सर में चोट के बारे में जानें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 23, 2012
Quick Bites

  • आंतरिक हिस्से में लगी चोट रक्त वाहिनियों को नुकसान पहुंचा सकती है।
  • सिर में लगी किसी भी प्रकार की चोट को कभी भी नज़रअंदाज़ न करें।
  • सिर पर लगी तेज़ चोट सिर के आन्तरिक हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
  • सिर पर चोट लगने पर डॉक्टर से जरूर मिलें और समय पर सही उपचार कराएं।

कहते हैं, सर मे लगी चोट बेहद ही खतरनाक होती है। सर में चोट लगने पर कुछ खास बातों पर ध्‍यान देना बेहद आवश्‍यक हो जाता है। सर में लगी चोट दो तरीके की हो सकती है, सर के बाहरी हिस्से में या सर के आंतरिक हिस्से में। खुश्किस्मती से बचपन में लगी किसी भी प्रकार की चोट सिर्फ हमारे सर के बाहरी हिस्से को प्रभावित करती है और यह उतनी हानिकारक नहीं होती है। सर के आंतरिक हिस्से में लगी चोट, इस चोट की तुलना में कहीं ज़्यादा हानिकारक होती है । सर के बाहरी हिस्से में रक्त वाहिनीयां फैली होती हैं और इस कारण से सर में लगी हल्की चोट से भी तुरन्त रक्तस्राव होने लगता है।

 

 

Injury in Hindi

 

कुछ स्थितियां जिनमें डाक्टर को सम्पर्क करना ज़रूरी होता है

 

  • अगर आपका बच्चा छोटा है और चोट लगने के बाद उसे होश नहीं आता।
  • बच्चा किसी भी उम्र का है और वह कुछ इस प्रकार के लक्षण दर्शाता है जैसे वो रोता ही रहता है और चुप नहीं होता, उसे अकसर सरदर्द और गर्दन दर्द होता है, सही तरीके से नहीं चल पाता।
  • बच्चा बहुत छोटा नहीं है और वो चोट लगने के बाद भी ठीक तरीके से बर्ताव करता है फिर भी चोट लगी हुई जगह पर हर 20 मिनट पर आइस पैक और कोल्ड पैक लगाएं। आइस को हमेशा किसी साफ कपड़े पर लपेट कर लगाएं।
  • किसी भी प्रकार की चोट लगने के बाद 24 घंटे तक बच्चे का ध्यान दें और अगर खून नहीं रूक रहा है या कोई भी परेशानी है तो तुरंत डाक्टर से सम्पर्क करें।
  • अगर सोने से पहले आपके बच्चे को चोट लगी है और चोट लगने के बाद वो सो जाता है तो आप कुछ घंटों तक उसकी सांस देखते रहें। उसे नींद से ना जगाएं।

 

सर के आंतरिक हिस्से में लगी चोट खोपड़ी के अन्दर की रक्त वाहिनियों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं जिससे हमारी जान को भी खतरा हो सकता है। हमारा दिमाग सेरेब्रोस्पाइनल फ्लुइड से भरा होता है लेकिन सर पर लगी तेज़ चोट सर के आन्तरिक हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

 

Injury in Hindi

 

कुछ चिन्ताजनक लक्षण

 

  • चोट लगने के बाद अचेत हो जाना।
  • सांस का ठीक प्रकार से ना चलना।
  • नाक कान या मुंह से लगातार खून आना।
  • बोलने या देखने में होने वाली परेशानी।
  • गर्दन में दर्द
  • 2 से 3 बार उल्टियां होना।

 

ऐसी स्‍थति में अगर आपके बच्चे को गर्दन या स्पाइन में चोट आयी है तो उसे हिलाने की कोशिश ना करें बल्कि दूसरों की मदद लें। अगर बच्चा उल्टियां करता है तो उसके सर और गर्दन को सीधा ही रखें। खून बहने की स्थिति में विसंक्रमित बैंडएड का प्रयोग करें और अगर सूजन है तो आइस पैक लगायें।

 

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