
आंख में लालपन दिखना, आंसू आना या धुंधला दिखाई देना कई गंभीर समस्याओं की ओर इशारा हो सकता है, जिसमें से एक है आंख में होने वाली दाद या आंखों का शिंगल्स (Eye Shingles)। जी हां, शरीर के अन्य हिस्से की तरह आंख में भी दाद की समस्या हो सकती है। आंखों में दाद जिसे आई शिंगल्स के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रकार के वायरस के कारण होती है। आंख में दाद होने पर मरीज की पलकों, माथे और नाक के सिरे में दाने उत्पन्न हो सकते हैं। ये दाने हफ्तों तक परेशान कर सकते हैं। ये स्थिति काफी खतरनाक और दर्दनाक हो सकती है इसलिए इसे नजरअंदाज करने की भूल न करें। आइए जानते हैं आंख में होने वाली दाद किस प्रकार शरीर पर प्रभाव डालती है।
आंखों का शिंगल्स क्या रोग है?
मनीपाल हास्पिटल , कंसल्टेंट ऑप्थैलमोलॉजी, डॉ अनंत वीर जैन के मुताबिक शिंगल्स यानी आंखों की दाद एक दर्दनाक, ब्लिस्टरिंग रैश है, जो पूरे शरीर में कहीं भी विकसित हो सकता है। कुछ मामलों में ये चेहरे पर होता है। यह स्थिति वैरिकाला-जोस्टर वायरस द्वारा उत्पन्न होती है, जो चिकनपॉक्स का कारण भी बनती है। चिकनपॉक्स का निदान होने के बाद भी जब ये वायरस मानव शरीर के अंदर रह जाता है, तो सालों बाद यह शिंगल्स या दाद के रूप में फिर से उभर सकता है।
हर्पीज जोस्टर भी कहते हैं इसे
शरीर पर कहीं भी दाद का होना काफी दर्दनाक और असुविधाजनक होता है। लेकिन आंखों में दाद होना काफी तकलीफदेह हो सकता है। आंख के अंदर और आसपास होने वाले दाद के प्रकार को हर्पीज जोस्टर केराटाइटिस और हर्पिज जोस्टर ओप्थाल्मिकस कहा जाता है। आंखों में दाद होने का खतरा अधिक होता है। यह लंबे समय तक बना रह सकता है। ये मरीज की दृष्टि को प्रभावित कर सकता है। इसके सबसे आम लक्षण दाने हैं।
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शिंगल्स के लक्षण
आंखों में जलन: मरीजों को अक्सर दाद होने पर आंखों के आसपास जलन और दर्द महसूस होता है।
लाली और खुजली: आंखों के अंदर या आंखों के आसपास का क्षेत्र लाल हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप लगातार खुजली का सामना करना पड़ सकता है।
आंखों में पानी आना: शिंगल्स की पहचान होने पर अक्सर मरीजों की आंखों में खुजली और जलन महसूस होने के कारण उनकी आंखों में पानी आ जाता है।
धुंधली दृष्टि: अगर किसी मरीज को केराटाइटिस है, तो इससे कॉर्निया सुन्न हो सकता है, जिसके कारण धुंधली दृष्टि हो सकती है। कई मामलों में व्यक्ति अंधा भी हो सकता है।
प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता: आंखें प्रकाश के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं, ऐसा तब हो सकता है जब रोगी धूप में बाहर जाता है या अधिक देर तक स्क्रीन देखता है।
शिंगल्स के कारण
शिंगल्स या दाद उसी वायरस के कारण होता है, जो चिकनपॉक्स के लिए जिम्मेदार होता है। यह रोग किसी को भी प्रभावित कर सकता है, जो अपने जीवन में चिकनपॉक्स से प्रभावित रहा हो। वायरस शरीर के अंदर निष्क्रिय हो जाता है और सालों बाद दाद के रूप में फिर से उभर सकता है। इससे त्वचा पर दर्द और दाने हो जाते हैं। जिन लोगों को वैरिकाला-जोस्टर वायरस या चिकनपॉक्स कभी नहीं हुआ है, वह दाद से सुरक्षित हो सकते हैं। दाद के दाने पीठ, पसलियों, चेहरे और छाती के साथ-साथ पैरों पर हो सकते हैं।
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शिंगल्स का इलाज
शिंगल्स का इलाज एंटीवायरल दवाओं के माध्यम से किया जाता है क्योंकि वे रोगी के दर्द से राहत देने और फफोले को ठीक करने में मदद करके उसे फैलने से रोकते हैं। सूजन को स्टेरॉयड की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा दर्द से राहत पाने के लिए एंटीडिप्रेसेंट भी डॉक्टर की सलाह पर ली जा सकती है।
शरीर के किसी भी हिस्से में शिंगल्स के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है ताकि किसी भी कष्टदायक स्थिति से बचा जा सकें।