हो जाए तो आप उसे किसी परिवार के सदस्य के पास 5 - 10 मिनट के लिए छोड़ें और किसी दूसरे कमरे में चली जाएं और बाद में उस व्यक्ति से बच्चे की प्रक्रिया के बारे में पूछें। जब बच्चा इसका भी आदि हो जाए तो आधा या 1 घंटे के लिए बच्चे को बाहर घुमाने या किसी अन्य सदस्य के पास छोड़ें। इससे आप धीरे-धीरे बच्चे के स्वभाव में बदलाव महसूस करेंगे।

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बच्चे में भी हो सकता है तनाव

आपको जानकर हैरानी होगी कि बच्चों को भी तनाव हो सकता है। जी हां, जब किसी एक डेढ़ साल के बच्चे की मां उसकी आंखों से ओझल हो जाती है तो वह परेशान हो जाता है और उसके मन में कई तरह के सवाल आने शुरू हो जाते हैं। वे सोचता है कि क्या उसकी मां अब लौट के आएगी या नहीं। यह कारण होता है कि बच्चा एकदम मायूस और तनाव महसूस करता है। ऐसे में बच्चे को समझाएं कि उसकी मां केवल कुछ पलों के लिए उससे दूर गई हैं। ऐसे बच्चों की प्रशिक्षित करने की जरूरत होती है। इससे अगल उसे हमेशा एक ही नाम से बुलाए। इससे थोड़ी दिनों में वे अपने नाम का आदि हो जाएगा।

(ये लेख इंडियन स्पाइनल इंज्यूरी सेंटर के क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर शानू श्रीवास्तव से बातचीत पर आधारित है।) 

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