मूत्राशय में दवाब या दर्द हो सकता है 'इंटरस्टीशियल सिस्टाइटिस' का संकेत, जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज

इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस (interstitial cystitis) एक गंभीर स्थिति है। ऐसे में मूत्राशय में दबाव या जलन की शिकायत होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। 

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Oct 13, 2021
 मूत्राशय में दवाब या दर्द हो सकता है 'इंटरस्टीशियल सिस्टाइटिस' का संकेत, जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज

इंटरस्टीशियल सिस्टाइटिस (interstitial cystitis) मूत्राशय से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है। इस समस्या से ग्रसित व्यक्ति के मूत्राशय में दबाब, कभी-कभी पेड़ू में दर्द, पेशाब करने में कठिनाई और मूत्राशय में दर्द का अनुभव होता है। इस स्थिति में दर्द गंभीर या हल्के हो सकते हैं। इस स्थिति को मूत्राशय सिंड्रोम भी कहते हैं, क्योंकि यह मूत्राशय से जुड़े सिंड्राम का एक हिस्सा है। दरअसल, हमारे शरीर में मूत्राशय एक गुब्बारानुमा अंग है, जिसमें मूत्र एकत्रित होता है। जब मूत्राशय भर जाता है, तो हमारा मस्तिष्क पेल्विक नसों के द्वारा संकेत भेजता है, जिसके कारण व्यक्ति में पेशाब करने की इच्छा जागृत होती है।

गुरुग्राम स्थित नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर सुदीप सिंह सचदेवा का कहना है कि जब व्यक्ति इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस (interstitial cystitis) की समस्या से ग्रसित होता है, तो उनमें यह संकेत मिक्स हो जाते हैं। ऐसे में व्यक्ति को मूत्र त्यागने से जुड़ी समस्या होने (What is interstitial cystitis) लगती है। दरअसल, इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस से ग्रसित व्यक्ति में कुछ स्थितियों में कारण मूत्राशय की क्षमता कम हो जाती है, जिसके कारण पेशाब करने की आवश्यकता बढ़ने लगती है। इसके अलावा मूत्राशय में सूजन, मूत्राशय में पुराने निशान और घाव के कारण इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस (interstitial cystitis) हो सकती है। यह परेशानी पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होती है। चलिए जानते हैं विस्तार से इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस के बारे- 

इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस के कारण (Causes of interstitial cystitis)

इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस होने के स्पष्ट कारण सामने नहीं आए हैं। लेकिन कुछ स्थितियों के कारण आपको यह परेशानी हो सकती है। जैसे-

  • पेल्विक की मांसपेशियों का सही से कार्य न करना
  • मूत्राशय में चोट लगना।
  • मूत्राशय में सूजन होना।
  • यूरिन में हानिकारण अपशिष्ट मौजूद होना।
  • रीढ़ की हड्डियों में चोट लगना।
  • अनुवांशिक कारण
  • यूरिन इंफेक्शन होना।
  • ऑटोइम्यून से ग्रसित होना।
  • तंत्रिका तंत्र सही से कार्य न करना।
  • इम्यूनिटी कमजोर होना इत्यादि।

इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस के लक्षण (Symptoms of interstitial cystitis)

  • इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस से ग्रसित व्यक्ति के शरीर में निम्न लक्षण दिख सकते हैं। इन लक्षणों में से अगर आपके शरीर में 1 या दो लक्षण दिखे, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें। 
  • मूत्राशय भरने पर दर्द होना।
  • बैचेनी महसूस होना।
  • पेशाब करने के बाद भी दोबारा पेशाब करने की इच्छा होना।
  • पेल्विक में दबाव
  • बार-बार पेशाब जाना
  • सेक्स के दौरान दर्द का अनुभव होना।
  • पेल्विक में तेज या हल्का दर्द होना।

अगर आपके शरीर में ऊपर लिखे एक भी लक्षण नजर आते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। ताकि आपकी परेशानी को कंट्रोल किया जा सके।

इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस की जांच (Diagnosis of interstitial cystitis)

इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस की समस्या का कोई सटीक निदान नहीं है। क्योंकि इसके लक्षण अन्य ब्लैडर डिसऑर्डर जैसे- ब्लैडर कैंसर, यूटीआई (यूरिनल इंफेक्शन), एंडोमेट्रियोसिस इत्यादि से मिलते-जुलते हैं। ऐसे में डॉक्टर को कंफ्यूजन पैदा हो सकता है। जिसकी वजह से वह आपको निम्न टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। ताकि आपके शरीर में दिखने वाले लक्षणों का सटीक कारण पता लगा सके। जैसे-

पेल्विक एग्जामिनेशन - इस एग्जामिनेशन में डॉक्टर आपके बाहरी जननांगों, गर्भाशय के ग्रीवा और योनि की जांच कर सकता है। कुछ स्थितियों में किडनी और मलाशय की भी जांच की जाती है।

यूरिन टेस्ट - मूत्र के सैंपल को लेकर डॉक्टर यूरिन टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।

बायोप्सी - बायोप्सी में डॉक्टर प्रभावित हिस्से का सैंपल एकत्रित करके माइक्रोस्कोप से परिक्षण करते हैं। 

सिस्टोस्कोपी – इस जांच में डॉक्टर मूत्रमार्ग के माध्यम से सिस्टोस्कोप के साथ एक पतली ट्यूब डालते हैं। इस टेस्ट में डॉक्टर मूत्राशय की परत को देख कर पता लगाने की कोशिश करते हैं। साथ ही डॉक्टर मूत्राशय में द्रव को इंजेक्ट कर सकते हैं। इस टेस्ट के जरिए डॉक्टर इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस का पता लगाने की कोशिश करते हैं

इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस की जटिलताएं 

इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस के परिणाम स्वरूप मरीजों में कुछ जटिलताएं दिख सकती हैँ। जैसे-

मूत्राशय क्षमता कम होना –  इस समस्या से ग्रसित व्यक्ति के मूत्राशय की दीवार की मोटी हो सकती है, जिसके कारण मूत्राशय क्षमता की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आपके शरीर से मूत्र त्याग कम मात्रा में हो सकता है। जिसके कारण शरीर में कई तरह की परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। 

जीवन की गुणवत्ता पर असर – आईसी के कारण आपको यूरिन त्याग के दौरान दर्द और बार-बार पेशाब करने की इच्छा होने लगती है। जिसकी वजह से आपकी सामाजिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। साथ ही अन्य दैनिक दिनचर्या पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।  

पार्टनर के साथ परेशानी - बार-बार पेशाब करने की इच्छा और दर्द के  कारण  आपके पार्टनर के बीच संबध खराब हो सकते हैं। 

नींद में बाधा- दर्द और बार-बार पेशाब की इच्छा नींद में बाधा उत्पन्न कर सकती है।

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इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस का इलाज (Treatment of interstitial cystitis)

डॉक्टर बताते हैं कि इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस का कोई सटीक इलाज नहीं है। हालांकि, कुछ इलाज के जरिए इसके लक्षणों को कम करने की कोशिश की जाती है। जैसे-

दवाइयां 

इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस के लक्षणों को कम करने के लिए डॉक्टर आपको कुछ मौखिक दवाइयां दे सकते हैं। इसमें दर्द को दूर करने के लिए नॉनस्टेरॉयड एंटी-इंफ्लैमेटरी ड्रग्स, मूत्राशय की बैचेनी और दर्द को कम करने के लिए एंटीहिस्टामाइन्स (antihistamine) जैसी दवाइयां दे सकते हैं। 

इसके अलावा कुछ स्थितियों में डॉक्टर मूत्राशय में दवाइयां डालते हैं, जिससे इंटरस्टिशियल-सिस्टिटिस के लक्षणों को कम किया जा सके। 

सर्जरी

मौखिक और मूत्राशय में दवाइयां डालने के अलावा डॉक्टर आपको सर्जरी का भी विकल्प दे सकते हैं।

इंटरस्टीशियल-सिस्टाइटिस का बचाव (Prevention of interstitial cystitis)

  • टाइट कपड़े न पहनें। 
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
  • अच्छी और गहरी नींद लें।
  • स्ट्रेस से दूर रहें।
  • शराब और धूम्रपान का सेवन न करें।
  •  सेक्स के बाद मूत्राशय को खाली जरूर करें। 
  • मल त्यागने के बाद अपने प्राइवेट हिस्सों को अच्छे से साफ करें।
  • योनि या फिर गुदे के आसापास साबुन का इस्तेमाल न करें।

इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस  (interstitial cystitis) के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। ताकि आपकी समस्या का समय पर इलाज हो सके। मूत्राशय से जुड़ी परेशानियों को नजरअंदाज करने से बचें। इससे आपकी समस्या बढ़ सकती है। नियनित रूप से अपना चेकअप कराएं। इससे आपकी समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस से बचने के लिए अपने लाइफस्टाइल को बेहतर करें। नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और खराब आदतों को  दूर रहने की कोशिश करें। साथ ही अपने डाइट पर भी ध्यान दें।

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