Fri Sep 11, 2026 | 07:31 PM IST

Medically Reviewed by Archana Jain , Nutritionist

'सर्कैडियन रिदम' डाइट क्या है? अपने शरीर की घड़ी के अनुसार कैसे खाएं

अक्सर लोगों को अच्छे स्वास्थ्य के लिए सर्कैडियन रिदम डाइट में सुधार करने में मदद मिलती है। ऐसे में सवाल उठता है कि अपने शरीर की घड़ी के अनुसार कैसे खाएं? आइए लेख में जानें -

What Is The Circadian Rhythm Diet In Hindi: आज के समय में ज्यादातर लोग वजन बढ़ने, नींद ना आने और ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने जैसी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या से परेशान रहते हैं। ऐसे में अक्सर लोगों को समय से नींद लेने और अपने खान-पान के समय में सुधार करने की सलाह दी जाती है। जिससे शरीर का बीमारियों से बचाव करने और स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है, लेकिन ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर 'सर्कैडियन रिदम' डाइट है क्या? और शरीर की घड़ी के अनुसार कैसे खाना चाहिए? ऐसे में आइए जयपुर में स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन (Archana Jain, Dietitian and Nutritionist, Director, Angelcare-A Nutrition and Wellness Center, Jaipur) से जानें सर्कैडियन रिदम डाइट क्या है? और शरीर की घड़ी के अनुसार कैसे खाएं?

सर्कैडियन रिदम डाइट क्या है?

डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, "सर्कडियन रिदम डाइट आपके शरीर की अंदरूनी 24 घंटे की घड़ी पर आधारित खाने का एक तरीका है, जिसे सर्कडियन रिदम भी कहा जाता है। यह बायोलॉजिकल घड़ी नींद, हार्मोन रिलीज, मेटाबॉलिज्म, डाइजेशन और शरीर के एनर्जी लेवल को कंट्रोल करती है।"

डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन आगे कहती हैं कि, "सर्कडियन रिदम डाइट मुख्य रूप से ब्रेन में एक “मास्टर क्लॉक” कंट्रोल करती है, जो रोशनी और अंधेरे पर रिस्पॉन्ड करती है।"

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नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अध्ययन के अनुसार, शरीर की आंतरिक घड़ी (Circadian Rhythm) के विपरीत समय पर खाना जैसे रात के समय में मोटापा, ब्लड शुगर और हार्ट की बीमारियों का कारण बनता है। सही समय पर खाना खाने से स्वास्थ्य में सुधार के लिए एक प्रभावी तरीका है।

what is the circadian rhythm diet and how to eat according to body clock in hindi

बॉडी क्लॉक मेटाबॉलिज्म पर कैसे असर डालती है?

डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन आगे बताती हैं कि, "सुबह के समय शरीर में इंसुलिन सेंसिटिविटी ज्यादा होती है। इस दौरान आपका शरीर कार्बोहाइड्रेट को ज्यादा अच्छे से प्रोसेस करता है। वहीं, दोपहर के समय पाचन शक्ति और मेटाबॉलिक रेट सबसे ज्यादा होता है और रात के समय शरीर रिपेयर मोड में चला जाता है, ग्रोथ हार्मोन रिलीज करता है।"

डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना कहती हैं कि, "ऐसे में देर रात खाना खाने से शरीर के रिपेयर की ये नेचुरल प्रक्रिया रुक जाती है और शरीर की ग्लूकोज टॉलरेंस के कम होने के कारण शरीर में फैट जमा होने लगता है और नींद से जुड़ी परेशानियां होने, ब्लड शुगर, मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।"

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सर्कैडियन रिदम डाइट में सुधार कैसे करें?

सर्कैडियन रिदम डाइट में सुधार करने के लिए अपनी आदतों में सुधार करें, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचाव करने में मदद मिल सकती है।

8-12 घंटे के समय में खाएं

सर्कैडियन रिदम डाइट में सुधार करने के लिए सुबह 7:30 से शाम 6:30 बजे तक ही खाने की कोशिश करें। ऐसा करने से शरीर की रिदम में सुधार आता है।

दिन में समय से खाएं

कैलोरीज से युक्त खाना जल्दी खाने से शरीर की नेचुरल इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है। ऐसे में सुबह के नाश्ते और लंच में प्रोटीन से भरपूर बैलेंस डाइट लें। वहीं, रात के समय हल्का खाना खाएं, जिससे नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में भी मदद मिलती है।

नेचुरल लाइट में रहें

सुबह की धूप आपकी सर्कैडियन रिदम में सुधार करती और नींद की क्वालिटी में भी सुधार होता है। इसके अलावा, रात के समय सोने से 1-2 घंटे पहले स्क्रीन के इस्तेमाल से बचें।

निष्कर्ष

सर्कैडियन रिदम डाइट में सुधार करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इससे शरीर की बीमारियों से बचाव करने और स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। इसके लिए दिन के 8 से 12 घंटों के बीच खाएं। ध्यान रहे, स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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Priyanka Sharma

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Sub Editor

प्रियंका शर्मा हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की है। फिलहाल प्रियंका जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में बतौर सब एडिटर काम कर रही हैं। प्रियंका को स्वास्थ्य, पोषण, स्किन केयर और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म की है। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Mar 04, 2026 22:07 IST

    Modified By : Priyanka Sharma
  • Mar 04, 2026 22:07 IST

    Published By : Priyanka Sharma
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