Gingivitis: मसूड़ों में सूजन आने पर हो सकते हैं ये 10 कारण, जानें लक्षण और बचाव

जिंजिवाइटिस यानी मसूड़ों में सूजन आने के पीछे अनेक कारण छिपे हो सकते हैं। ऐसे में आईये जानते हैं इसके प्रकार, लक्षण और बचाव भी...

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Mar 17, 2021Updated at: Mar 17, 2021
Gingivitis: मसूड़ों में सूजन आने पर हो सकते हैं ये 10 कारण, जानें लक्षण और बचाव

न जाने ऐसे कितने लोग हैं जो जिंजिवाइटिस ( Gingivitis) यानी मसूड़ों में सूजन को महसूस करते हैं। यह समस्या बैक्टीरिया संक्रमण के कारण पैदा होती है। लेकिन अगर इसका उपचार समय पर ना किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकती है। इस गंभीर रूप को पीरियडोनटाइटिस भी कहते हैं। यह उन ऊतकों को नष्ट कर देती है जो दांतों को सहारा देते हैं। बता दें कि जिंजिवाइटिस तीन प्रकार के होते हैं आवर्ती, क्रॉनिक ओर एक्यूट। आज हम आपको अपने से लेकर माध्यम से बताएंगे कि जिंजिवाइटिस के लक्षण (Gingivitis symptoms) क्या हैं, साथ ही कारण और उपचार (How to Treat Gingivitis) भी जानेंगे। पढ़ते हैं आगे...

जिंजिवाइटिस के प्रकार (Types of Gingivitis)

जैसा कि हमने ऊपर भी बताया जिंजिवाइटिस तीन प्रकार के होते हैं- एक्यूट, क्रॉनिक और आवर्ती। 

बता दें कि एक्यूट जिंजिवाइटिस छोटी अवधि के लिए होते हैं लेकिन ज्यादा कष्टकारी होते हैं। जबकि आवर्तक जिंजिवाइटिस कुछ दिनों बाद फिर से लौट आते हैं। वही क्रॉनिक जिंजिवाइटिस धीमी शुरुआत और दर्द रहित होते हैं।

जिंजिवाइटिस के लक्षण (Symptoms of Gingivitis)

जिंजिवाइटिस के निम्न लक्षण हैं-

1 - मुंह से बदबू आना

2 - मसूड़ों में सफेद धब्बे आ जाना

3 - मसूड़ों दांत के बीच में बाधा उत्पन्न होना

4 - मसूड़ों में सूजन या लालिमा आ जाना

5 - ब्रश करने के दौरान रक्त स्राव आना

6 - दातों के ढांचे में गड़बड़ी होना

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कभी-कभी जिंजिवाइटिस के लक्षण नजर नहीं आते हैं ऐसे में डॉक्टर सलाह देते हैं कि समय-समय पर अपने दांतों की जांच करवाते रहें, जिससे अगर डॉक्टर को जिंजिवाइटिस के संकेत मिले तो तुरंत प्राथमिक उपचार कर सकें।

जिंजिवाइटिस के कारण (Causes of Gingivitis)

1 - दातों की बिल्कुल देखभाल ना करना

2 - दौरे रोकने की दवाई का सेवन करने के दौरान मसूड़े के रोग को बढ़ावा देना।

3 - लार के उत्पादन में कमी होना।

4 - धूम्रपान करना।

5 - तंबाकू का सेवन करना, जिससे मसूड़े के ऊतक को नष्ट हो जाते हैं।

6 - शराब के सेवन के कारण

7 - दातों का टेढ़ा मेढ़ा होना या ऊपर दूसरे दांत मैं कैलकुलस को इकट्ठा होने देना

8 - हॉर्मोंस में बदलाव जो की अवस्था गर्भावस्था या मासिक धर्म में बंद होने के कारण होते हैं तब भी जिंजिवाइटिस में वृद्धि हो सकती है।

9 - गलत आहार जैसे कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन करना, पानी की कमी करना, शुगर का अधिक सेवन करना आदि।

10 - शरीर में विटामिन सी आदि की कमी होना।

जिंजिवाइटिस से बचाव (How to Treat Gingivitis)

1 - मौखिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें। मतलब कम से कम रात को सोने से पहले और सुबह उठते ही ब्रश जरूर करें। साथ ही भोजन या नाश्ता करने के बाद भी ब्रश करें। इसके अलावा आप फ्लॉसिंग के माध्यम से दातों में फंसे हुए भोजन और जीवाणु यानी बैक्टीरिया को बाहर निकालें।

2 - दांतों की नियमित रूप से जांच करवाएं। आमतौर पर कम से कम 6 से 12 महीने के दौरान दांतों की सफाई जरूर करवाएं। इससे दांतों में होने वाला खतरा पहले ही पता चल जाएगा और डॉक्टर प्राथमिक उपचार के जरिए खतरे को खत्म कर दें।

3 - अपनी डाइट में पोषक तत्वों को जोड़ें। साथ ही शुगर की मात्रा को कम करें।

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ध्यान दें कि डॉक्टर्स इसके इलाज के लिए दांतो की पूरी सफाई करते हैं। इसके अलावा एंटीसेप्टिक माउथवॉश का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। एंटीबायोटिक भी प्रोवाइड करते हैं, जिससे मसूड़ों के संक्रमण को दूर किया जा सके। लेकिन ध्यान रखिए गर्भवती महिलाएं इस तरह के एंटीबायोटिक का इस्तेमाल ना करें। डॉक्टर सलाह देते हैं कि व्यक्ति को दिन में कम से कम दो या तीन बार ब्रश जरूरी है। इसके अलावा अगर ठीक नहीं होती है तो डॉक्टर सर्जरी का सहारा लेते हैं। फ्लैप सर्जरी एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें मसूड़ों को उठाते हैं और प्लाक को निकाल कर मसूड़ों को रखकर दांत के चारों तरफ टांके लगाते हैं।

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