Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Gunjan Sarin , Obstetrics and Gynaecology

PCOS में मेडिटेशन करने से मिल सकते हैं कई फायदे

PCOS में मेडिटेशन करने से कई फायदे मिल सकते हैं। यह ब्रेन को रिलैक्स करता है और मूड स्विंग जैसी समस्या से राहत दिलाता है।

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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) में महिलाओं को कई तरह की मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें से तनाव, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याएं आम हैं। इन समस्याओं से राहत में मेडिटेशन यानी ध्यान मददगार साबित हो सकता है। मेडिटेशन करने से हार्मोनल समस्याओं को संतुलित करने में भी मदद मिल सकती है। दिल्ली के आनंद निकेतन में स्थित गायनिका: एवरी वुमन मैटर क्लीनिक की सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन और उत्तम नगर में स्थित योग जंक्शन के योग थेरेपिस्ट प्रवीण गौतम से जानें कि PCOS में मेडिटेशन के क्या फायदे हैं।

PCOS में मेडिटेशन कैसे फायदेमंद है?

PCOS के कारण अक्सर महिलाओं में मानसिक स्ट्रेस ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे हार्मोन्स की स्थिति बिगड़ने लगती है। जब आप मेडिटेशन करती हैं तो आपका दिमाग शांत होता है और शरीर में तनाव का कारण बनने वाले कोर्टिसोल हार्मोन में कमी आती है। तनाव कम होने से शरीर में हार्मोन्स संतुलित होने लगते हैं, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और एंड्रोजन हार्मोन भी कम हो जाते हैं। इसका सीधा असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे पीरियड्स समय पर आने लगते हैं और PCOS के अन्य लक्षणों में धीरे-धीरे सुधार होने लगता है। The International Journal Of Indian Psychology (2023) में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, मेडिटेशन एंग्जायटी को कंट्रोल करने में काफी प्रभावी पाया गया है और PCOS के लक्षणों को कंट्रोल करने में भी बहुत फायदेमंद होता है। 

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PCOS की कई समस्याओं से राहत दिलाता है मेडिटेशन

डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन अनुसार, PCOS होने पर महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स असंतुलित होने लगते हैं, जिसके कारण उनको अधिक स्ट्रेस होने, चिड़चिड़ापन होने, मूड स्विंग्स होने और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने जैसे लक्षणों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इससे राहत और शरीर में हार्मोन्स को बैलेंस करने के लिए मेडिटेशन करना फायदेमंद हो सकता है। 2024 के Frontiers In Endocrinology के रिव्यू के अनुसार, PCOS एक क्रॉनिक कंडीशन है, जो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। ऐसे में मेडिटेशन और माइंडफुलनेस जैसी आदतों को अपनाने से जीवन की गुणवत्ता, ब्रेन को रिलैक्स करने और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। 

योग थेरेपिस्ट प्रवीण गौतम के अनुसार, रोज मेडिटेशन करने से ब्रेन को रिलैक्स करने में मदद मिलती है, जिससे स्ट्रेस, टेंशन, मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ेपन को कम करने में मदद मिलती है, जो समस्याएं अक्सर PCOS के कारण होती हैं। 

हार्मोन्स को बैलेंस करे

PCOS की समस्या में रोज मेडिटेशन करने से शरीर में हार्मोन्स बैलेंस रहते हैं। दरअसल PCOS एक हार्मोनल समस्या है, जिसमें शरीर में कोर्टिसोल, एंड्रोजन जैसे कई हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। ऐसे में रोज ध्यान करना फायदेमंद हो सकता है।

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स्ट्रेस कम करे

तनाव यानी स्ट्रेस भी PCOS में होने वाली एक आम समस्या है। कई बार महिला को अनियमित पीरियड्स, बाल झड़ने, वजन बढ़ने जैसी समस्याओं के कारण बहुत अधिक तनाव रहता है। ऐसे में मेडिटेशन से तनाव को कम करने और सामान्य जीवन जीने में मदद मिलती है।

इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करे

नियमित रूप से मेडिटेशन करने से स्ट्रेस तो कम होता ही है। साथ ही, यह शरीर में इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करने में मदद करता है। इससे सेल्स शुगर का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाती हैं, जो मेटाबॉलिज्म में सुधार करने और वजन कम करने में भी सहायक हो सकता है। बता दें, पीसीओएस में इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण वजन बढ़ने, शरीर में इंटरनल सूजन आने, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस होने और ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने जैसी परेशानियां होती हैं। ऐसे में मेडिटेशन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।

मानसिक लक्षणों में सुधार करें

PCOS में चिड़चिड़ापन, गुस्सा आने और मूड स्विंग्स जैसे मानसिक समस्याएं भी होती हैं। इन समस्याओं से राहत दिलाने में भी मेडिटेशन फायदेमंद हो सकता है।

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वजन नियंत्रित करे

पीसीओएस में महिलाओं को वजन बढ़ने की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नियमित रूप से मेडिटेशन करने से शरीर में हार्मोन्स का संतुलन बनाए रखने, मेटाबॉलिज्म में सुधार करने और पाचन प्रक्रिया को बेहतर करने में मदद मिलती है, जो शरीर में फैट के जमाव को कम करने में सहायक हो सकता है।

नींद की गुणवत्ता में सुधार करें

पीसीओएस में रोज 20 से 30 मिनट तक मेडिटेशन करने से ब्रेन को रिलैक्स करने, स्ट्रेस को कम करने, नींद की गुणवत्ता में सुधार करने और शरीर में हार्मोन्स को बैलेंस रखने में मदद मिलती है, जो मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने और पीसीओएस के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है।

मेडिटेशन कैसे शुरू करें?

योग थेरेपिस्ट प्रवीण गौतम बताते हैं किमेडिटेशन शुरू करने के लिए किसी शांत जगह पर आराम से बैठ जाएं और फिर आंखों को कर लें। अब अपना पूरा ध्यान अपनी सांसों पर केंद्रित करें। शुरुआत में 5-10 मिनट के छोटे-छोटे सेशन के साथ करें। समय के साथ आप सेशन के समय को बढ़ा सकते हैं। 

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किन बातों का ध्यान रखें? 

PCOS में मेडिटेशन करते समय महिलाओं को इन बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

  • ध्यान (मेडिटेशन)करते समय गहरी सांस लें 
  • लगातार अपनी सांसों पर फोकस करें 
  • नियमित रूप से कम-से-कम 20 मिनट के लिए मेडिटेशन करें 
  • मेडिटेशन हमेशा सुबह के समय करने की कोशिश करें
  • शांत माहौल में मेडिटेशन करें
  • माइंडफुलनेस पर ध्यान रखें

डॉक्टर से कब मिलें? 

पीसीओएस में मेडिटेशन करना फायदेमंद होता है, लेकिन अगर इसके बाद भी PCOS के लक्षण कंट्रोल नहीं होते हैं और अधिक थकान होने, अधिक स्ट्रेस होने, नींद न आने, वजन बढ़ने, हार्मोन्स के असंतुलित होने, चिड़चिड़ापन होने, मुंहासे होने, बालों के झड़ने और इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 

निष्कर्ष 

पीसीओएस में अक्सर महिलाओं को हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करना और मेडिटेशन करना फायदेमंद माना जाता है। नियमित रूप से मेडिटेशन करने से हार्मोन्स को बैलेंस करने, इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करने, स्ट्रेस को कम करने, वजन कम करने और नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, पीसीओएस से राहत के लिए मेडिटेशन के साथ-साथ हेल्दी डाइट लेने और लाइफस्टाइल में सुधार करना भी जरूरी होता है।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • क्या PCOS में मेडिटेशन मदद कर सकता है?

    पीसीओएस में मेडिटेशन करना फायदेमंद हो सकता है। इससे PCOS के लक्षणों में सुधार करने, हार्मोन्स को बैलेंस करने और स्ट्रेस को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • क्या मेडिटेशन हार्मोनल असंतुलन को ठीक कर सकता है?

    नियमित रूप से 20 मिनट के लिए मेडिटेशन करने से शरीर में स्ट्रेस को कम करने, हार्मोन्स को बैलेंस करने, अनिद्रा से राहत देने और पीसीओएस के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • क्या तनाव के कारण PCOS को बढ़ावा मिलता है?

    लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में स्ट्रेस के कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या होने, वजन बढ़ने, पीरियड्स के अनियमित होने और मुंहासे होने जैसे पीसीओएस के लक्षणों को बढ़ावा मिल सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए परेशानी का कारण हो सकता है। 
  • PCOS में मेडिटेशन कब करना चाहिए?

    पीसीओएस में महिलाओं को सुबह के समय या रात को सोने से पहले मेडिटेशन करने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से ब्रेन को रिलैक्स करने, शरीर में स्ट्रेस हार्मोन को कम करने और हार्मोन्स को बैलेंस करने में मदद मिलती है।
  • PCOS आजकल इतना आम क्यों है?

    आज के समय में भागदौड़, ज्यादा अनहेल्दी खानपान, फिजिकल एक्टिविटीज न करने, लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने और कई अन्य कारणों से महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स के असंतुलित होने और इंसुलिन रेजिस्टेंस होने जैसी समस्याएं होती हैं, जो पीसीओएस और इसके लक्षणों को बढ़ावा देती हैं।

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Disclaimer

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Priyanka Sharma

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Sub Editor

प्रियंका शर्मा हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की है। फिलहाल प्रियंका जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में बतौर सब एडिटर काम कर रही हैं। प्रियंका को स्वास्थ्य, पोषण, स्किन केयर और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म की है। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 11, 2026 21:14 IST

    Modified By : Priyanka Sharma
  • Apr 11, 2026 21:14 IST

    Published By : Priyanka Sharma
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