कई लोग शरीर में थायराइड हार्मोन के असंतुलित होने की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसके कारण व्यक्ति को थायराइड की हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म जैसी स्थितियां होती हैं। इन स्थितियों से बचने और इस हार्मोन को बैलेंस रखने के लिए लोगों को लाइफस्टाइल में सुधार करने, हेल्दी डाइट लेने, हर्बल ड्रिंक्स पीने की सलाह दी जाती है। इन्हीं हर्बल में से एक है ग्रीन टी। ग्रीन टी को हेल्दी ड्रिंक के रूप में बहुत से लोग पीना पसंद करते हैं। लेकिन अगर थायराइड की हाइपोथायरॉइडिज्म या हाइपरथायरॉइडिज्म जैसी दोनों स्थितियों की बात की जाए तो क्या ग्रीन टी का सेवन किया जा सकता है? Ms Pravalika Londe, Senior Clinical Nutritionist, Aster CMI Hospital, Bangalore और जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन दोनों ही बताती हैं कि, ग्रीन टी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। ऐसे में ग्रीन टी का सेवन करना थायराइड में फायदेमंद हो सकता है।
थायराइड में ग्रीन टी सही है या नहीं?
Ms Pravalika Londe के अनुसार, “थायराइड की बात करें तो चाहे हाइपोथायरॉइडिज्म हो या हाइपरथायरॉइडिज्म, दोनों ही स्थितियों में ग्रीन टी का असर थोड़ा अलग-अलग हो सकता है और ये दोनों ही स्थिति में कुछ हद तक फायदेमंद हो सकती हैं। लेकिन इसका सेवन करते समय सावधानी रखना भी जरूरी हो जाता है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप इसे कितनी मात्रा में और किस समय ग्रीन टी पीते हैं। इसलिए इसे हमेशा सीमित मात्रा में और डॉक्टर की सलाह के साथ ही लेना बेहतर होता है।”
डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, “थायराइड की दोनों स्थिति में ग्रीन टी का सेवन किया जा सकता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने और फ्री रेडिकल्स से बचाव करने में मददगार होते हैं। लेकिन हेल्दी चीजों का सेवन भी सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।”
2010 में Food and Chemical Toxicology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन एंटी-थायराइड एजेंट की तरह काम कर सकता है। ऐसे में इसका अधिक सेवन करने से थायराइड के कार्यों पर बुरा असर पड़ सकता है।
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ग्रीन टी से मिलते हैं कई लाभ
Ms Pravalika Londe के अनुसार, “ग्रीन टी का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए कई तरीकों से फायदेमंद माना जाता है। ग्रीन टी में अच्छी मात्रा में पॉलीफेनॉल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जिन्हें कैटेचिन (EGCG) कहा जाता है। ये पोषक तत्व शरीर की सूजन को कम करने, फ्री रेडिकल्स को कम करने और सेल्स को समय से पहले खराब होने से बचाने में मदद करते हैं। इसके अलावा, ग्रीन टी ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में भी सहायक होती है।” Ms Pravalika Londe आगे बताती हैं कि, “ग्रीन टी शरीर के मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करती है और दिमाग और शरीर को एक्टिव रखने में मदद करती है।”
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हाइपोथायरायडिज्म में ग्रीन टी पीने के फायदे
Ms Pravalika Londe के अनुसार, “हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) की स्थिति में थायराइड हार्मोन कम बनते हैं, जिसके कारण थायराइड हार्मोन कम एक्टिव होता है। इस स्थिति में व्यक्ति को थकान बनी रहने, सुस्ती होने, वजन बढ़ने, स्किन के ड्राई होने, बालों के झड़ने, स्ट्रेस होने, कब्ज होने और ठंड लगने जैसी समस्याएं होती हैं। ग्रीन टी का सेवन करने से हाइपोथायरायडिज्म को कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।
- बढ़ता है हल्का मेटाबॉलिज्म
- शरीर के एनर्जी के स्तर में सुधार करने में सहायक
- ग्रीन टी से व्यक्ति थोड़ा फ्रेश, एक्टिव और अच्छा महसूस होता है
हालांकि जरूरी बात यह है कि हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति में ग्रीन टी का सेवन सीमित मात्रा में और डॉक्टर की सलाह के साथ करें।”
डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, “ग्रीन टी का सेवन करने से शरीर को एनर्जी देने और मेटाबॉलिज्म में सुधार करने में मदद मिलती है, जिससे पाचन में भी सुधार होता है।”
हाइपरथायरायडिज्म में ग्रीन टी पीने के फायदे
Ms Pravalika Londe के अनुसार, “हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) की स्थिति में शरीर में थायराइड हार्मोन ज्यादा मात्रा में बनने लगता है, जिसके कारण ये ज्यादा एक्टिव हो जाता है। इस दौरान व्यक्ति को घबराहट, बेचैनी, बिना कारण वजन कम होने जैसी समस्याएं होती हैं। इससे राहत के लिए ग्रीन टी का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। ग्रीन टी का सेवन करने से हाइपरथायरायडिज्म के कारण होने वाली बेचैनी और घबराहट जैसी समस्याओं से राहत देने में मदद मिल सकती है, क्योंकि इसके प्रभाव थोड़े शांत करने वाले होते हैं।”
Ms Pravalika Londe आगे बताती हैं, “ग्रीन टी में कैफीन भी होता है। इसका ज्यादा मात्रा में सेवन करने से व्यक्ति को दिल की धड़कन के तेज होने, घबराहट बढ़ने और नींद में परेशानी होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में करें और इसका अधिक सेवन करने से बचें।”
2012 के Molecular and Cellular Biochemistry में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, ग्रीन टी में भरपूर मात्रा में कैटेचिन होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, कैंसररोधी, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एलर्जी से बचाव करने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने जैसे गुण होते हैं। हालांकि, फ्लेवोनोइड्स में एंटी-थायराइड या गॉइट्रोजेनिक प्रभाव भी होते हैं।
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दवाइयों और ग्रीन टी के बीच रखें सही टाइम का गैप
Ms Pravalika Londe बताती हैं, “ग्रीन टी पीते समय ध्यान रखना बेहद जरूरी है, खासकर अगर आप थायराइड की दवा ले रहे हैं। ग्रीन टी का सेवन अधिक मात्रा में करने या थायराइड की दवा के साथ या तुरंत बाद करने से शरीर में दवा के अवशोषण (absorption) या इसके असर को प्रभावित कर सकती है। इसके लिए डॉक्टर आमतौर पर सलाह देते हैं कि दवा खाने के कम से कम 60 मिनट यानी 1 घंटे के बाद ही ग्रीन टी पी जा सकती है। इससे दवा का असर ठीक से हो पाता है।”
आयोडीन के अवशोषण पर ग्रीन टी का असर
डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन का ही कहना है कि, “एक जरूरी बात यह भी है कि ज्यादा ग्रीन टी पीने से शरीर में आयोडीन के अवशोषण (absorption) पर हल्का असर पड़ सकता है। बता दें, थायराइड हार्मोन के संतुलन के लिए आयोडीन जरूरी होता है। हालांकि, यह समस्या आमतौर पर तभी होती है, जब ग्रीन टी का सेवन बहुत अधिक मात्रा में किया जाए।”
कितनी मात्रा में ग्रीन टी पीना है सेफ?
Ms Pravalika Londe के अनुसार, “अगर सही मात्रा में ग्रीन टी पी जाए, तो यह आमतौर पर सेफ मानी जाती है। थायराइड की स्थिति में ग्रीन टी कम या मध्यम मात्रा (जैसे 1-2 कप रोज तक) में पीनी सेफ होती है, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।” ग्रीन टी को नाश्ते के 1 घंटे बाद और लंच के 1 घंटे बाद पिया जा सकता है।
ग्रीन टी किसे नहीं पीनी चाहिए?
ग्रीन टी में बहुत से पोषक तत्व होते हैं, लेकिन कुछ लोगों को इसका सेवन करने से बचना चाहिए। खासकर महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान, पेट की समस्या होने, नींद की कमी (इस दौरान रात के समय न पिएं), एंग्जायटी होने, किडनी और लिवर की समस्या होने और हार्ट की समस्या होने पर ग्रीन टी का सेवन करने से बचना चाहिए।
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क्या ग्रीन टी थायराइड के इलाज का विकल्प है?
Ms Pravalika Londe बताती हैं कि, “ग्रीन टी का सेवन करने से थायराइड में कुछ हद तक लाभ मिल सकते हैं, लेकिन यह थायराइड का इलाज नहीं है और इसे दवाइयों का विकल्प नहीं समझना चाहिए।”
डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन बताती हैं कि, “सही इलाज के लिए समय पर डॉक्टर से सलाह ले और नियमित दवा के साथ बैलेंस डाइट ले। ज्यादा मात्रा में ग्रीन टी पीने से फायदे की बजाय नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है।”
डॉक्टर से सलाह कब लें?
थायराइड की स्थिति में व्यक्ति को ग्रीन टी या अन्य फूड्स को खाने से जी मिचलाने और उल्टी आने जैसा महसूस होने या अधिक थकान होने, गले में सूजन आने, स्किन के ड्राई होने, बालों के झड़ने और वजन में बदलाव आने जैसी समस्याएं होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। ताकि समय से इलाज मिल सके और इसको गंभीर होने से रोका जा सके।
निष्कर्ष
थायराइड की हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म दोनों ही स्थितियों में ग्रीन टी का सेवन सीमित मात्रा में किया जा सकता है। ग्रीन टी का सेवन सही समय पर और डॉक्टर की सलाह के साथ किया जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है। लेकिन कुछ मामलों में सावधानी की जरूरत भी होती है। अगर इसे ज्यादा मात्रा में या गलत तरीके से लिया जाए, तो यह कुछ समस्याओं को बढ़ा भी सकती है। थायराइड की समस्या के कारण स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इसके अलावा, हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करने जरूरी है।
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FAQ
थायराइड में क्या खाना चाहिए?
थायराइड में सीफूड, डेयरी प्रोडक्ट्स, नमक युक्त फूड्स, सीड्स, नट्स, अंडे, दालें, साबुत अनाज, फल और सब्जियों जैसे फूड्स को खाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।थायराइड बढ़ने पर क्या क्या नहीं खाना चाहिए?
थायराइड बढ़ने की स्थिति में व्यक्ति को प्रोसेस्ड फूड्स, कैफीन युक्त ड्रिंक, ज्यादा मीठे स्नैक्स, तली-भुनी चीजों और पैकेज्ड फूड्स को खाने से बचना चाहिए। इनका सेवन करने से स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती है।ग्रीन टी किसे नहीं पीनी चाहिए?
प्रेग्नेंसी के दौरान, आयरन, पेट की समस्या होने, नींद की कमी, एंग्जायटी होने, हार्ट की समस्या या किडनी और लिवर की समस्या होने पर ग्रीन टी का सेवन करने से बचना चाहिए।
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Current Version
Apr 22, 2026 22:44 IST
Modified By : Priyanka Sharma Apr 22, 2026 22:44 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Archana Jain