मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए सही नहीं है अकेलेपन का फोबिया, बता रहे हैं मनोचिकित्सक डॉ. पारिख

आजकल गैजेट्स के दौर में, लोग अपनों को भूल जाते हैं और अकेलापन महसूस करने लगते हैं। इसे अकेलेपन का फोबिया भी कहा जाता है।

 

सम्‍पादकीय विभाग
Written by: सम्‍पादकीय विभागUpdated at: Dec 31, 2019 16:35 IST
मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए सही नहीं है अकेलेपन का फोबिया, बता रहे हैं मनोचिकित्सक डॉ. पारिख

कुछ लोग अपने आपको सामाजिक संपर्क से दूर रखते हैं, अकेला रहना पसंद करते हैं। लेकिन ये काफी भयानक साबित हो सकता है। हम सभी को ये आजादी है कि हम ज्यादा से ज्यादा सामाजिक संपर्क में आएं। नए दोस्त बनाना और अपने परिवार के साथ ज्यादा वक्त बिताना बहुत जरूरी है। एक सामान्य व्यक्ति बिना किसी सामाजिक संर्पक के नहीं रह सकता है। यहां तक के हर छोटे काम के लिए किसी न किसी की आवश्यकता जरूर पड़ती है। अकेले रहने के बारे में सोचना, किसी व्यक्ति के लिए बहुत मुश्किल हो सकता है। ऐसी भावना आपको काफी भयभीत कर सकती है। अकेलेपन का फोबिया किसी भी व्यक्ति के मन में डर पैदा कर सकता है, और ये बहुत लंबे समय तक के लिए भी रहता है। 

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डॉ पारिख द्वारा बताए गए कारण

उनका कहना है "कई आनुवांशिक, जैविक और मनोसामाजिक कारक हैं, जो एक भय का कारण बन सकते हैं। अकेले रहने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे- घर का वातावरण, दोस्तों से खराब संबंध आदि। उदाहरण, किसी व्यक्ति के लिए उपलब्ध सामाजिक सहायता प्रणाली, मनोवैज्ञानिक लचीलापन और सामाजिक दुनिया के बारे में आत्मविश्वास कम होना काफी बड़ा कारण बन जाता है। वह व्यक्ति किस सामाजिक परिवेश से घिरा हुआ है, यह भी एक कारण बन जाता है। अकेलापन किसी व्यक्ति की सामाजिक पहचान के साथ-साथ व्यक्तित्व के विकास का महत्वपूर्ण कारक बन जाता है।" 

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अकेलापन महसूस किया जा सकता है

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यह महसूस करना महत्वपूर्ण है कि आप अकेले हैं या आपके साथ अपनों का साथ है। लोगों को अकेलेपन की अक्सर आशंका होती है, और यह काफी सामान्य रूप से अनुभव किया जा सकता है। अकेलेपन का फोबिया न केवल बुढ़ापे के चरण में, बल्कि पूरे जीवन काल में कभी भी हो सकता है। जैसा कि एक समय आता है, जब हम खुद को अकेला पाते हैं और किसी के साथ के लिए तरसते हैं। हमारे जीवन में कई लोग होने के बावजूद, हम अकेला महसूस करने लगते हैं। खुद को लोगों के संपर्क से दूर रखने की कोशिश करते हैं। इस स्थिति में, कई बार व्यक्ति किसी अकेले कमरे में अंधेरा करके रहने की इच्छा रखने लगता है। वास्तव में, डिजिटल दुनिया के समय में हमारे जीवन का अकेलापन ज्यादा बढ़ गया है। यहां दोस्त तो बहुत हैं लेकिन साथ की कमी अधिक है। सोशल मीडिया पर कई दोस्त होने के बजाए, घर के डाइनिंग टेबल पर परिवार के साथ होना चाहिए। साथ रहने के बाद भी सभी लोग अपने मोबाइल पर ही लगे रहते हैं, यह भी एक कारण है जो अकेलेपन को बढ़ावा देता है।

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फोबिया के मुकाबले के लिए पहला कदम उठाएं

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कोई आपसे बात नहीं कर रहा या पहले कोई और शुरुआत करें। हमें किसी से बात करने और उससे बात करने की कोशिश में पहला कदम खुद से उठाना चाहिए। यह हमारे अकेलेपन को दूर करने में सक्षम है। अकेले रहने की भावनाओं को बनाए रखने से अवसाद या आत्महत्या की संभावना बढ़ सकती है। एक व्यक्ति जिसे फोबिया है, उसे अक्सर आत्मविश्वास और साहस की कमी महसूस होती है। आपको अकेलेपन से बचाव करना चाहिए, जिससे ऐसे फोबिया का सामना न करना पड़े। अगर हम खुद को अकेलेपन से निपटने में असमर्थ पाते हैं, तो हमें अपनी मदद के लिए किसी मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्‍सक की सलाह लेनी चाहिए। 

मनोचिकित्‍सक से कब संपर्क करना चाहिए? 

  • मानसिक स्वास्थ्य के कलंक को दूर करें और चिंता से मुक्त होने के उपायों को अपनाएं।
  • इसे सिर्फ एक साधारण 'सोच' समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसे नजरअंदाज करना आसान है, लेकिन ये काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

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