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दिवाली पर पटाखों के प्रदूषण से फेफड़ों को बचाने के लिए अपनाएं ये 6 तरीके, अस्थमा रोगी जरूर दें ध्यान

द‍िवाली पर पटाखों के प्रदूषण से फेफड़ों को बचाने के लि‍ए इन 6 ट‍िप्‍स को जरूर फॉलो करें 

Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurUpdated at: Oct 21, 2022 16:33 IST
दिवाली पर पटाखों के प्रदूषण से फेफड़ों को बचाने के लिए अपनाएं ये 6 तरीके, अस्थमा रोगी जरूर दें ध्यान

द‍िवाली खुश‍ियों को त्‍यौहार है, लोग पटाखे व द‍िए जलाकर त्‍यौहार मनाते हैं, पर इन पटाखों के ज्‍यादा प्रयोग से अस्‍थमा और सांस की बीमारियों से पीड़‍ित लोगों को परेशानी भी होती है। वहीं आम लोग भी पटाखों के ज्‍यादा इस्‍तेमाल से बीमार पड़ सकते हैं। अस्‍थमा रोग‍ियों की मदद करने के ल‍िए आपको अपने घर के आसपास या अन्‍य जगहों पर एयर क्‍वॉल‍िटी को बरकरार रखना चाह‍िए ज‍िससे फेफड़े के जुड़े रोगों से बचा सकता है। एयर क्‍वॉल‍िटी को बरकरार रखने के ल‍िए हमें पटाखों के इस्‍तेमाल को कम करना चाह‍िए। इस लेख में हम द‍िवाली के दौरान फेफड़ों को हेल्‍दी रखने के आसान ट‍िप्‍स पर चर्चा करेंगे। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के केयर इंस्‍टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज की एमडी फ‍िजिश‍ियन डॉ सीमा यादव से बात की।

fire cracker

(image source:google)

द‍िवाली पर पटाखों के कारण होती हैं कई बीमार‍ियां (Fire crackers causes diseases)

दिवाली पर पटाखों का धुआं बढ़ने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है, खांसी आ सकती है, अस्‍थमा रोग‍ियों को अटैक आ सकता है इसल‍िए आपको खास खयाल रखने की जरूरत है इसल‍िए अलावा चेस्‍ट में पेन भी हो सकता है। पटाखों में पीएम 2.5, पीएम 10, सल्‍फर डायऑक्‍साई, कॉर्बन मोनोऑक्‍साइड पाया जाता है। जब ये केमि‍कल हमारी इम्‍यून‍िटी के साथ म‍िक्‍स हो जाते हैं तब फेफड़ों में समस्‍या हो सकती है। ये समस्‍या छोटे समय या लंबे अंतराल के ल‍िए भी हो सकती है। पटाखों के धुएं का बुरा असर बच्‍चे, बूढ़े, कॉर्ड‍िवस्‍कुलर ड‍िसीज से गुजर रहे लोग या फेफड़े के मरीजो को हो सकती है।

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1. द‍िवाली पर अस्‍थमा रोगी नेबुलाइजर की मदद लें (Use nebulizer for asthma patients) 

using nebulizer

(image source:herstpp.com)

द‍िवाली के समय अस्‍थमा रोग‍ियों को अपनी दवा और जरूरी सामान का किट बनाकर रखना चाह‍िए। इस समय धुंए के कारण सांस की समस्‍याएं बढ़ जाती हैं। घर में कोई अस्‍थमा के मरीज हैं तो उनके ल‍िए नेबुलाइजर तैयार रखें। ये एक उपकरण है ज‍िसके जर‍िए दवा को फेफड़ों तक पहुंचाया जाता है। नेबुलाइजर लि‍क्‍व‍िड दवा को वेपर फॉर्म में बदलता है। ये दो तरह का होता है पोर्टेबल और होम नेबुलाइजर। आप अपनी सुव‍िधा अनुसार इन्‍हें चुन सकते हैं, बेहतर क्‍वॅाल‍िटी में जेट या अल्‍ट्रासोन‍िक नेबुलाइजर भी म‍िलते हैं। ब्रोनकाइट‍िस, अस्‍थमा, क्रॉन‍िक हार्ट ड‍िसीज के मरीज हैं तो आपके पास नेबुलाइजर जरूर होना चाह‍िए।

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2. द‍िवाली पर मास्‍क लगाने के फायदे (Benefits of wearing mask on diwali)

पटाखों में एल्‍यूम‍िन‍ियम, बैर‍ियम, कॉपर, स्‍ट्रोनट‍ियम, लेड आद‍ि हानिकारक तत्‍व गनपाउडर के साथ म‍िलाए जाते हैं, इन्‍हें जलाने पर तेज धुंआ न‍िकलता है ज‍िससे फेफड़े में दूष‍ित हवा भर जाती है। इस समस्‍या से बचने के ल‍िए आपको मास्‍क लगाकर ही द‍िवाली मनानी चाह‍िए। मास्‍क लगाने से आप अपनी और दूसरों की सेफ्टी भी सुन‍िश्‍च‍ित कर सकते हैं क्‍योंक‍ि अभी कोव‍िड का खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। मास्‍क लगाने के फायदे हमें कोव‍िड के बाद बेहतर तरीके से पता चले। फेफड़ों को हेल्‍दी रखने के ल‍िए और कोव‍िड व सांस से जुड़ी बीमार‍ियों से बचने के लिए आप द‍िवाली पर मास्‍क जरूर लगाएं। आप एन95 या एन99 मास्‍क लगा सकते हैं।

3. घर के अंदर द‍िए और मोमबत्‍ती न जलाएं (Avoid candles and diyas indoor)

diya

(image source:google) 

आपके घर में कोई अस्‍थमा रोगी है या सांस से जुड़ी समस्‍या के श‍िकार हैं तो घर के अंदर द‍िए और मोमबत्‍त‍ियां जलाने से बचें। आपको एलईडी लाइट का इस्‍तेमाल करना चाह‍िए। आपको कोशि‍श करना है क‍ि द‍िवाली पर ज्‍यादा से ज्‍यादा समय घर के अंदर रहकर ब‍िताएं। आपको द‍िवाली के समय ख‍िड़की और दरवाजों को बंद ही रखना चाह‍िए ज‍िससे पॉल्‍यूटेंट्स घर के अंदर न आ जाएं। आपको इस बात का भी ध्‍यान रखना है क‍ि पटाखे घर के पास न जलाएं, इससे फेफड़ों में धुआं चला जाएगा और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा आप द‍िवाली पर हेल्‍दी और हाईजीन‍िक खाना खाएं और एक्‍सरसाइज को न छोड़ें।

4. एयर प्‍यूर‍िफायर का इस्‍तेमाल (Use air purifier)

इसके साथ ही घर में एयर प्‍यूर‍िफायर लगाना भी फायदेमंद होता है। एयर प्‍यूर‍िफायर के फायदों की बात करें तो प्‍यूर‍िफायर के इस्‍तेमाल से एलर्जी वाले तत्‍व, पॉल्‍यूटेंट्स आद‍ि घर के बाहर न‍िकल जाते हैं क्‍योंक‍ि प्‍यूर‍िफायर हवा को फ‍िल्‍टर करता है। अगर आपको सर्दी-जुकाम, बुखार, सांस लेने में तकलीफ हो तो ये संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं, इन्‍हें नजरअंदाज न करें और इलाज करवाएं। आप घर की हवा को शुद्ध करने के ल‍िए स्‍पाइडर प्‍लांट्स, एलोवेरा, मनी प्‍लांट, आद‍ि लगा सकते हैं, ये एंटी-पॉल्‍यूशन पौधे होते हैं। 

5. एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स की मात्रा बढ़ाएं (Increase anti-oxydents in diet)

आपको अपनी डाइट में एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स की मात्रा भी बढ़ानी चाह‍िए ताक‍ि आपके फेफड़े मजबूत रह सकें। आप व‍िटाम‍िन सी र‍िच फूड्स जैसे टमाटर, आंवला, नींबू का सेवन कर सकते हैं। व‍िटाम‍िन ई, व‍िटाम‍िन डी, ओमेगा 3 आद‍ि में भी पॉल्‍यूटेंट्स के अर को कम करने की क्षमता होती है। इन एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स का सेवन करने से ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस कम होता है। अगर आपके घर में कोई बच्‍चा है ज‍िसे अस्‍थमा है तो उसका खास खयाल रखें और बच्‍चे को बाहर भेजने से बचें, ऐसे बच्‍चों को पटाखों का धुआं जल्‍दी नुकसान करता है इसल‍िए आप द‍िवाली पर अस्‍थमा पीड़ित बच्‍चों को पटाखों के शोर से दूर रखें।

6. द‍िवाली पर शरीर में ऑक्‍सीजन की मात्रा कैसे बढ़ाएं? (How to increase oxygen level in body)

jaggery eating

(image source:healthydiet)

अगर आप रोजाना गुड़ का सेवन करें तो शरीर में ऑक्‍सीजन की मात्रा बढ़ सकती है ज‍िससे आपके फेफड़े हेल्‍दी रहेंगे और सांस से जुड़ी श‍िकायतें नहीं होंगी। वैसे तो गुड़ के कई फायदे होते हैं पर फेफड़ों को हेल्‍दी रखने की बात करें तो गुड़ में आयरन की अच्‍छी मात्रा होती है, आयरन का सेवन करने से ब्‍लड में हीमोग्‍लोब‍िन की मात्रा बढ़ती है और हीमोग्‍लोबि‍न बढ़ने से ऑक्‍सीजन की मात्रा शरीर में बढ़ती है। आप द‍िवाली की म‍िठाइयों में चीनी की जगह गुड़ का इस्‍तेमाल करें तो फेफड़े भी स्‍वस्‍थ रहेंगे और सेहत भी नहीं ब‍िगड़ेगी।

अगर क‍िसी व्‍यक्‍त‍ि को लगातर खांसी आ रही है या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्‍टर के पास लेकर जाएं और ईको फ्रैंडली द‍िवाली मनाने के लि‍ए लोगों को प्रेर‍ित करें। आप द‍िवाली से पहले अपने एर‍िया में मौजूद पल्‍मोनोलॉज‍िस्‍ट के संपर्क में रहें।

(main image source:mycity4kids.com)

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