रोजे के दौरान डायबिटीज रोगी रखें इस बात का ध्यान, नहीं बिगड़ेगी तबीयत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 17, 2018
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Quick Bites

  • इफ्तार के वक्त पानी का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें।
  • यह कीटोन लेबल रक्त के पीएच लेवल को घटा देता है।
  • इस कारण ब्लड शुगर सामान्य से कम होने का खतरा बढ़ जाता है।

रोजे के दौरान आपके आहार एवं दिनचर्या में परिवर्तन होता है। लंबे समय तक भूखा रहने से हमारे शरीर में कई बदलाव आते हैं। जिस व्यक्ति को डायबिटीज न हो, वह अगर भूखा रहे तो उसके शरीर में ऊर्जा का स्तर संचित ऊर्जा के द्वारा नियंत्रित रहता है, किंतु डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति के साथ यह संभव नहीं हो पाता है। इस कारण ब्लड शुगर सामान्य से कम होने का खतरा (70 एमजी/ डीएल) बढ़ जाता है। इस स्थिति को हाइपोग्लाइसिमिया कहते हैं। हाइपोग्लाइसिमिया के कई लक्षण हैं...

  • हाथ-पैर कांपना। 
  • तेज भूख लगना। 
  • पसीना आना। 
  • घबराहट महसूस होना। 
  • आंखों के आगे अंधेरा छाना। 
  • लक्षण महसूस होने पर ग्लूकोमीटर से जांच करें और ब्लड शुगर अगर कम है तो तुरंत इलाज करें।

यह रहा इलाज 

3 चम्मच शहद / चीनी/ ग्लूकोज या 1/2(आधा कप) कप जूस या 1/2 कप कोल्ड ड्रिंक का प्रयोग करें।  अगर रोगी बेहोश है तो उसे करवट लिटाएं और नजदीकी अस्पताल ले जाएं। मुंह से जबरदस्ती कुछ न दें। 

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डीकेए 

इसे डायबिटीज कीटोएसिडोसिस कहते हैं। यह एक गंभीर जटिलता है और यह तब होती है, जब शरीर में इंसुलिन का उत्पादन पर्याप्त नहीं होता और शरीर ऊर्जा के लिए ग्लूकोज का इस्तेमाल न करके वसा को तोड़ना शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया से कीटोन का निर्माण होता है। यह कीटोन लेबल रक्त के पीएच लेवल को घटा देता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। यह जटिलता ब्लड शुगर अधिक बढ़ जाने से हो सकती है। अगर रोगी इंसुलिन डॉक्टर से सलाह लिए बगैर घटा दे या छोड़ दे, तो डीकेए का खतरा बढ़ सकता है। डीकेए में डीहाइड्रेशन भी हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि रमजान में तरल पदार्थ नहीं ले सकते। इसलिए यह समस्या और बढ़ सकती है। अगर आपका ब्लड शुगर 300 एमजी डीएल से अधिक हो जाए और आपको निम्नलिखित लक्षण हों—

  • सांस लेने में तकलीफ होना। 
  • थकावट महसूस होना। 
  • बार-बार पेशाब आना। 
  • अधिक प्यास लगना। 
  • जी मिचलाना और पेट दर्द। 
  • चेतना में कमी। 

डिहाइड्रेशन का भी है खतरा

रमजान में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि यह गर्मी और उमस के महीने में पड़ता है। डिहाइड्रेशन के लक्षण हैं :- 

  • घबराहट या कंपकंपी होना। 
  • सूखी(ड्राई) त्वचा। 
  • सुस्ती होना और मांसपेशियों में ऐंठन। 
  • चक्कर आना। 
  • कब्ज। 

डिहाइड्रेशन से बचाव 

डीहाइड्रेशन में शरीर को ठीक ढंग से काम करने के लिए पर्याप्त पानी और अन्य तरल पदार्थों की कमी होने लगती है। इससे बचने के लिए रोजा खोलते वक्त नींबू पानी और नारियल पानी का सेवन करें। ऐसी सब्जी और फल जिसमें पानी अधिक हो जैसे तरबूज, खीरा का सेवन करें। चाय कॉफी कम लें। खजूर, दलिया, खिचड़ी, बिरयानी लें परन्तु रेडमीट कम लें। इफ्तार के वक्त पानी का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें। हरी सब्जियां खाएं। मसालेदार, तला-भुना खाने से परहेज करें।

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