WHO ने माना पोलिया और चेचक की तरह कोरोना को कंट्रोल कर सकता है भारत, जानें कब और कैसे मिली थी सफलता

WHO का कहना है जैसे अतीत में भारत ने पोलियो और चेचक को समाप्त करने के लिए कदम उठाए थे ठीक उसी तरह कोरोना को कंट्रोल किया जा सकता है। 

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaPublished at: Mar 31, 2020
WHO ने माना पोलिया और चेचक की तरह कोरोना को कंट्रोल कर सकता है भारत, जानें कब और कैसे मिली थी सफलता

दुनियाभर में फैले कोरोनावायरस को रोकने के लिए एक तरफ जहां तमाम देश कई तरह के कदम उठा रहे हैं वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अतीत में चेचक (small pox) और पोलियो के उन्मूलन में भारत की सफलता को ध्यान में रखते हुए कहा कि भारत के पास कोरोना को फैलने से रोकने के लिए "जबरदस्त क्षमता" है। डब्ल्यूएचओ हेल्थ इमर्जेंसी प्रोग्राम के कार्यकारी निदेशक माइकल जे. रयान का कहना है कि भारत ने एक अन्य साइलेंट किलर पोलियो का भी सफाया किया है और उसके मामलों को खोजने और टीकाकरण करने से लेकर सभी चीजों को करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में जबरदस्त क्षमता है।”

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भारत कर सकता है दुनिया का नेतृत्व

रयान ने ये भी कहा, "यह बेहद महत्वपूर्ण है कि भारत जैसे देश, दुनिया का नेतृत्व करें और दुनिया को दिखा दें कि वे क्या कर सकते हैं और जैसा कि उन्होंने पहले किया है। ये दिखाता हैं कि इस बीमारी को रोकने के लिए आक्रामक, निरंतर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्रवाई हो सकती है और इस महामारी के परिणाम पर गहरा प्रभाव डाला जा सकता है।" उन्होंने बताया कि निशाना बनाकर किए गए हस्तक्षेप से स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी कोरोना पॉजिटिव रोगियों से संपर्क साधने पर ध्यान केंद्रित किया और सोशल डिस्टेंसिंग को स्वीकार किया और अब लॉकडाउन लागू किया, जिससे संक्रमण की संभावना कम हो गई है।

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पोलिया, चेचक और कोरोना अलग-अलग

वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेष सचिव अरुण सिंघल का कहना है कि अतीत में चेचक और पोलियो के लिए हमारा  प्रयास सफलतापूर्वक रहा था। कोरोना वायरस से हम साथ मिलकर लड़ सकते हैं हालांकि हमें एक वैक्सीन की जरूरत होगी। इसके साथ ही जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पोलियो, चेचक और कोरोना तीनों बीमारियां अलग-अलग हैं, और सरकार निश्चित रूप से वर्तमान महामारी का मुकाबला करने में अपने कुछ अनुभव का उपयोग कर सकती है।

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समय-समय पर कोरोना दिखाएगा घातक चेहरा

जैसा कि वैज्ञानिक पहले ही संकेत दे चुके हैं कि आने वाले तीन से चार वर्षों में यह एक स्थानीय रोग बन सकता है, जिसके कारण अब ये लगने लगा है कि कोरोना अचानक गायब नहीं हो सकता है और भले ही हम आने वाले दो से तीन महीने में कोरोना के प्रकोप को नियंत्रित करने में सक्षम हों जाएं लेकिन यह समय-समय पर अपना घातक चेहरा दिखा सकता है।

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पहले थी ये चुनौतियां 

जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ उन दिनों को याद करते हैं जब पोलियो और चेचक के प्रकोप के दौरान भारत ने एक टीका विकसित किया था और उस वक्त चुनौती ये थी कि कैसे इतनी बड़ी आबादी में मुख्य रूप से जन्मे बच्चों से लेकर 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रतिरोधक क्षमता प्रदान की जाए। उस वक्त ऩ सभी बच्चों पर ध्यान दिया गया, जो हाल ही में पैदा हुए थे। इसके साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाने के लिए मशहूर हस्तियों और विज्ञापन के द्वारा जागरूकता अभियान ने भी सरकार की बड़ी मदद की।

कब-कब हुई थी ये बीमारियां

1974 में  भारत में फैली चेचक महामारी 20 वीं सदी की सबसे खराब महामारी में से एक थी। जनवरी और मई 1974 के बीच इस बीमारी से 15,000 से अधिक लोग शिकार हुए और उनकी मौत हुई। अधिकांश मौतें बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में हुईं थीं। भारत में चेचक के 61,482 मामलों की सूचना मिली, जो कि 1974 में दुनिया के चेचक के 86% मामलों में शामिल थे। 

आधिकारिक तौर पर 1975 तक, देश ने इस बीमारी को  सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया। इसी तरह ग्लोबल पोलियो उन्मूलन पहल के अनुसार, 2009 में, भारत ने पोलियो के 741मामले दर्ज किए, जो कि दूसरे देशों के मुकाबले सबसे अधिक थे। लेकिन 27 मार्च 2014 को, डब्ल्यूएचओ ने भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित किया, क्योंकि पांच साल तक देश में पोलियो का कोई और मामले सामने नहीं आया था।

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