बच्चों पर कैसे और कितना असर करता है कोरोना वायरस? जानें वैज्ञानिकों ने अब तक क्या पता लगाया है

बच्चों पर कोरोना वायरस का असर बूढ़ों और बड़ों से कम देखा गया है। मगर वैज्ञानिक क्यों कह रहे हैं कि बच्चे कोरोना वायरस के "साइलेंट कैरियर" हो सकते हैं।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Mar 24, 2020
बच्चों पर कैसे और कितना असर करता है कोरोना वायरस? जानें वैज्ञानिकों ने अब तक क्या पता लगाया है

कोरोना वायरस के बढ़ते कहर को लेकर ज्यादातर लोग अपने बच्चों और घर के बूढ़ों को लेकर चिंतित हैं। अगर दुनियाभर के आंकड़ों को देखें, तो वाकई ये वायरस हर उम्र और हर व्यक्ति के लिए चिंता की बात है। कोरोना वायरस ने दुनियाभर में तबाही मचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 24 मार्च की सुबह तक ये वायरस 334,981 लोगों को अपना शिकार बना चुका है। इनमें से 14,652 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में कोरोना वायरस की चपेट में आने वालों की संख्या 492 तक पहुंच रही है, जबकि मरने वालों का आंकड़ा 9 हो चुका है। ऐसी स्थिति में डर से ज्यादा सावधानी की जरूरत है। दुनियाभर के एक्सरपर्ट्स मानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति जरूरी सावधानी बरते, तो ये वायरस उस तक पहुंचकर भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है।

बच्चों में कोरोना वायरस का असर कितना?

शुरुआती दिनों में जो डाटा चीन और दुनिया के दूसरे हिस्सों में मिले वो यही बताते थे कि कोरोना वायरस के कारण बूढ़े और पहले से गंभीर बीमारियों के शिकार व्यक्ति को ही सबसे ज्यादा खतरा होता है। मगर बाद के दिनों में जैसे-जैसे इस वायरस ने चीन की सरहदें पार की और इटली, स्पेन, अमेरिका, ईरान और फ्रांस जैसे देशों में पहुंचा, तो इससे बड़ी संख्या में युवा और नई उम्र के लोग भी प्रभावित हुए। इनमें से बहुत सारे युवाओं को तो गंभीर लक्षणों के कारण सीरियस कंडीशन में अस्पताल में भी भर्ती करना पड़ा।

मगर अभी तक एक चीज जो वैज्ञानिकों ने नोट की है, वो ये है कि- कोरोना वायरस के कारण बच्चों में क्रिटिकल कंडीशन के मामले कम देखे गए हैं।

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बच्चों पर कैसा होता है कोरोना वायरस का असर?

मॉलिक्यूलर वायरोलॉजी के प्रोफेसर जॉन बॉल बताते हैं, "मैं और मेरे तमाम साथियों को इस बात पर हैरानी हुई कि कोरोना वायरस बच्चों पर कम असर क्यों करता है। जबकि हमारे वैज्ञानिक ज्ञान के अनुसार कोरोना वायरस रेस्पिरेटरी सिस्टम (श्वसन तंत्र) का इंफेक्शन है, जो कि कुछ ऐसी बात नहीं है कि बच्चों में अलग और बड़ों में अलग पाया जाता हो।"

हाल में ही American Academy of Pediatrics के द्वारा प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, चीन में 16 जनवरी से लेकर 8 फरवरी के बीच 2143 बच्चों में कोरोना वायरस कंफर्म या फिर संदिग्ध रूप से पाया गया। इन सभी बच्चों की रिपोर्ट चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन में दर्ज करवाई गई। इनमें से 90% बच्चों में या तो कोई भी लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे, या बेहद सामान्य लक्षण (जैसे- बुखार, थकान, शरीर में दर्द, खांसी, नाक बहना, छींक आना आदि) दिखाई दे रहे थे। लेकिन वैज्ञानिकों के लिए हैरानी की बात थी कि ये 90% बच्चे बिना किसी गंभीर खतरे के जल्द ही ठीक कर लिए गए।

कोरोना वायरस बच्चों के लिए कितना खतरनाक?

ऊपर लिखी हुई बातें पढ़कर कुछ लोग कंफ्यूज होकर ये सोच सकते हैं कि कोरोना वायरस उनके बच्चों को असर नहीं करेगा। मगर हम आपको यहां यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि ऐसा किसी भी वैज्ञानिक ने या शोध ने नहीं कहा है कि कोरोना वायरस बच्चों पर नहीं असर करेगा। बल्कि प्रोफेसर जॉन बॉल और दूसरे वैज्ञानिक ये बात कह रहे हैं कि, "कोरोना वायरस के कारण बच्चों में गंभीर रूप से बीमार होने के मामले कम दिखे हैं। इसका अर्थ यह है कि उन्हें सामान्य बुखार, जुकाम, खांसी जैसे तकलीफें हो सकती हैं, जबकि बूढ़ों और बड़ों में सांस लेने की तकलीफ बढ़ सकती है, जिससे कि उनकी जान को ज्यादा खतरा होता है।" ऐसी स्थिति में अगर बच्चे बीमार पड़ते हैं, तो भी उन्हें इलाज की जरूरत तो पड़ेगी ही। इसलिए बच्चों को कोरोना वायरस से बचाना बहुत जरूरी है।

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कोरोना वायरस को फैला सकते हैं बच्चे

वैज्ञानिकों के अनुसार बच्चों पर कोरोना वायरस के लक्षण गंभीर नहीं दिखाई देते, यही कारण है कि बच्चे कोरोना वायरस का सबसे घातक और बड़ा हथियार हो सकते हैं। दरअसल गंभीर लक्षणों के न दिखने के कारण बच्चे कोरोना वायरस के "साइलेंट कैरियर" हो सकते हैं। अब तक ज्ञात कोरोना वायरस के 85% मामलों में सामान्य खांसी, जुकाम और बुखार की समस्याएं देखी गई हैं। ऐसे में चिकित्सकों के लिए भी ये पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि कोई व्यक्ति कोरोना वायरस का शिकार है या सामान्य फ्लू और कोल्ड का। बच्चों के मामले में यही लक्षण दिखने पर वे इसे दूसरों में बहुत तेजी से फैला सकते हैं क्योंकि आमतौर पर बच्चे घर और बाहर सबसे ज्यादा लोगों के संपर्क में, सबसे नजदीक से आते हैं। बच्चों के कारण कोरोना वायरस के कम्यूनिटी स्प्रेड का खतरा काफी बढ़ सकता है। इसलिए बच्चों को वायरस से बचाने के लिए घर के अंदर ही रखें।

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