Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

आयुर्वेद में बालों के ल‍िए भृंगराज, आंवला और ब्राह्मी क्यों माने जाते हैं खास?

आयुर्वेद में भृंगराज, आंवला और ब्राह्मी को बालों के लिए बेहद फायदेमंंद माना जाता है। जानें कैसे ये रसायन गुणों से भरपूर जड़ी-बूटियां बालों को पोषण देने, सफेद बालों की समस्या कम करने में मदद कर सकती हैं?

आलकल की जीवनशैली, खराब खानपान और बढ़ती उम्र का असर सबसे पहले बालों पर द‍िखने लगता है। आयुर्वेद में बालों की देखभाल के लिए कई जड़ी-बूटियों के बारे में बताया गया है, उन्‍हींं में से तीन हैं भृंगराज, आंवला और ब्राह्मी ज‍िन्‍हें आयुर्वेद में विशेष महत्व दिया गया है। इन्हें बालों की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। इन तीनों की तासीर ठंडी होती है और इससे शरीर को पोषण म‍िलता है। बालों के ल‍िए भृंगराज, आंवला और ब्राह्मी की अहम‍ियत को समझने के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

रसायन गुणों से भरपूर हैं ये तीनों जड़ी-बूटियां

आयुर्वेद में रसायन उन औषधियों को कहा जाता है जो शरीर को पोषण देने, ताकत बढ़ाने और उम्र बढ़ने के प्रभावों को कम करने में असरदार मानी जाती हैं। भृंगराज, आंवला और ब्राह्मी तीनों को ही श्रेष्ठ रसायन माना गया है। जब शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है, तो इसका अच्‍छा असर बालों पर भी दिखाई देता है। यही कारण है कि इन जड़ी-बूटियों को बालों की जड़ों को मजबूत बनाने और उनकी प्राकृतिक गुणवत्ता बनाए रखने में असरदार माना जाता है।

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बढ़ती उम्र के साथ बालों की समस्‍याओं को दूर करती हैं ये औषध‍ियां

बढ़ती उम्र के साथ बालों का पतला होना, झड़ना और सफेद होना सामान्य माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह बदलाव शरीर में होने वाली एजिंग प्रक्रिया से जुड़े हो सकते हैं। ये औषधियां शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और ट‍िशूज को पोषण देने में मदद करती हैं। अगर बालों का झड़ना उम्र बढ़ने से जुड़ी प्रक्रियाओं के कारण हो रहा है, तो इन औषधियों का सेवन या इस्‍तेमाल क‍िया जा सकता है।

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आंवला

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आंवला में प्राकृतिक रूप से विटामिन सी मौजूद होता है, जो शरीर के साथ-साथ बालों, त्वचा और पूरे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंंद बताया गया है। यह पंच रस युक्त होता है, यानी इसमें पांच प्रकार के रस पाए जाते हैं। बालों की ग्रोथ के ल‍िए आंवला का सेवन करना सेहतमंद हो सकता है।

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भृंगराज

भृंगराज को आयुर्वेद में 'केश रंजक' कहा गया है। केश रंजक का अर्थ है ऐसा द्रव्य जो बालों के प्राकृतिक रंग को बनाए रखने में मदद कर सकता है। भृंगराज का इस्‍तेमाल समय से पहले सफेद होने वाले बालों की समस्या को कम करने के लिए किया जा सकता है। साल 2025 में International Journal Of Sciences And Innovation Engineering नामक जर्नल में प्रकाशि‍त एक स्‍टडी के मुताब‍िक, भृंगराज में एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण होते हैं, जो स्कैल्प को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। स्‍टडी के अनुसार, यह बालों के ग्रोथ फेज को लंबा करने और बालों को घना बनाने में मदद करते हैं।

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ब्राह्मी

ब्राह्मी को आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य और स्मरण शक्ति से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका महत्व केवल यहीं तक सीमित नहीं है। तनाव और मानसिक दबाव भी बाल झड़ने का कारण बन सकता है। ऐसे में ब्राह्मी को शरीर और मन को संतुलित रखने वाली औषधि माना जाता है। यही वजह है कि इसे बालों की देखभाल में भी शामिल किया जाता है।

न‍िष्‍कर्ष:

बढ़ती उम्र में हेयर फाॅल, सफेद बाल या बालों की अन्‍य समस्‍याओं को दूर करने के ल‍िए भृंगराज, आंवला और ब्राह्मी जैसी औषधि‍यों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इन तीनोंं की तासीर ठंंडी होती है और ये तीनोंं ही रसायन गुणों से भरपूर होते हैं इसल‍िए ये बालो की सेहत के ल‍िए फायदेमंद माने जाते हैं।

FAQ

  • भृंगराज के क्‍या फायदे हैं?

    भृंगराज शरीर में वात और पित्त को संतुलित करने और उम्र बढ़ने के प्रभावों को धीमा करने में फायदेमंद माना जाता है।
  • ब्राह्मी के क्‍या फायदे हैं?

    ब्राह्मी को याददाश्त और फाेकस को बेहतर बनाने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी माना जाता है। यह मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को मजबूत करने में मदद कर सकती है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Yashaswi Mathur
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