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शिशु की आंखों की अच्छी देखभाल के लिए फॉलो करें ये 3 टिप्स, आंखें रहेंगी स्वस्थ

Babies Eyesight In Hindi:शिशु की आंखों की आंखों में संक्रमण का अधिक जोखिम होता है इसलिए उनकी आंखों की उचित देखभाल करना महत्वपूर्ण हैं। जानें कुछ टिप्स

Vineet Kumar
Written by: Vineet KumarPublished at: May 16, 2022Updated at: May 16, 2022
शिशु की आंखों की अच्छी देखभाल के लिए फॉलो करें ये 3 टिप्स, आंखें रहेंगी स्वस्थ

जब शिशु जन्म लेता है तो इसके साथ माता-पिता की जिम्मेदारियां बहुत बढ़ जाती हैं। छोटे बच्चों की देखभाल करना कोई आसान काम नहीं है। उनके खान-खान पान से लेकर उनकी शारीरिक देखभाल तक पेरेंट्स को उनकी बहुत ज्यादा देखभाल करने की आवश्यकता होती है। जिस तरह शिशु के शरीर के अन्य अंगों को बहुत अधिक देखभाल की जरूरत होती है उसी तरह उनकी आंखों का ख्याल रखना भी महत्वपूर्ण है। जब शिशु पहली बार अपनी आंखें खोलता है और दुनिया को देखता है तो आपको उसकी आंखें स्वस्थ लग सकती हैं, लेकिन अक्सर नवजात शिशुओं की आंखों में कई तरह की समस्याएं देखने को मिलती हैं आंखों में चिपचिपापन, पीलापन या शिशु की आंखें लाल होना ऐसी ही कुछ आम समस्याएं हैं। यहां तक कि हम खुद भी ऐसी कई गलतियां करते हैं जिनसे उनकी आंखों को नुकसान पहुंचता है।

अब सवाल यह है कि आप शिशु की आंखों की देखभाल कैसे कर सकते हैं (How To Take Care Of Babies Eyesight In Hindi)? इस लेख में हम बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सांची रस्तोगी से जानेंगे शिशु की आंखों की देखभाल के लिए कुछ आसान टिप्स (Tips To Take Care Of Babies Eyes In Hindi)।

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बच्चे की आंखों की देखभाल कैसे करें? (How To Take Care Of Babies Eyes In Hindi)

1. शिशु की आंखों को रोजाना साफ करें 

छोटे बच्चों की आंखों की रोजाना सफाई करना महत्वपूर्ण है। क्योंकि बड़ों की तरह ही छोटे बच्चों की आंखें भी में गंदगी चली जाती है। जो उनकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है। आप शिशु की आंखों की सफाई के लिए ठंडे या गुनगुने, या उबले हुए पानी लें और उसमें साफ रूई डुबोएं। इससे शिशु की आंखे के अंदरूनी से लेकर बाहरी हिस्से तक अच्छी तरह और सावधानीपूर्वक सफाई करें। ध्यान रखें की सफाई के दौरान आप रूई को बाहर से अंदर की ओर न ले जाएं, क्योंकि इससे शिशु की आंख में संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। आपको दिन में कम से कम 1-2 बार शिशु की आंखों की सफाई जरूर करनी चाहिए।

 
 
 
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2. बच्चे की आंखों में काजल न लगाएं

आपने अक्सर लोगों को छोटे बच्चों की आंखों में काजल लगाते देखा होगा। लेकिन हम में से अधिकांश लोग यह नहीं जानते हैं कि बच्चों की आंखों में काजल लगाने से कई दुष्प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। साथ ही काजल के कण शिशु की आंख के पास स्थित अवरुद्ध आंसू वाहिनी (Blocked Tear Duct) के छोटे-छोटे छिद्रों को ब्लॉक कर सकते हैं। इससे ब्लॉक नासोलैक्रिमल डक्ट (Nasolacrimal Duct) हो सकता है जिससे शिशु की आंख में पानी या चिपचिपापन आ सकता है।

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3. अवरुद्ध आंसू वाहिनी (Blocked Tear Duct) की मालिश करें

शिशु की आंखों को स्वस्थ रखने के लिए आपको उसकी अवरुद्ध आंसू वाहिनी (Blocked Tear Duct) की मालिश करनी चाहिए। अगर आपके शिशु की आंसू वाहिनी ब्लॉक है तो आप नासोलैक्रिमल वाहिनी (Nasolacrimal Duct) की क्रिगलर मालिश कर सकते हैं। इससे शिशु की आंखों को लाभ मिलेगा।

आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए

डॉ. सांची के अनुसार अगर आप शिशु की आंखों में आंखों में चिपचिपा पदार्थ या पीलापन, आंखों की लाली, सूजन या आंख के कोने में गांठ जैसे समस्याएं नोटिस करते हैं तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। किसी भी तरह के नुस्खों को आजमाने से बचें क्योंकि इससे बच्चे की आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।

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क्या शिशु की आंखों में आई ड्रॉप डाल सकते हैं?

डॉ. सांची के अनुसार अगर शिशु की आंख या वाहिनी संक्रमित हो जाती है, तो आपको डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही शिशु की आंखों में एंटीबायोटिक मरहम या ड्रॉप डालनी चाहिए। आमतौर पर आंखों से संक्रमण साफ होने में 3-5 दिन लगते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के ड्रॉप्स या मरहम का प्रयोग न करें।

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