बच्चे को जन्म देने के बाद महिला का शरीर तेजी से कई बदलावों से गुजरता है। इस दौरान थकान, कमजोरी और कभी-कभी सांस लेने में हल्की परेशानी महसूस होना संभव है। लेकिन अचानक सांस फूलना, छाती में दर्द या धड़कन बहुत तेज होना सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण कभी-कभी ऐसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं, जिसमें तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। डिलीवरी के बाद भी कई महीनों तक कुछ गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं का खतरा बना रह सकता है।
वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "प्रसव के बाद नई मां के लिए थकान और कमजोरी स्वाभाविक हो सकती है, लेकिन अचानक सांस लेने में परेशानी या छाती में दर्द को सामान्य कमजोरी समझना सही नहीं है। ऐसे लक्षण दिखाई दें तो महिला को तुरंत जांच करवानी चाहिए, खासकर अगर सांस फूलने की समस्या अचानक शुरू हुई हो।"
डिलीवरी के बाद अचानक सांस फूलने और छाती में दर्द का कारण
डिलीवरी के बाद शरीर में रक्त के थक्के बनने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसा शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण होता है, जिससे डिलीवरी के दौरान होने वाले ब्लीडिंग को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। लेकिन कभी-कभी पैरों या शरीर की गहरी नसों में बना थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है। इसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म (Pulmonary Embolism) कहा जाता है और यह जानलेवा स्थिति हो सकती है।
डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "अगर प्रसव के बाद अचानक सांस फूलने लगे और इसके साथ छाती में दर्द, तेज धड़कन या चक्कर जैसी परेशानी हो, तो रक्त के थक्के की संभावना को भी ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसी स्थिति में घर पर आराम करने या लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। यह घातक हो सकता है।"
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क्या कहती है स्टडी?
Cureus जर्नल में प्रकाशित एक केस रिपोर्ट और रिव्यू के अनुसार, डिलीवरी के दौरान जोर लगाने (Valsalva Maneuver) के कारण फेफड़ों की हवा छनकर सीने के मध्य हिस्से में जमा हो जाती है, जिससे सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। वैसे तो यह स्थिति ठीक हो जाती है और इसे ऑक्सीजन और दर्द निवारक दवाओं से ठीक किया जा सकता है, लेकिन डिलीवरी के तुरंत बाद सीने में दर्द और सांस फूलने के लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए। यह पल्मोनरी एम्बोलिज्म या एओर्टिक डिसेक्शन जैसी जानलेवा स्थितियों का संकेत हो सकता है।
BMJ Case Reports में पहली बार मां बनी एक 28 वर्षीय महिला की केस रिपोर्ट प्रकाशित हुई। इससे पता चला, डिलीवरी के तुरंत बाद चेहरे पर सूजन और सीने में तेज दर्द हैमन्स सिंड्रोम (Hamman's Syndrome) यानी स्पॉन्टेनियस न्यूमोमेडियास्टिनम (Spontaneous Pneumomediastinum) और सर्जिकल एम्फाइसीमा (हवा का त्वचा व सीने के बीच वाले हिस्से में भर जाना) की समस्या हो सकती है। रिपोर्ट में बताया गया स्पॉन्टेनियस न्यूमोमेडियास्टिनम एक दुर्लभ समस्या है, लेकिन लक्षण दिखने पर इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है।
किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?
डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, डिलीवरी के बाद निम्न लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें-
- अचानक सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना
- छाती में दर्द या दबाव महसूस होना
- गहरी सांस लेने या खांसने पर छाती का दर्द बढ़ना
- दिल की धड़कन अचानक बहुत तेज या अनियमित होना
- चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना
- खांसी के साथ खून आना
- एक पैर में अचानक सूजन, दर्द, लालिमा या गर्माहट
- ये लक्षण रक्त के थक्के या फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्या की ओर संकेत कर सकते हैं।
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किन महिलाओं में खतरा बढ़ सकता है?
जरूर नहीं है कि हर महिला को डिलीवरी के बाद रक्त का थक्का बनने की समस्या हो और यह जोखिम भी हर महिला के लिए अलग-अलग होता है। सिजेरियन डिलीवरी, लंबे समय तक बिस्तर पर रहना या कम चलना-फिरना, पहले रक्त का थक्का बन चुका होना, शरीर का अधिक वजन, कुछ रक्त संबंधी विकार और कुछ अन्य मेडिकल कंडिशन जोखिम को बढ़ा सकती हैं। हालांकि, जोखिम कारक न होने पर भी डिलीवरी के बाद अचानक सांस फूलने या छाती में दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कब अस्पताल जाएं?
यदि सांस फूलना अचानक और तेज है, छाती में दर्द हो रहा है, खांसी के साथ खून आ रहा है, धड़कन बहुत तेज है, चक्कर या बेहोशी हो रही है, तो इसे इमरजेंसी कंडीशन समझें और तुरंत डॉक्टर से मदद लें। रक्त के थक्के से जुड़ी समस्या होने पर उसे नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।
डॉक्टर की सलाह
डिलीवरी के बाद सांस फूलने और छाती में दर्द के पीछे केवल ब्लड क्लॉटिंग ही जिम्मेदार हो, यह जरूरी नहीं। हृदय से जुड़ी समस्या, संक्रमण या अन्य डिलीवरी के दौरान होने वाली जटिलताएं भी इसका कारण हो सकती हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर स्वयं बीमारी तय करने के बजाय डॉक्टर से मिलें और अपनी समस्या विस्तार से बताएं। डॉ. शोभा गुप्ता कहतीहैं, "नई मां अक्सर बच्चे की देखभाल में इतनी व्यस्त हो जाती है कि खुद का ख्याल रखना भूल जाती हैं और अपनी परेशानियों को भी अनदेखा कर देती है। लेकिन डिलीवरी के बाद महिला की अपनी सेहत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी शिशु की। सांस फूलना या छाती में दर्द शरीर का ऐसा संकेत है, जिसे टालना नहीं चाहिए।"
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निष्कर्ष
डिलीवरी के बाद थकान या कमजोरी होना स्वाभाविक है, लेकिन कभी-कभी यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है। इसलिए अगर थकान लंबे समय से बनी हुई है और इसके साथ-साथ अन्य लक्षण भी नजर आ रहे हैं, तो बेहतर है कि इसे इग्नोर न करें। अंत में डॉ. शोभा गुप्ता का कहना है, "डिलीवरी के बाद थकान सामान्य हो सकती है, लेकिन अचानक सांस फूलना और छाती में दर्द को सामान्य डिलीवरी के बाद की परेशानी मानकर छोड़ना सुरक्षित नहीं है। समय पर जांच गंभीर जटिलता की पहचान और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नई मां को अपने शरीर के संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए और जरूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए।"
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FAQ
पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी (Peripartum Cardiomyopathy-PPCM) क्या है?
पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी एक दुर्लभ प्रकार का हार्ट फेलियर है, जो गर्भावस्था के अंतिम महीने से लेकर डिलीवरी के 5 महीने बाद तक हो सकता है।डिलीवरी के बाद डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) से बचने के लिए तुरंत क्या करना चाहिए?
डिलीवरी, खासकर सिजेरियन डिलीवरी के बाद डॉक्टर की सलाह पर वॉक आदि शुरू कर देनी चाहिए, हाइड्रेटेड रहना चाहिए और जिन महिलाओं को इसका रिस्क है, उन्हें कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स (Compression Stockings) पहननी चाहिए।
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Sep 28, 2026 13:09 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta
