गुलाबी ठंड शुरू हो चुकी है। हल्की ठंड भरे मौसम में जोड़ों का दर्द अचानक बढ़ना आम बात है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि ठंडे तापमान के कारण ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है और जोड़ों में अकड़न बढ़ सकती है। इससे जोड़ों के आस-पास की मांसपेशियां भी अधिक कड़ी हो सकती हैं। आमतौर पर इसे संभालना आसान होता है, लेकिन अगर दर्द लगातार बढ़ रहा हो या तेज दर्द हो, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं कुछ आसान उपाय जो इस गुलाबी ठंड में जोड़ों के दर्द से बचाव कर सकते हैं। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri, Sr. Consultant Neuro & Spine Surgeon And Clinical Director- Advance Endoscopic Spine Surgery At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।
जोड़ों के दर्द के पीछे कई बीमारियां होती हैं जिन्हें ठंड का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। National Health Service, UK के मुताबिक, जोड़ों के दर्द के पीछे रूमेटाइड अर्थराइटिस, गाउट, जोड़ों में इंफेक्शन यानी सेप्टिक अर्थराइटिस, ऑस्टियोअर्थराइटिस जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं इसलिए दर्द तेज होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
सर्दियों में जोड़ों के दर्द से बचने के 5 उपाय
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1. जोड़ों को ठंडी हवा से बचाएं
जोड़ों के दर्द से बचने के लिए उसे ठंडी हवा से बचाएं। गर्म कपड़ों की कई परतें पहनें, दस्ताने और गर्म मोजों का इस्तेमाल करें। जोड़ों की अकड़न से राहत पाने के लिए हीटिंग पैड का इस्तेमाल करें या गुनगुने पानी से नहाएं।
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2. रोज हल्की फिजिकल एक्टिविटी करें
ठंड आते ही आलस आता है और एक्सरसाइज करने का मन नहीं करता, लेकिन जोड़ों की तकलीफ से बचने के लिए हल्की फिजिकल एक्टिविटी के लिए रोज समय निकालें। टहलना, स्ट्रेचिंग, योग या तैराकी जैसी हल्की एक्टिविटीज करें। नियमित शारीरिक गतिविधि से जोड़ों का लचीलापन बढ़ता है और जोड़ों में अकड़न कम होती है।
3. हल्की स्ट्रेचिंग करें
गुलाबी ठंड में जोड़ों की तकलीफ धीरे-धीरे बढ़ने लगती है। इससे बचने के लिए जोड़ों और मांसपेशियों को लचीला बनाने की जरूरत है। खिंचाव और चोट से बचने के लिए 5 से 10 मिनट तक हल्की स्ट्रेचिंग करें।
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4. सर्दियों की सुबह धूप में टहलें
सर्दियों में धूप कम मिलने से विटामिन D का स्तर प्रभावित हो सकता है। संतुलित आहार लें और डॉक्टर से पूछें कि आपको विटामिन D सप्लीमेंट की जरूरत है या नहीं? साथ ही, सुबह की धूप में कुछ देर टहलें और पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें।
5. पैरों को सपोर्ट देने वाले जूते पहनें
जोड़ों के दर्द से बचने के लिए ऐसे जूते पहनें जो पैरों को अच्छा सहारा दें। जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत करने से बचें और जोड़ों पर दबाव कम करने के लिए स्वस्थ वजन बनाए रखें।
आहार में शामिल करें ये पोषक तत्व
गुलाबी ठंड के मौसम में कई लोगों को जोड़ों में दर्द, अकड़न और सूजन की समस्या महसूस हो सकती है। ऐसे में डाइट में कुछ खास पोषक तत्व शामिल करने से हड्डियों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है-
1. विटामिन C
यह कोलेजन बनाने में मदद करता है, जो कार्टिलेज यानी जोड़ों के बीच मौजूद लचीले टिशूज के लिए जरूरी है। इसके लिए आंवला, अमरूद, संतरा और शिमला मिर्च को डाइट में शामिल करें।
2. विटामिन D
यह शरीर में कैल्शियम के एब्जॉर्ब होने की प्रक्रिया और हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। अंडे की जर्दी, मछली और विटामिन D से भरपूर फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ खा सकते हैं।
3. कैल्शियम
हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम जरूरी है। दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और हरी पत्तेदार सब्जियों को डाइट में शामिल करें।
4. ओमेगा-3 फैटी एसिड
ओमेगा में सूजन कम करने वाले गुण होते हैं। अलसी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट और फैट युक्त मछली इसके अच्छे स्रोत हैं।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- अगर जोड़ों का दर्द तेज हो,
- उसके साथ सूजन,
- रेडनेस,
- बुखार या कमजोरी हो या
- दर्द कुछ दिनों से ज्यादा समय तक बना रहे, तो डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष:
गुलाबी ठंड में जोड़ों का दर्द अचानक बढ़ सकता है। इससे बचने के लिए जोड़ों को ठंडी हवा से बचाएं, हीटिंग पैड का इस्तेमाल कर सकते हैं, रोज हल्की फिजिकल एक्टिविटी करें, हल्की स्ट्रेचिंग करें, सर्दियों की सुबह धूप में टहलें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और पैरों को सपोर्ट देने वाले जूते पहनें। जोड़ों में दर्द, अकड़न और सूजन जैसी समस्याओं से बचने के लिए डाइट में विटामिन C, D, कैल्शियम और ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें। जोड़ों का दर्द तेज हो, जोड़ों में सूजन, रेडनेस, बुखार, कमजोरी हो या यह समस्या कुछ दिनों तक बनी रहे, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
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FAQ
क्या जोड़ों के दर्द में मालिश करना सही है?
हल्की मालिश से आस-पास की मांसपेशियों में तनाव कम हो सकता है, लेकिन अगर जोड़ों में तेज दर्द, सूजन, रेडनेस, गर्माहट या चोट हो, तो मालिश करने से बचें और डॉक्टर से सलाह लें।ऑस्टियोअर्थराइटिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस में क्या अंतर है?
ऑस्टियोअर्थराइटिस में जोड़ों की कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगती है, जबकि रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें इम्यून सिस्टम जोड़ों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकता है।
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Oct 29, 2026 17:16 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Bala Raja Sekhar Chandra
