सांस संबंधी कई रोगों में फायदेमंद है तालीसपत्र (Himalayan Fir), आयुर्वेदाचार्य से जानें इसके फायदे और नुकसान

तालीसपत्र को हिमालयन फर भी कहा जाता है। इस पेड़ के पत्तों के उपयोग से शरीर के कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Apr 06, 2021Updated at: Apr 06, 2021
सांस संबंधी कई रोगों में फायदेमंद है तालीसपत्र (Himalayan Fir), आयुर्वेदाचार्य से जानें इसके फायदे और नुकसान

शंकुनुमा हरे पेड़, उन पर ढेर सारी बर्फ, ठंडी हवाएं...ऐसा दृश्य आपने फिल्मों में जरूर देखा होगा। लेकिन क्या कभी सोचा है कि जो शंकुनुमा पेड़ सिनेमा में दिखता है उसका नाम क्या है। उसका नाम है तालीसपत्र है। अंग्रेजी में इसे हिमालयन फर कहते हैं। यह पेड़ केवल रोमांस के लिए ही नहीं बल्कि आयुर्वेद में एक औषधी के रूप में उपयोग में लाया जाता है। सिक्किम, भूटान तथा पश्चिमी हिमालय में पाया जाने वाला तालीसपत्र का वृक्ष आयुर्वेद की दृष्टि से बहुत फायदेमंद है। इसके उपयोग से सांस संबंधी रोग, खांसी, जुकाम, स्त्री रोग आदि ठीक होते हैं। इसके पेड़ 150-200 फीट ऊंचे होते हैं। तो वहीं, यह पेड़ सदा हरा भरा रहता है। इसके पत्ते लंबे चौड़े होते हैं। 

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तालीसपत्र की खासियत है कि इसके पत्ते कभी गिरते नहीं हैं। इसलिए इसे पत्राढ्य कहा जाता है। इसके फल गुच्छे में आते हैं।  और शंकु के आकार के होते हैं। तालीसपत्र के बीज पकने पर गहरे बैंगनी रंग के होते हैं। तालीसपत्र तीन प्रकार होता है। एक Abies webbiana, दूसरा Taxus baccata, तीसरा Rhododendron anthopogon है। यह प्रजातियां बंगाल, राज्स्थान, गुजरात, पंजाब आदि राज्यों में पाई जाती हैं। यह पेड़ नवंबर से जून महीने में फलता-फूलता है। तालीसपत्र के आयुर्वेद में क्या उपयोग हैं और इसके उपयोग से शरीर के कौन से रोग खत्म होते हैं, इसके बारे में आज हम राष्ट्रीय समाज सेवा संस्थान के आयुर्वेदाचार्य डॉ. राहुल चतुर्वेदी से जानेंगे।

तालीसपत्र के विभिन्न नाम

तालीसपत्र को अलग-अलग भाषाओँ में अलग नामों से जाना जाता है। इसे हिंदी में तालीसपत्र, तालीसपत्री, संस्कृत में पत्राढ्य, धात्रीपत्र, अंग्रेजी में हिमालयन फर (Himalayan fir) के नाम से जाना जाता है। हो सकता है कि आपने हिंदी और संस्कृत नाम न सुने हों, पर अंग्रेजी नाम हिमालयन फर जरूर सुना होगा। अक्सर बच्चे इसे क्रिसमस ट्री भी कह देते हैं। क्योंकि इस पेड़ का आकार क्रिसमस ट्री की तरह दिखता है। फिल्मों में इस पेड़ को खूब रोमांटेसाइज किया गया है। आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे इस पेड़ के आयुर्वेदिक फायदे।

तालीसपत्र के फायदे (Benefits of Himalayan Fir Tree in hindi)

तालीसपत्र को अंग्रेजी में हिमालय ट्री भी कहा जाता है। तालीसपत्र का उपयोग किसी चिकित्सक की सलाह से ही करें। इसके अधिक उपयोग से नुकसान भी हो सकता है। इसके निम्न फायदे हैं।

तनाव को करे कम

आजकल के बढ़ते काम के स्ट्रेस के बीच जिंदगी नॉर्मल नहीं रही है। ऐसे में तमाम तरह के तनाव हमें घेरे रहते हैं। हिमायलन ट्री दिखने में जितनी शीतलता है उतनी ही शरीर के भीतर जाकर भी देता है। हिमालयन ट्री (Benefits of talisptra) के पत्तों का प्रयोग सिर दर्द और तनाव को कम करने में मददगार होता है। इसके पत्तों को पीसकर माथे पर लगाया जा सकता है।

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सांस संबंधी परेशानियों में रामबाण

सर्दी, खांसी, जुकाम, सांस की बीमारियां इन सभी बीमारियों में तालीसपत्र फायदेमंद है। अस्थमा जैसी बीमारी को छोड़ दें तो अन्य सभी बीमारियां मौसमी हैं, जो बदलते मौसम के साथ हमें परेशान करती हैं। इन सभी परेशानियों से निपटने के लिए तालीसपत्र का चूर्ण का सेवन करना चाहिए। यह चूर्ण आपको किसी भी आयुर्वेदिक दुकान से मिल जाएगा। या फिर आयुर्वेदिक चिकित्सक के पास से। जिन लोगों को सूखी खांसी, कुकुर खांसी आदि हो जाती है उन्हें भी तालीसपत्र फायदा पहुंचाता है। इसमें तालीसपत्र के चूर्ण को गुनगुने पाने के साथ खाना होता है।

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अफरा में फायदेमंद

अक्सर खाना खाने के बाद लोगों को पेट फूलने की दिक्कत होने लगती है। यह परेशानी पाचन शक्ति के कमजोर होने की वजह से हो सकती है। दिन प्रतिदिन बढ़ती काम की व्यस्तता के चलते हम नियमित व्यायाम नहीं कर पाते, जिस वजह से पेट फूलने जैसी परेशानियां पनपनती हैं। इन परेशानियों से निजात पाने के लिए तालीसपत्र का चूर्ण और अजवायन साथ मिलाकर खाएं। इससे पेट फूलने की समस्या खत्म हो जाती है।

पेट के दर्द को करे छूमंतर

आजकल के बिगड़ते खानपान के कारण पेट में दर्द जैसी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। तो वहीं, लंबे समय तक बैठ कर काम करने से भी पेट की परेशानियां जैसे गैस बनना, पेट फूलना आदि होने लगती हैं। लेकिन तालीसपत्र के इस्तेमाल (Uses of talisptra) से पेट के दर्द की परेशानी से छुटकारा तुरंत मिलता है। इसके लिए आपको तालीसपत्र का चूर्ण और काला नमक साथ मिलाकर खाना है। काला नमक भी पेट दर्द में बहुत फायदेमंद होता है। आयुर्वेद में कई ऐसे चूर्ण हैं, जिनमें काले नमक का प्रयोग किया जाता है।

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दस्त में फायदेमंद

बहुत से लोगों की पाचनक्रिया कमजोर होती है जिस कारण दस्त की समस्या हो जाती है। तो वहीं, गलत खानपान के कारण भी ऐसा होता है। अगर आपको दस्त की समस्या हो रही है तो तालीसपत्र चूर्ण को शरबत के साथ मिलाकर पीने से परेशानी में आराम मिलता है। तालीसपत्र शरीर के कई रोगों को खत्म करने में मदद करता है। इसके सही उपयोग से शरीर निरोगी हो सकता है। लेकिन अगर सही उपयोग न मालूम हो तो यह नुकसान भी कर सकता है। इसलिए बिना चिकित्सक की सलाह से इसे इस्तेमाल न करें।

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जीभ की जलन करे दूर

कई बार पेट संबंधी रोगों के कारण जीभ में जलन होने लगती है। या फिर कुछ गलत खाने से भी जीभ में जलन होती है। तो वहीं, जीभ में सूजन आ जाती है। जीभ की समस्याओं के निपटान के लिए तालीसपत्र (Benefits of talispatra) का उपयोग किया जा सकता है।

फेफड़ों के लिए लाभदायक

हिमालयन ट्री फेफड़ों के लिए बहुत लाभदायक है। यह फेफड़ों की सूजन का जल्द ही कम करता है। यह शरीर से कफ निकालन में सक्षम है। इसलिए यह फेफड़ों के लिए भी फायदेमंद है। फेफड़ों की समस्या भी बहुत कष्टदायी होती है। इस परेशानी से निपटने के लिए जरूरी है कि तालीसपत्र का सेवन किया जाए। तलासी का सेवन इस रोग में कैसे करना है,  इसके बारे में जानकारी आप अपने नजदीकी आयुर्वेदिक चिकित्सक से ले सकते हैं। 

तालीसपत्र के नुकसान (Side effects of talisptra)

  • तालीसपत्र के अधिक सेवन से उल्टी की परेशानी हो सकती है, इसलिए इसका सेवन चिकित्सक की सलाह में ही करें।
  • इसके अधिक सेवन से चक्कर की समस्या हो सकती है।
  • गर्भवती महिलाएं बिना चिकित्सक की सलाह से इसे न लें।

तालीसपत्र एक बहुत ही उपयोग औषधी है। इसके सेवन से शरीर के कई रोग समाप्त होते हैं। पर तालीसपत्र के अपने नुकसान भी हैं, इसलिए बिना चिकित्सक की सलाह से इसका सेवन न करें।

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