महिलाएं गर्भाशय यानी यूटरस को सिर्फ प्रेग्नेंसी और पीरियड्स से ही जोड़कर देखती है, लेकिन यूटरस का काम सिर्फ प्रेग्नेंसी से ही नहीं जुड़ा, बल्कि हार्मोनल संतुलन से लेकर महिलाओं की पूरी सेहत पर असर डाल सकता है। इसलिए महिलाओं को अपने यूटरस की सेहत का ध्यान रखना चाहिए, लेकिन आजकल खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी डाइट धीरे-धीरे गर्भाशय की सेहत को प्रभावित कर सकती है। हमने Dr. Chetna Jain, Director, Dept of Obstetrics & Gynecology, Cloudnine Group of Hospitals, Sector 14, Gurgaon से बात की।
यूटरस को कमजोर करने वाली गलत आदतें
Dr. Chetna Jain ने कहा, “महिलाएं छोटी-छोटी आदतों को इग्नोर कर देती हैं और यही आदतें आगे चलकर पीरियड्स रेगुलर न होना, इंफेक्शन, हार्मोनल असंतुलन, PCOS और फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकती हैं। इसलिए महिलाओं को इन आदतों पर कंट्रोल करना चाहिए।”
बार-बार जंक और प्रोसेस्ड फूड खाना
Dr. Chetna Jain के मुताबिक, “रोजाना की दौड़भाग के कारण महिलाएं फास्ट फूड और पैकेज्ड खाने पर काफी निर्भर हो गई है, लेकिन ज्यादा तला-भुना, प्रोसेस्ड और शुगर से भरपूर भोजन शरीर में सूजन बढ़ा सकता है। इसका असर हार्मोनल हेल्थ पर पड़ता है, जिससे गर्भाशय के फंक्शन पर असर पड़ सकता है। जो महिलाएं लगातार अनहेल्दी डाइट लेती हैं, उनमें PCOS, मोटापा और अनियमित पीरियड्स जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।”
लंबे समय तक बैठे रहना
Dr. Chetna Jain कहती हैं, “जो महिलाएं लगातार कई घंटों तक बैठकर काम करती हैं या फिर बिल्कुल भी फिजिकल एक्टिविटी नहीं करती हैं, उनका खासतौर पर पेल्विक एरिया का ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है। इससे वजन बढ़ना, हार्मोनल असंतुलन और मांसपेशियों में कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो गर्भाशय की सेहत पर असर डाल सकती हैं।”

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पीरियड्स के दौरान खराब हाइजीन रखना
Dr. Chetna Jain के अनुसार, “अगर महिलाएं पीरियड्स के समय साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखती, तो इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक एक ही पैड या टैम्पॉन इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं, जो यूटरस और ओवरी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई बार इससे यूरिन इंफेक्शन का भी रिस्क बढ़ सकता है।”
स्मोकिंग और ज्यादा शराब पीना
Dr. Chetna Jain ने कहा, “जो महिलाएं बहुत ज्यादा स्मोकिंग और शराब पीती हैं, उनके शरीर का हार्मोनल बैलेंस बिगड़ सकता है। इससे गर्भाशय में ब्लड फ्लो कम हो सकता है। लगातार ब्लड फ्लो कम होने से फर्टिलिटी की समस्या भी हो सकती है।”
लगातार स्ट्रैस और नींद की कमी
Dr. Chetna Jain ने कहती हैं, “आमतौर पर महिलाएं स्ट्रैस और नींद की कमी को यूटरस की हेल्थ से जोड़ ही नहीं पाती और इस वजह से उन्हें समझ ही नहीं आता कि यूटरस स्ट्रैस और नींद की कमी से कमजोर हो रहा है। लगातार स्ट्रैस से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ सकता है, जो पीरियड्स और हार्मोनल हेल्थ को प्रभावित करता है।”
यूटरस को सेहतमंद रखने के तरीके
Dr. Chetna Jain ने महिलाओं को यूटरस को स्वस्थ रखने के टिप्स दिए हैं।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक करने के साथ ही योग और हल्की एक्सरसाइज करें।
- हर एक घंटे बाद कुर्सी से उठकर थोड़ा घूमें।
- डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और नट्स शामिल करें।
- दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं।
- पीरियड्स के दौरान हर चार से छह घंटे में पैड बदलें।
- पीरियड्स के दौरान प्राइवेट पार्ट की सफाई का ध्यान रखें
- स्मोकिंग और शराब से दूर रहें।
- स्ट्रैस कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें।
- रोज सात से आठ घंटे की नींद लें और स्क्रीन टाइम कम करें।
निष्कर्ष
महिलाओं को यूटरस को हेल्दी रखने के लिए अपनी रोजाना की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करने चाहिए। हेल्दी डाइट, लाइफस्टाइल और हाइजीन को अपनाने से यूटरस को कमजोर होने से बचाया जा सकता है। अगर महिलाओं को पीरियड्स में बहुत ज्यादा दर्द, असामान्य ब्लीडिंग या बार-बार इंफेक्शन जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
FAQ
क्या पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज से गर्भाशय मजबूत होता है?
कीगल एक्सरसाइज से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जो गर्भाशय को सहारा देती हैं। यह प्रसव के बाद गर्भाशय की मजबूती के लिए बहुत प्रभावी है।क्या वजन बढ़ने का असर गर्भाशय की मजबूती पर पड़ता है?
पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी गर्भाशय पर दबाव डालती है और एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को बढ़ा सकती है, जिससे फाइब्रॉयड्स का खतरा बढ़ जाता है।
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Current Version
May 12, 2026 18:36 IST
Modified By : Aneesh Rawat May 12, 2026 18:36 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Chetna Jain