Fri Oct 9, 2026 | 01:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vineeta Singh Tandon , Sr. Consultant – Internal Medicine

60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के संतुलन बिगड़ने और गिरने को न समझें कमजोरी, जानें 7 कारण

घर के बुजुर्गों के बार-बार गिरने की वजह अक्सर कमजोरी या बढ़ती उम्र को मान लिया जाता है, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। कई बार बुजुर्गों के गिरने की वजह नजर कमजोर होना या ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के संतुलन बिगड़ने और गिरने को न समझें कमजोरी, जानें 7 कारण
60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के संतुलन बिगड़ने और गिरने को न समझें कमजोरी, जानें 7 कारण

‘उम्र ज्यादा हो गई है, इसलिए गिर गए होंगे…’ ‘शरीर में कमजोरी आ गई है, शायद इसलिए गिर रहे हैं…’
60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए ऐसे वाक्य कई बार सुनने को मिल जाते हैं। आमतौर पर बुजुर्गों के गिरने का कारण बढ़ती उम्र या शरीर की कमजोरी मान लिया जाता है। इस बारे में हमने Delhi के ISIC Multispeciality Hospital के Internal Medicine की Senior Consultant Dr. Vineeta Singh Tandon से बात की। उनका कहना है कि कई बार बुजुर्गों के गिरने का कारण कमजोरी के बजाय अन्य सेहत से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं।

उम्र बढ़ने पर गिरने का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

National Institute on Aging (NIA) और Dr. Vineeta Singh Tandon के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। मांसपेशियों की ताकत धीरे-धीरे कम हो सकती है और शरीर का संतुलन बनाए रखने में दिक्कत हो सकती है। इस वजह से कई बुजुर्गों के लिए संतुलन बनाए रखना आसान नहीं रहता। कई मामलों में बुजुर्ग कुछ बीमारियों की रेगुलर दवाएं लेते हैं, जिनके कारण कमजोरी या चक्कर आ सकते हैं। इसलिए अगर कोई बुजुर्ग बार-बार गिर रहा है, तो सिर्फ इसे उम्र से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके कारणों को जानने की कोशिश करनी चाहिए।

60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के बार-बार गिरने के 7 कारण

Dr. Vineeta Singh Tandon ने कहा कि अगर बुजुर्ग बार-बार गिरते हैं, तो उनकी हड्डी टूटने, सिर में चोट लगने या अस्पताल में भर्ती कराने तक की नौबत आ सकती है। कई बार यह भी देखा गया है कि बुजुर्ग गिरने के बाद दोबारा चलने या वॉक पर जाने से डरने लगते हैं। इसलिए बार-बार गिरने के कारणों को जानना बहुत जरूरी है।

1. मांसपेशियों की कमजोरी - उम्र बढ़ने के साथ शरीर की ताकत कम हो सकती है। कई मामलों में पैरों की मांसपेशियां कमजोर होने पर चलने, उठने-बैठने और शरीर का संतुलन बनाए रखने में दिक्कत हो सकती है।

2. नजर कमजोर होना - बुजुर्गों में संतुलन बिगड़ने का कारण कई बार साफ दिखाई न देना भी हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद या आंखों की दूसरी समस्याओं के कारण सीढ़ियां, फर्श पर रखी चीजें या ऊबड़-खाबड़ रास्ते ठीक से दिखाई न देना भी गिरने की वजह बन सकती है।

3. अचानक ब्लड प्रेशर कम होना - कई बार बुजुर्गों को लेटने या लंबे समय तक बैठने के बाद अचानक खड़े होने पर चक्कर आने लगते हैं। इसकी वजह ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना हो सकता है। इसलिए बुजुर्गों को लेटने के बाद कुछ समय के लिए बैठना चाहिए और फिर धीरे-धीरे खड़े होना चाहिए।

4. दवाओं का असर - कुछ दवाओं के कारण बुजुर्गों का ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर कम या ज्यादा हो सकता है। इससे उन्हें बहुत ज्यादा नींद आने, चक्कर या कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस वजह से कई बार उनका संतुलन बिगड़ सकता है। हालांकि, ऐसा होने पर खुद से दवा बंद नहीं करनी चाहिए, बल्कि डॉक्टर से सलाह लेकर दवा में बदलाव किया जा सकता है।

5. कान के अंदरूनी हिस्से में समस्या - शरीर का संतुलन बनाए रखने में कान भी महत्वपूर्ण होते हैं। अगर कान में अंदरूनी समस्या है, तो चलते समय चक्कर आ सकते हैं। इससे गिरने का खतरा बढ़ सकता है।

6. गठिया और जोड़ों का दर्द - कई बार उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों को घुटनों, कूल्हों या टखनों में दर्द होने लगता है। इस वजह से उनके लिए नॉर्मल चलना मुश्किल हो सकता है। दर्द के कारण कई बार उनका पैर लड़खड़ा सकता है।

7. विटामिन D की कमी - विटामिन D शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों के लिए बहुत जरूरी है। कई बार इसकी कमी होने पर हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है। इस वजह से बुजुर्गों के गिरने की संभावना बढ़ सकती है।

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बुजुर्गों के किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

Dr. Vineeta Singh Tandon ने बताया कि अगर कोई बुजुर्ग बार-बार गिरता है, तो  इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।

  • बार-बार चक्कर आना
  • चलते समय शरीर का संतुलन बिगड़ना
  • थोड़े समय के अंदर एक से ज्यादा बार गिरना
  • कुर्सी से उठने या सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी
  • दोबारा गिरने का लगातार डर बने रहना

बुजुर्गों को गिरने से बचाने के उपाय

National Institute on Aging (NIA) के मुताबिक, बुजुर्गों के गिरने की संभावना को कम करने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखा जा सकता है।

  • रोजाना टहलने या सीढ़ियां चढ़ने जैसी कसरत करके ओस्टियोपोरोसिस से बचा जा सकता है।
  • योग या वजन उठाने जैसी एक्सरसाइज से संतुलन और मांसपेशियों की ताकत में सुधार हो सकता है।
  • अगर देखने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से मोतियाबिंद या आंखों से जुड़ी समस्याओं की जांच जरूर कराएं।
  • सुनने में दिक्कत होने पर भी गिरकर चोट लग सकती है। इसलिए कानों का चेकअप कराना भी जरूरी है।
  • अगर किसी दवा से साइड इफेक्ट हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
  • पर्याप्त मात्रा में नींद पूरी करने से शरीर को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।
  • लेटने या बैठने के बाद बहुत तेजी से खड़े होने पर संतुलन बिगड़ सकता है।
  • अगर गिरने की समस्या बार-बार हो रही है, तो वॉकर के सहारे चलें।
  • अच्छी ग्रिप वाले जूते या चप्पल पहनें।

निष्कर्ष
अगर बुजुर्ग बार-बार गिर रहे हैं, तो उसे सिर्फ कमजोरी न मानें, बल्कि इसका कारण ब्लड प्रेशर का कम होना, कान या आंख की परेशानी, जोड़ों में दर्द या विटामिन की कमी हो सकती है। इसलिए इसके कारणों को जानना बहुत जरूरी है, ताकि घर के बुजुर्ग सुरक्षित रह सकें।

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FAQ

  • क्या डिमेंशिया या पार्किंसंस की शुरुआत भी संतुलन बिगड़ने से होती है?

    पार्किंसंस में मांसपेशियों में अकड़न, हाथों में कंपन और छोटे-छोटे कदम उठाकर चलने में समस्या होती है। डिमेंशिया में दिमाग दूरी और सतह की ढलान का सही अंदाजा नहीं लगा पाता, जिससे संतुलन बिगड़ सकता है। 
  • गिरने के बाद यदि बुजुर्ग को तुरंत दर्द न महसूस हो, तब भी डॉक्टरी जांच क्यों जरूरी है?

    बुजुर्गों में हड्डियां कमजोर होने के कारण हेयरलाइन या हिप फ्रैक्चर और सिर में अंदरूनी ब्लीडिंग के लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते। इसलिए गिरने के बाद मेडिकल स्कैन और चेकअप कराना बहुत जरूरी है। 

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Aneesh Rawat
  • Oct 01, 2026 13:12 IST

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