सोरायसिस स्किन से जुड़ी ऑटोइम्यून कंडीशन है, जिसे मैनेज करने के लिए मरीज डॉक्टर की सलाह पर विभिन्न उपचार अपनाता है और त्वचा पर दवाएं लगाता है। कुछ लोग विटामिन ई का इस्तेमाल सोरायसिस से रिकवरी के लिए भी करते हैं। ऐसे में यह सवाल जरूर उठता है कि क्या वाकई सोरायसिस के लिए विटामिन ई फायदेमंद है, इसका किस तरह से उपयोग किया जा सकता है और किस-किस तरह की सावधानियां बरती जानी चाहिए? इस लेख में दी गई जानकारी और वैज्ञानिक तथ्यों की पुष्टि खुद राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा ने की है।
विटामिन ई क्या है?
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विटामिन ई एक वसा में घुलनशील एंटीऑक्सीडेंट है, जो सेल्स को फ्री रेडिकल्स (मुक्त कणों) से बचाने में मदद करता है। इसे स्किन के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। यह हमारी त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों और प्रदूषण से होने वाले नुकसान से बचाता है। नियमित इस्तेमाल से झुर्रियां और मुंहासों में कमी आ सकती है और डार्क स्पॉट्स भी कम होते हैं। यहां तक कि बेजान त्वचा में भी विटामिन ई फायदेमंद हो सकता है। बहरहाल, त्वचा के लिए विटामिन ई का उपयोग कई तरह से किया जा सकता है, जैसे सीधे कैप्सूल से निकालकर चेहरे पर लगाया जाए या इसे एलोवेरा जेल तथा नारियल तेल में मिलाकर फेस पैक की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, त्वचा को अंदरूनी पोषण देने के लिए बादाम और पालक जैसे विटामिन ई युक्त आहार को डाइट में शामिल किया जाए।
क्या सोरायसिस में विटामिन ई फायदेमंद है?
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2024 में न्यूट्रिशन एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित स्टडी के अनुसार सोरायसिस में विटामिन ई का उपयोग फायदेमंद हो सकता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो सोरायसिस के लक्षणों को मैनेज करने में मदद करते हैं। ध्यान रखें कि सोरायसिस एक ऑटोइम्यून कंडीशन है, जिसमें स्किन सेल्स बहुत तेजी से बनने लगती हैं। इसकी वजह से त्वचा में लाल, खुजलीदार और पपड़ीदार पैच बन जाते हैं।
सोरायसिस में विटामिन ई के फायदे
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- ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करनाः Journal of Clinical and Diagnostic Research में प्रकाशित स्टडी के अनुसार सोरायसिस से पीड़ित लोगों के शरीर में फ्री रेडिकल्स की अधिकता होती है। विटामिन ई हानिकारक कणों को बेअसर करके स्किन सेल्स को होने वाले नुकसान से बचाता है।
- सूजन में कमीः 2021 में Dermatologic Therapy में प्रकाशित स्टडी के अनुसार सोरायसिस के कारण त्वचा में रेडनेस, सूजन और जलन होती है। जब सोरायसिस के मरीज विटामिन ई का उपयोग करते हैं, तो इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व त्वचा की लालिमा, जलन और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसे विशेषकर एटोपिक डर्मेटाइटिस और सोरायसिस जैसी स्थितियों में फायदेमंद पाया गया है।
- त्वचा की नमी का बढ़नाः 2021 में Vitamin E in Health and Disease में प्रकाशित स्टडी के अनुसार विटामिन ई त्वचा की नेचुरल प्रोटेक्टिव बैरियर को मजबूती देता है, जिससे सोरायसिस के कारण होने वाला अत्यधिक सूखापन और पपड़ी जमने की समस्या में कमी आती है।
- सेल्स रिपेयर होनाः सोरायसिस में त्वचा में पैचेज बन जाते हैं। अगर इस पर विटामिन ई लगाया जाए, तो इससे स्किन सेल्स रिपेयर होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है और फटी हुई त्वचा तथा घावों से राहत मिलती है। असल में, सोरायसिस जैसी समस्या में स्किन का प्राकृतिक सुरक्षा कवच टूट जाता है, जिससे त्वचा ड्राई हो जाती है और फटने लगती है। विटामिन ई में फैट सॉल्युबल पोषक तत्व होता है, जो कि त्वचा की बाहरी परत (Stratum Corneum) में आवश्यक लिपिड्स की पूर्ति करता है। इससे त्वचा की नमी बनी रहती है और फटी हुई त्वचा को भरने में मदद मिलती है। विटामिन ई में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सोरायसिस में होने वाली लालिमा, सूजन और जलन को कम करने के लिए यह बहुत प्रभावी है।
विटामिन ई का सेवन करना बेहतर है या इसे त्वचा पर लगाना?
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सोरायसिस के मरीजों के लिए विटामिन ई युक्त आहार और विटामिन ई युक्त क्रीम दोनों की भूमिका अलग-अलग पर अहम है। मरीज को किस तरह के ट्रीटमेंट की जरूरत है और उन्हें अपनी डाइट में कितनी मात्रा में विटामिन ई को शामिल करना है, इस बारे में डॉक्टर सही सलाह दे सकते हैं। फिर भी यहां तुलनात्मक नजरिए से जानेंगे कि सोरायसिस के मरीज विटामिन ई खाना बेहतर है या लगाना-
सोरायसिस में विटामिन ई युक्त आहार के फायदे
- सोरायसिस में विटामिन ई युक्त आहार का सेवन करने से ऑटोइम्यून कंडीशन को अंदरूनी तरीके से मैनेज करने में मदद मिल सकती है। IUBMB Life के अनुसार विटामिन ई एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है। यह पोषक तत्व इम्यून सिस्टम से जुड़ी सूजन को कम करने में सहायक हो सकता है।
- नियमित रूप से विटामिन ई युक्त आहार जैसे बादाम, पालक, सूरजमुखी के बीज आदि का सेवन करने से सोरायसिस के अचानक बढ़ने वाले पैच में कमी आ सकती है।
क्या है बेहतर: सेवन करना या त्वचा पर लगाना
| विशेषता | विटामिन E आहार (Dietary) | विटामिन E टॉपिकल क्रीम (Topical) |
| कार्य करने का तरीका | यह अंदरूनी (Systemic) रूप से काम करता है और शरीर की सूजन (Inflammation) को कम करता है। | यह बाहरी (Local) रूप से काम करता है और सीधे प्रभावित त्वचा को आराम देता है। |
| मुख्य लाभ | शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को संतुलित करता है और नए फ्लेयर-अप्स को रोकता है। | त्वचा के सूखेपन, खुजली और पपड़ी (Scaling) को तुरंत कम करता है। |
| असर की गति | इसका असर दिखने में हफ्तों या महीने लग सकते हैं (लंबे समय के लिए बेहतर)। | इससे स्किन तुरंत मॉइस्चराइज होती है और तुरंत राहत मिलता है। |
| उपयोग का माध्यम | नट्स, बीज, हरी सब्जियां या ओरल सप्लीमेंट्स के जरिए। | लोशन, क्रीम, सीरम या कैप्सूल का तेल सीधे त्वचा पर लगाकर। |
| सुरक्षा/साइड इफेक्ट्स | प्राकृतिक भोजन से कोई खतरा नहीं है, लेकिन सप्लीमेंट्स की अधिकता नुकसानदेह हो सकती है। | कुछ संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को जलन या एलर्जी (Contact Dermatitis) हो सकती है। |
| सोरायसिस में भूमिका | कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाकर बीमारी को जड़ से मैनेज करने में मदद। | फटी हुई त्वचा को हाइड्रेट करने और घाव भरने में मदद। |
सोरायसिस के मरीजों के लिए विटामिन ई लगाने के फायदे
- सोरायसिस में स्किन बहुत ज्यादा प्रभावित हो जाती है। इसकी वजह से रेडनेस, जलन और पपड़ी काफी ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में विटामिन ई युक्त आहार की तुलना में विटामिन ई टॉपिकल क्रीम कुछ मामलों में अधिक राहत दे सकती है।
- सोरायसिस के लिए मरीजों को त्वचा की सतह पर विटामिन ई लगाना इसलिए भी कारगर है, क्योंकि इससे त्वचा को तुरंत नमी मिलती है। इससे ड्राईनेस कम होती है और खिंचाव में भी कमी आती है।
- सोरायसिस के कारण स्किन में पपड़ी जमने लगती है। इसे रिमूव करने से कई बार मरीज को दर्द का एहसास भी होता है। अगर विटामिन ई लगाया जाए, तो इससे पपड़ी नर्म हो जाती है, जिससे उसे हटाना आसान हो जाता है। हालांकि सोरायसिस के कारण त्वचा में हुई पपड़ी को कभी भी हाथ से नहीं हटाना चाहिए।
- सोरायसिस के कारण त्वचा पर खुजली भी होती रहती है। इसे कम करने में भी विटामिन ई लगाया जा सकता है, जो जलन को भी शांत करने में मदद करता है।
- 2016 में Indian Dermatology Online Journal में प्रकाशित स्टडी के मानें, तो विटामिन ई को त्वचा की रक्षा करने वाला एक अनिवार्य तत्व माना जाता है, जो सूजन कम करने और त्वचा की नमी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सोरायसिस में विटामिन ई का उपयोग त्वचा पर कैसे करें?
सोरायसिस में विटामिन ई का उपयोग करना है या नहीं, इस संबंध में पहले डॉक्टर से जान लें। हालांकि आप इसे यहां बताए गए तरीके से यूज कर सकते हैं-
- विटामिन ई को सीधे प्रभावित हिस्से में लगाएं। इससे त्वचा का सूखापन दूर होता है।
- विटामिन ई कैप्सूल को पंचर करके उसका तेल निकालें और सीधे प्रभावित पैच पर लगाएं। इससे खुजली कम होती है।
- डॉ करुणा मल्होत्रा कहती हैं कि आप विटामिन ई को नारियल तेल या एलोवेरा जेल के साथ मिक्स करके भी लगा सकते हैं। यह बहुत आसानी से प्रभावी हिस्से में फैल जाता है और त्वचा को गहराई तक मॉइस्चराइज करता है।
- विटामिन ई को नहाने के तुरंत बाद त्वचा पर लगाना सही होता है। इससे त्वचा थोड़ी में नमी लॉक हो जाती है।
सोरायसिस में विटामिन ई के लिए डाइट में क्या-क्या शामिल करें?
सोरायसिस को मैनेज करने के लिए डाइट में विटामिन ई युक्त आहार का महत्वपूर्ण योगदान है। यहां विटामिन ई के मुख्य स्रोत के बारे में दे रहे हैं जरूरी जानकारी-
- नट्स और सीड्सः National Psoriasis Foundation के अनुसार सोरायसिस में नट्स और सीड्स को डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए। असल में इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। इसके साथ-साथ यह ओमेगा-3 फैटी एसिड का भी अच्छा स्रोत है, जो स्किन ऑयल प्रोडक्शन को भी रेगुलेट करता है।
- बादाम खाएंः यह विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट्स का समृद्ध स्रोत माना जाता है। इसकी मदद से सी रिएक्टिव प्रोटीन का स्तर कम होता है, जिससे त्वचा में आई सूजन में भी कमी आती है।
- सूरजमुखी के बीजः International Journal of Pharmaceutical research and Applications में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक रोजाना मुट्ठीभर बीज का सेवन करने से सोरायसिस के मरीजों के लक्षणों में कमी आती है। असल में, यह विटामिन ई, ओमेगा-6 फैटी एसिड, एंटीइंफ्लेमेटरी तत्वों से भरपूर है। इसका सेवन करने से क्रोनिक इंफ्लेमेशन में कमी आती है, जो सोरायसिस की कंडीशन में राहत दिलाता है।
- हरी पत्तेदार सब्जियां खाएंः सोरायसिस में पालक का सेवन करना भी फायदेमंद माना जाता है। इसमें विटामिन ई और आयरन का बेहतरीन मेल होता है। इसका सेवन करने से सिस्टेमिक इंफ्लेमेशन में कमी आती है, जिससे कंडीशन में सुधार होता है।
- ब्रोकली: इसमें विटामिन ई और सी पाया जाता है। यह स्किन को रिपेयर होने में मदद करता है। इसलिए, सोरायसिस के मरीजों के लिए इसे फायदेमंद माना जाता है।
- फलः एवोकैडो, पपीता और आम जैसे फल सोरायसिस की कंडीशन में सुधार में मदद करते हैं। इन फलों में हेल्दी फैट, विटामिन ई और विटामिन सी पाया जाता है। यह स्किन ड्राईनेस को कम करता है।
सोरायसिस में कब विटामिन ई न लें?
सोरायसिस में विटामिन ई फायदेमंद तत्व है। इसे मरीज अपनी त्वचा में टॉपिकल क्रीम या तेल के रूप में उपयोग कर सकते हैं और इसका सेवन भी किया जा सकता है। डॉ. करुणा मल्होत्रा कहती हैं, "अगर सोरायसिस के मरीज किसी अन्य मेडिकल कंडीशन से जूझ रहे हैं, जैसे लिवर डिजीज या ब्लीडिंग डिसऑर्डर आदि। ऐसे में विटामिन ई का सेवन नहीं किया जाना चाहिए। इससे ब्लीडिंग रिस्क बढ़ सकता है और सेहत को भारी नुकसान भी हो सकता है। ऐसी स्थिति से कैसे निपटना है, इसकी जानकारी सीधे डॉक्टर से लेना बेहतर होता है।"
सोरायसिस में विटामिन ई की कमी के संकेत
सोरायसिस में विटामिन ई की कमी होने पर कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे स्किन का ओवर सेंसिटिव होना, ड्राईनेस बढ़ना, पपड़ीदार त्वचा या घाव देरी से भरना। यह सब अक्सर ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ने के साथ होता है। आमतौर पर सोरायसिस की गंभीरता को विटामिन डी से जोड़कर देखा जाता है, क्योंकि यह स्किन सेल्स के विकास को नियंत्रित करता है। लेकिन, विटामिन ई भी स्किन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह सूजन से जुड़े कारकों को प्रभावित कर सकता है। विटामिन ई की कमी की पुष्टि करने के लिए ब्लड टेस्ट किए जाते हैं।
प्रेग्नेंसी और सोरायसिस: क्या विटामिन-ई का इस्तेमाल सुरक्षित है?
प्रेग्नेंसी में सोरायसिस की समस्या में विटामिन ई का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन सीमित मात्रा में। असल में, प्रेग्नेंसी के दौरान सोरायसिस से पीड़ित महिला इसका उपयोग किस तरह कर रही है, यह बात बहुत मायने रखती है। डॉ. करुणा मल्होत्रा बताती हैं कि त्वचा पर विटामिन ई युक्त मॉइस्चराइजर या तेल लगाना सुरक्षित माना जाता है और यह सोरायसिस की खुजली और ड्राईनेस को कम करने में भी मदद करता है। हालांकि, बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन ई के सप्लीमेंट्स या कैप्सूल नहीं लिए जाने चाहिए। इसकी अधिक मात्रा गर्भावस्था में जटिलताओं का कारण बन सकती है और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। इसके बजाए महिलाएं सोरायसिस की समस्या पर नैचुरल मॉइस्चराइजर का उपयोग करें।
सोरायसिस के मरीज कब जाएं डॉक्टर के पास?

सोरायसिस एक ऐसी कंडीशन है, जिसका पता चलते ही डॉक्टर के पास जाना जरूरी होता है। इसलिए, मरीज को अपने शरीर में नजर आ रहे हर लक्षण पर गौर करना चाहिए। अगर वे गंभीर हो जाएं यानी स्किन की रेडनेस, खुजली या पपड़ीदार पैच अचानक बहुत बढ़ गए हों और घरेलू उपचार या सामान्य क्रीम से आराम न मिल रहा हो, तो डॉक्टर के पास जाने में देरी न करें। इसके अलावा, त्वचा संबंधी समस्या होने के साथ-साथ व्यक्ति को जोड़ों में दर्द, रोजमर्रा के कामकाज करने में दिक्कतें आ रही हैं, तो भी डॉक्टर के पास तुरंत जाएं।
निष्कर्ष
सोरायसिस में विटामिन ई एक उपयोगी पोषक तत्व है। इसलिए, सोरायसिस के मरीजों को इसे अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए। इसके साथ-साथ स्किन में नजर आ रहे पैच को हल्का करने लिए विटामिन ई युक्त क्रीम का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे त्वचा की नमी बनी रहती है और पैच कम होते हैं। हालांकि, मरीजों को डॉक्टर की सलाह पर ही विटामिन ई का उपयोग करना चाहिए।
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FAQ
क्या विटामिन ई सोरायसिस को पूरी तरह ठीक कर सकता है?
नहीं, विटामिन ई सोरायसिस को पूरी तरह ठीक नहीं कर सकता है। सोरायसिस एक तरह की ऑटोइम्यून कंडीशन है, जिसका कोई स्थायी इलाज नहीं होता। विटामिन ई की मदद से केवल लक्षणों को कम किया जा सकता है और स्किन को रिपेयर करने में मदद मिलती है।सोरायसिस के लिए विटामिन ई का उपयोग कैसे करना चाहिए, लगाकर या खाकर?
डॉ. करुणा मल्होत्रा की मानें, तो सोरायसिस के लिए विटामिन का उपयोग दोनों तरह से सही होता है। विटामिन ई युक्त आहार आंतरिक सूजन को कम करता है, जबकि विटामिन ई युक्त तेल या क्रीम को सीधे त्वचा पर लगाने से ड्राईनेस और सूजन में कमी आती है।क्या विटामिन ई कैप्सूल के तेल को सीधे सोरायसिस पैच पर लगाना सेफ होता है?
आमतौर पर सोरायसिस के पैच पर विटामिन ई कैप्सूल को सीधे तौर पर लगाना सुरक्षित होता है। इससे प्रभावित हिस्सा गहराई तक मॉइस्चराइज होता है। हालांकि, इसे सीधे स्किन पर लगाने से पहले एक पैच टेस्ट जरूर करें ताकि जलन या एलर्जी की संभावना न रहे।क्या सोरायसिस में विटामिन ई के सेवन के कोई दुष्प्रभाव हो सकते हैं?
सोरायसिस के मरीजों के लिए डाइट में विटामिन ई शामिल करना पूरी तरह सेफ होता है। हां, अगर किसी अन्य तरह की मेडिकल कंडीशन है या मरीज खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह के बिना विटामिन ई सप्लीमेंट न लें।क्या विटामिन ई के साथ विटामिन डी लेना सोरायसिस में अधिक फायदेमंद है?
डॉ. करुणा मल्होत्रा बताती हैं कि विटामिन ई और डी को साथ में लेने से सोरायसिस के उपचार में अधिक मदद मिलती है। विटामिन डी कोशिकाओं के तेजी से बढ़ने को रोकता है और विटामिन ई त्वचा की रक्षा करता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
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Current Version
Apr 16, 2026 15:21 IST
Modified By : Meera Tagore Apr 16, 2026 15:21 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra