बच्चों में क्रोंस बीमारी के इन 10 लक्षणों को न करें नजरअंदाज, जानें इसके कारण, खतरे, जांच और बचाव के टिप्स

क्रोंस पाचनतंत्र (खासकर आंतों) से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जो बच्चों को भी हो सकती है। जानें बच्चों में इस बीमारी के लक्षण, कारण और इलाज के उपाय।

Monika Agarwal
बच्‍चे का स्‍वास्‍थ्‍यWritten by: Monika AgarwalPublished at: Oct 02, 2021
बच्चों में क्रोंस बीमारी के इन 10 लक्षणों को न करें नजरअंदाज, जानें इसके कारण, खतरे, जांच और बचाव के टिप्स

क्रोंस बीमारी एक इन्फ्लेमेट्री बाउल डिजीज है जो खास कर बच्चों के पाचन तंत्र को प्रभावित करती है। यह बच्चों को गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में मुंह से लेकर एनस तक कहीं भी हो सकती है। यह आम तौर पर छोटी आंत के अंत में और बड़ी आंत के शुरू में देखने को मिलती है। इस बीमारी के दौरान बच्चे की आंत में सूजन आ जाती है या उनमें दर्द होने लगता है। यह सूजन पूरी आंत की दिवारों (बाउल वॉल) को नष्ट कर सकती है। इसलिए इसका समय से उपचार करवाना बहुत आवश्यक होता है। हालांकि इसका कोई और उपचार उपलब्ध नहीं सिवाय इसके कि लक्षणों को नियंत्रित किया जाए। मदरहुड हॉस्पिटल के सीनियर पीडियाट्रिशियन और न्यूनेटालॉजिस्ट डॉक्टर अमित गुप्ता के अनुसार क्रोंस एक लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है। यह आपके बच्चे की हेल्थ को अलग-अलग समय पर प्रभावित कर सकती है। अधिकांश मामलों में यह छोटी आंत को प्रभावित करती है। जबकि कुछ केस में, छोटी और बड़ी दोनों आंतों को प्रभावित करती है। इस दौरान पाचन तंत्र तो प्रभावित होता ही है। कभी-कभी इसके अलावा मुंह, फूड पाइप, पेट, अपेंडिक्स आदि में भी सूजन हो सकती है। तो आइए जानते हैं यह बीमारी किन कारणों से होती है।

क्रोंस बीमारी के कारण

इम्यूनिटी फैक्टर्स

इसका मुख्य और सटीक कारण तो अभी तक पता नहीं चल पाया है लेकिन यह जेनेटिक या इम्यूनिटी फैक्टर्स की वजह से हो सकती है। पहले के समय में खराब डाइट और स्ट्रेस भी इसके कारणों में शामिल किए जाते थे। लेकिन अब की स्टडीज के मुताबिक यह फैक्टर्स इस बीमारी को और अधिक बढ़ा सकते हैं लेकिन इसके कारण नहीं है।

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जेनेटिक कारण

कुछ बच्चों के परिवार वालों को यह बीमारी होती है।  इसलिए उनके जेनेटिक गुणों में भी इस बीमारी के लक्षण आने शुरू हो जाते हैं। कोई असामान्य इम्यून कारक जोकि किसी बैक्टीरिया या वायरस द्वारा हुआ हो, भी इसका कारण माना जा सकता है। इम्यून सिस्टम आंतो की दीवारो पर उल्टा असर करता है तो सूजन का कारण बनता है।

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क्रोंस बीमारी के कुछ लक्षण और संकेत

  1. दाएं ओर पेट में दर्द होना
  2. डायरिया और कई बार तो खून का डायरिया होना
  3. भूख न लगना
  4. मुंह में दर्द होना
  5. वजन कम हो जाना
  6. विकास अच्छे से न हो पाना
  7. बुखार होना
  8. जोड़ों में दर्द देखने को मिलना
  9. स्किन पर कहीं कहीं रैश हो जाना
  10. एनीमिया आदि।

क्या क्रोंस बीमारी से बच्चे की मुसीबतें बढ़ सकती हैं?

क्रोंस बीमारी से बच्चे के निम्न परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है :

  • आंत का ब्लॉक हो जाना
  • फिस्टुला जैसे इंफेक्शन का होना
  • स्किन से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलना
  • हड्डियां कमजोर हो जाना और गठिया आदि स्थिति का होना
  • पैरों का बहुत सारा आराम करने के बाद भी दर्द करते रहना
  • लीवर में बहुत सी समस्याएं हो सकती हैं
  • खून की कमी होने के कारण एनीमिया होना
  • मुंह और आंखों का सूज जाना
  • कोलन कैंसर होना

क्रोंस बीमारी को कैसे पहचाना जा सकता है?

ब्लड टेस्ट के द्वारा

कुछ खास एंटी बॉडीज और इंफ्लेमेशन को पहचाने के लिए ब्लड टेस्ट का होना बहुत आवश्यक होता है। खून की कमी के कारण ब्लड टेस्ट में रेड ब्लड सेल्स की कमी भी देखने को मिल सकती है।

एंडोस्कोपी

यह पाचन तंत्र के ऊपरी भाग में होने वाली समस्याओं को पहचानने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान कुछ खास भागों से बायस्पी करने के लिए सैंपल्स लिए जाते हैं।

कोलोनोस्कोपी

यह छाले, टिश्यू इंफ्लेमेशन और असामान्य विकास आदि की जांच करने के लिए किया जाता है। इसके दौरान भी बायोस्पी सैंपल्स लिए जाते हैं।

एमआर और सीटी एंटरोग्राफी

सूजन में आने वाले कुछ बदलावों और स्थिति को अच्छे से परखने के लिए यह टेस्ट भी किए जा सकते हैं।

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क्रोंस से बचाव के लिए बच्चे की डाइट में करें बदलाव

अगर आपके बच्चे को भी क्रोंस बीमारी पाई जाती है तो आप आराम से कुछ बदलावों के कारण उसके लक्षणों को नियंत्रित कर सकते हैं।

  • बच्चे को ज्यादा पानी पीने के लिए दें।
  • केले, दलिया, चावल जैसे घुलनशील फाइबर दें।
  • छोटी छोटी मात्रा में बार-बार कुछ खाने को दें।
  • उन खाद्य पदार्थों को बिल्कुल नहीं दें जिनसे यह लक्षण ट्रिगर करें।
  • चिकना या वसायुक्त खाना ना दें।
  • गैस उत्पन्न करने वाले खाद्य भी ना दें।
  • ज्यादा मीठा, ज्यादा नमक से भी बच्चे को दूरी बनाने के लिए बोलें।

इसके उपचार में आपको बच्चे को कुछ दवाइयां दिलानी पड़ेंगी, कुछ उनकी डाइट में बदलाव करने पड़ेंगे, कुछ विटामिन और पौष्टिक तत्त्वों को सप्लीमेंट्स देने होंगे।

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