Tue Oct 27, 2026 | 09:06 PM IST

Medically Reviewed by Dt Divya Gandhi , Therapeutic Diet (Diabetes & PCOD)

Karwa Chauth: डायबिटीज में निर्जला व्रत करना सही है या नहीं? मानें एक्सपर्ट की सलाह

डायबिटीज में करवा चौथ का निर्जला व्रत करना सही नहीं है। इस दौरान शरीर में पानी की काफी ज्यादा कमी हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। अगर फिर भी डायबिटीज से पीड़ित महिला को करवा चौथ का व्रत करना है, तो इस बारे में एक्सपर्ट की सलाह लेना आवश्यक है।
Karwa Chauth: डायबिटीज में निर्जला व्रत करना सही है या नहीं? मानें एक्सपर्ट की सलाह
Karwa Chauth: डायबिटीज में निर्जला व्रत करना सही है या नहीं? मानें एक्सपर्ट की सलाह

दो दिनों बाद करवा चौथ व्रत है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं और उनके सफल जीवन की मनोकामना करती हैं। यहां तक कि जिन महिलाओं को डायबिटीज है, वे भी करवा चौथ का यह निर्जला व्रत रखने से पीछे नहीं हटती हैं। हालांकि, यह सवाल जरूर उठता है कि क्या वाकई डायबिटीज में निर्जला व्रत किया जाना सही होता है? आखिर इसका उनकी सेहत पर क्या असर पड़ता है?

इस बारे में Delhi स्थित Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी स्पष्ट करती हैं, "डायबिटीज में महिलाओं के लिए निर्जला व्रत करना सुरक्षित नहीं होता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि करवा चौथ के व्रत में लंबे समय तक महिला पानी नहीं पीती हैं। शरीर में पानी की कमी के कारण ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बदल सकता है, जो कि डायबिटीज के मरीज के लिए बिल्कुल सही नहीं है।"

डायबिटीज रोगियों के लिए निर्जला व्रत करने के नुकसान

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शरीर में पानी की कमी

न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी कहती हैं, "निर्जला व्रत करने का सबसे बड़ा जोखिम यही होता है कि महिला के शरीर में पानी की काफी कमी हो जाती है। डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर को संतुलित बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी होता है। ऐसा न करने पर हाइपरग्लाइसीमिया का जोखिम बढ़ जाता है।"

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का जोखिम

न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी के अनुसार, "यह मधुमेह की एक गंभीर और जानलेवा इमरजेंसी की स्थिति है। यह आमतौर पर टाइप 1 डायबिटीज में होती है। असल में, डायबिटीज में निर्जला व्रत करने से शरीर में डिहाइड्रेशन के साथ-साथ मेटाबोलिक स्ट्रेस भी बढ़ जाता है।"

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दवाओं के प्रभाव पर असर

डायबिटीज में कई ऐसी दवाएं दी जाती हैं, जिससे मरीज को बार-बार पेशाब करने की अर्ज होती है। दरअसल, कुछ दवाएं अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के रास्ते बाहर निकालती हैं, जिससे निर्जला व्रत रखने से डिहाइड्रेशन का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है। ऐसे में शरीर में कमजोरी और थकान भी बढ़ सकती है और दवाएं भी सही तरह से असर नहीं कर पाती हैं।

इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस

डायबिटीज के मरीजों को पहले से ही किडनी से जुड़ी बीमारी का जोखिम अधिक होता है। ऐसे में शरीर में तरल पदार्थ की कमी के कारण किडनी फंक्शन प्रभावित हो सकता है। यहां तक कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स में खतरनाक असंतुलन का कारण बन सकता है।

ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव

करवा चौथ में निर्जला व्रत करने के कारण कई महिलाएं दवा लेने से बचती हैं। ऐसे में उन्हें गंभीर रूप से हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड शुगर का खतरनाक स्तर तक कम होना) और अत्यधिक हाइपरग्लाइसीमिया (ब्लड शुगर का बहुत अधिक बढ़ जाना) दोनों का ही रिस्क बढ़ जाता है।

व्रत के दौरान ब्लड शुगर लेवल को कैसे नियंत्रित रखें

वैसे तो डायबिटीज में निर्जला व्रत रखने की सलाह नहीं दी जाती है। हां, अगर आपने व्रत करने का फैसला किया है, तो अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए सरगी में पोषक तत्वों से भरपूर चीजों का सेवन करें ताकि दिन भर में ब्लड शुगर में ज्यादा परिवर्तन न हो। इसके अलावा, दिन भर बहुत ज्यादा कामकाज न करें, जिससे थकान महसूस हो और अपने ब्लड शुगर पर नजर रखें।

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क्या डायबिटीज में निर्जला व्रत करना सुरक्षित है?

The International Diabetes Federation के अनुसार, लोग कई तरह की फास्टिंग करते हैं। कुछ लोग फलाहार लेते हैं, तो कुछ लोग खाने-पीने की सभी चीजों से दूर रहते हैं। डायबिटीज के मरीज को फास्टिंग किस तरह प्रभावित करेगी, यह उसके स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। इसमें आगे बताया गया है कि कई बार फास्टिंग इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार और वजन को संतुलित करने के लिए जानी जाती है। लेकिन जो लोग इंसुलिन या ग्लूकोज लोअरिंग मेडिकेशन पर निर्भर हैं, उनके लिए यह जानलेवा भी हो सकता है।

डायबिटीज के मरीजों को करवा चौथ का व्रत करना है या नहीं, इस संबंध में अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

व्रत खोलने के बाद खान-पान में बरतें ये सावधानियां

अगर डायबिटीज होने के बावजूद आपने अपने एक्सपर्ट की सलाह पर सावधानी पूर्वक करवा चौथ का व्रत कर लिया है, तो इसे तोड़ते वक्त भी सावधानी बरतना जरूरी है। व्रत खोलने के बाद खान-पान से जुड़ी इन बातों का ध्यान रखें-

  • व्रत तोड़ने के बाद एक बार अपना ब्लड शुगर माॅनिटर करें।
  • व्रत तोड़ने के बाद पर्याप्त मात्रा में और घूंट-घूंट लेकर पानी पिएं।
  • इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस के लिए नारियल पानी पी सकती हैं।
  • अगर मीठा खा रही हैं, तो सिर्फ एक निवाला ही लें।
  • अगर चक्कर आ रहे हैं या थकान महसूस हो रही है, तो डाॅक्टर से संपर्क करें।

एक्सपर्ट की सलाहः किन स्थितियों में व्रत न करें

डायबिटीज की सभी मरीजों को करवा चौथ का व्रत नहीं करना चाहिए। सवाल है, यह कैसे पता चलेगा कि आपको यह व्रत करना चाहिए या नहीं? इस बारे में एक्सपर्ट सलाह दे रहे हैं-

  • टाइप 1 डायबिटीज में निर्जला व्रत न करें।
  • ब्लड शुगर बार-बार बदलता है, तो भी व्रत न करें।
  • बार-बार हाइपोग्लाइसीमिया होने पर इससे दूर रहें।
  • इंसुलिन लेने वाली महिलाएं भी निर्जला व्रत करने से बचें।
  • अगर किसी महिला को जेस्टेशनल डायबिटीज है, तो भी यह व्रत न करें।

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निष्कर्ष

डायबिटीज में निर्जला व्रत करना है या नहीं, इस बारे में एक्सपर्ट की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है। कई बार आपकी सेहत यह तय करती है कि आप निर्जला व्रत कर सकते हैं या नहीं। अगर ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानी निरंतर बनी रहती है, तो बेहतर होगा कि स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अपने लिए सही निर्णय लें।

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FAQ

  • व्रत के दौरान अचानक कंपकंपी या पसीना आने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

    यह हाइपोग्लाइसीमिया का संकेत है। इस तरह की समस्या होने पर तुरंत 3-4 ग्लूकोज टैबलेट या आधा कप फलों का जूस पीएं। इससे तुरंत सेहत में सुधार होने लगेगा।
  • क्या उपवास के दिन सुबह की रूटीन इंसुलिन की खुराक में बदलाव करना पड़ता है?

    हां, बिना भोजन के इंसुलिन लेने से शुगर जानलेवा स्तर तक गिर सकती है। ऐसे में डॉक्टर इसकी डोज को कम या री-शेड्यूल करने की सलाह दे सकते हैं।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Oct 27, 2026 19:47 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Oct 27, 2026 19:47 IST

    Published By : Meera Tagore
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