Fri Sep 11, 2026 | 08:18 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

सहरी में कुछ न खाना पड़ सकता है भारी, जानें खाली पेट रोजा रखने के 5 बड़े नुकसान

रमजान में सुबह-सुबह दुबा पढ़कर सहरी में रोजा रखने से पहले खाने की परंपरा है। सहरी छोड़कर खाली पेट रोजा रखना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे कमजोरी, डिहाइड्रेशन, लो ब्लड शुगर और पाचन समस्याएं बढ़ सकती हैं। जानें रोजदारों के ल‍िए सहरी न करने के 5 बड़े नुकसान।

रोजदारों के ल‍िए रजमान का मुबार‍िक महीना शुरू हो चुका है। रमजान का महीना आस्था और संयम का प्रतीक है। इस दौरान रोजा रखने वाले लोग सुबह सहरी से लेकर शाम इफ्तार तक बिना कुछ खाए-पिए रहते हैं, लेकिन कई बार नींद, व्यस्त दिनचर्या या भूख न लगने के कारण लोग सहरी छोड़ देते हैं और खाली पेट ही रोजा रख लेते हैं। इस आदत से सेहत पर गहरा असर पड़ सकता है। सहरी केवल एक भोजन नहीं है, बल्कि यह पूरे दिन शरीर को ऊर्जा देने का मुख्य स्रोत होती है। जब आप सहरी नहीं करते, तो शरीर को लंबे समय तक बिना पोषण के काम करना पड़ता है। इससे कमजोरी, चक्कर, डिहाइड्रेशन और पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि सहरी में संतुलित और हल्का भोजन करना जरूरी है, ताकि शरीर पूरे दिन स्वस्थ और सक्रिय रह सके। अगर आप भी सहरी छोड़ने की आदत रखते हैं, तो इसके नुकसान जानना जरूरी है क्योंकि यह छोटी सी गलती आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है।

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1. कमजोरी और थकान बढ़ सकती है

सहरी शरीर को दिनभर काम करने के लिए जरूरी एनर्जी देती है। Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow ने बताया क‍ि जब आप उपवास या रोजा से पहले कुछ नहीं खाते हैं, तो शरीर को ग्लूकोज नहीं मिलता और एनर्जी लेवल तेजी से गिरने लगता है। इससे दिनभर थकान, कमजोरी और काम करने में मुश्‍क‍िल हो सकती है।

2. डिहाइड्रेशन का खतरा

सहरी में पानी और तरल पदार्थ लेने से शरीर हाइड्रेट रहता है, लेकिन सहरी छोड़ने पर शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है। इससे सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी की समस्या हो सकती है, खासकर गर्म मौसम में।

3. ब्लड शुगर लेवल अचानक गिर सकता है

लंबे समय तक बिना खाए रहने से ब्लड शुगर लेवल कम हो सकता है। इससे चक्कर आना, कमजोरी, घबराहट और एकाग्रता बढ़ाने में मुश्‍क‍िल हो सकती है। डायबिटीज या लो ब्लड शुगर वाले लोगों के लिए यह स्थिति ज्यादा खतरनाक हो सकती है।

4. पाचन तंत्र पर बुरा असर होता है

सहरी न करने से पेट लंबे समय तक खाली रहता है, जिससे गैस, एसिडिटी और पेट दर्द की समस्या हो सकती है। खाली पेट एसिड बनने से पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है और इफ्तार के बाद भारीपन महसूस हो सकता है।

5. मांसपेशियों और मेटाबॉलिज्म पर असर

अगर शरीर को खाना कम मिलता है, तो वह अपनी मांसपेशियों को तोड़कर उनसे एनर्जी लेता है, जिससे शरीर कमजोर हो सकता है। इससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है और शरीर कमजोर हो सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर शरीर की ताकत कम हो सकती है।

रोजदारों के ल‍िए सुबह कुछ खाना क्यों जरूरी है?

  • सुबह खाने से पूरे द‍िन शरीर को एनर्जी म‍िलती है।
  • डिहाइड्रेशन से बचाव होता है।
  • ब्लड शुगर संतुलित रहता है।
  • पाचन को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है।

सहरी में प्रोटीन, फाइबर और पानी से भरपूर चीजें जैसे दही, दलिया, फल, अंडा और सूखे मेवे लेना फायदेमंद होता है।

निष्कर्ष:

सहरी छोड़ना आसान लग सकता है, लेकिन यह आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सहरी शरीर को पूरे दिन स्वस्थ और एनर्जेट‍िक बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। इसलिए रोजा रखते समय सहरी जरूर करें और संतुलित आहार लें, ताकि आप रमजान के दौरान स्वस्थ और एक्‍ट‍िव रह सकें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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