गठिया से जुड़े 9 मिथक (भ्रांतियां), जिनके कारण बढ़ सकती है आपके जोड़ों के दर्द की तकलीफ, जानें इनकी सच्चाई

गठिया के कारण जोड़ों में दर्द होता है, जो कि एक आम समस्या है। यही कारण है कि आम लोगों में गठिया से जुड़ी कई भ्रांतियां पॉपुलर हैं। जानें इनकी सच्चाई

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अन्य़ बीमारियांWritten by: सम्‍पादकीय विभागPublished at: Dec 25, 2020Updated at: Dec 25, 2020
गठिया से जुड़े 9 मिथक (भ्रांतियां), जिनके कारण बढ़ सकती है आपके जोड़ों के दर्द की तकलीफ, जानें इनकी सच्चाई

गठिया शब्द का इस्तेमाल जोड़ों (गांठों) में दर्द और सूजन को बताने के लिये किया जाता है। दुनिया भर में 20 मिलियन लोगों को गठिया या अर्थराइटिस (arthritis) होने का अनुमान है। गठिया जोड़ों (Joints) से संबंधित लगभग 200 रोगों का कारण बन सकता है। यह किसी व्यक्ति के रोजमर्रा के कार्यों को करने की क्षमता को कम कर सकता है और सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है, यहां तक कि छोटे बच्चों और किशोरों को भी। अगर आपको किसी जोड़ या जोड़ों में दर्द (joint pain) है, जो कुछ दिनों के बाद भी दूर नहीं हो रहा हो तो आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। यह पता लगाना कि आपके दर्द का कारण क्या है, सही इलाज के लिए जरूरी है। वैसे तो गठिया के लिए पहले कोई इलाज नहीं था लेकिन हाल के वर्षों में इलाज में काफी सुधार हुआ है। कई कारण हैं जो गठिया के दर्द को बढ़ा सकते हैं। यह हो सकता है कि आपके माता-पिता या दादा-दादी से विरासत में मिले जीन ने आपको गठिया रोग दिया हो। गठिया के लक्षण समय के साथ गंभीर रूप ले लेते हैं। हालांकि सही इलाज से आप अपने दर्द पर काबू पा सकते हैं। इस रोग से जुड़े कई ऐसे मिथक (भ्रांतियां या अफवाह) हैं जो लोगों के मन में अक्सर आते हैं, आज हम 9 ऐसे मिथकों पर चर्चा करेंगे जो गठिया रोग से जुड़ी आपकी सोच बदल सकते हैं।

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मिथक 1: गठिया रोग में डॉक्टर को दिखाने से कोई लाभ नहीं

सच्चाई: लोगों की सोच गठिया रोग के बारे में ये है कि इस बीमारी से निजात पाना नामुमकिन है इसलिये चिकित्सा सहायता की कोई जरूरत नहीं है। जबकि सच्चाई इससे उलट है। अगर आप सही समय पर डॉक्टर को दिखा दें तो इससे आपके घुटनों में दर्द बढ़ना रुक सकता है। अगर आप सही नाप के जूते नहीं पहनते या बिना किसी ट्रेनिंग के तेज दौड़ते हैं या कई चोटों का शिकार हुए हैं तो आपको गठिया होने का खतरा बढ़ सकता है। जिन रोगियों को पहले से ही गठिया है उन्हें आमतौर पर दौड़ने से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि अर्थराइटिस वाले जोड़ों में सामान्य जोड़ों की तरह बल दिया नहीं जा सकता। इससे पहले कि आपका दर्द बढ़े डॉक्टर को दिखाना न भूलें। उपचार (treatment of arthritis) का उद्देश्य दर्द को नियंत्रित करना होता है और जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखना है। इसमें दवाएं, शारीरिक उपचार और रोगी की शिक्षा और सहायता शामिल होती हैं।

मिथक 2: अर्थराइटिस में सामान्य गतिविधियों पर प्रभाव पड़ता है

सच्चाई: एक दिन में औसतन एक व्यक्ति 30 मिनट से ज्यादा समय की गतिविधि करता है। इसमें चलना, काम करना आदि शामिल है। शारीरिक गतिविधि का गठिया पर प्रभाव पड़ता है और यह दर्द, काम और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है। हद से ज्यादा हरकत करने पर परेशानी हो सकती है पर आप चिकित्सा सलाह के आधार पर रोज के ऊपरी काम कर सकते हैं।

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मिथक 3: क्या अर्थराइटिस में योग नहीं करना चाहिए

सच्चाई: योग में ऐसे कई आसन हैं जो स्ट्रेचिंग, जोड़ों के लचीलेपन, सांस लेने और ध्यान केंद्रित करने के लिये लाभदायक हैं। योग करने से न केवल गठिया के लक्षण कम होते हैं बल्कि ऐसे रोगियों में शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य भी सुधरता है। व्यक्ति की स्थिति के अनुसार आप आसान आसनों को कर सकते हैं। आपका वजन भी जोड़ों के दर्द का कारण हो सकता है। ज्‍यादा वजन जोड़ों पर प्रभाव डालता है इसलिये वजन नियंत्रित रखें।

मिथक 4: सब्जियां खाने से गठिया ठीक हो सकता है

सच्चाई: ऐसा माना जाता है कि आहार ही उपचार होता है पर सब्जियां खाने से गठिया रोग दूर भाग जायेगा इसका कोई प्रमाण नहीं है। लेकिन आप दवाओं और जीवनशैली में बदलाव लाकर दर्द को कुछ हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। इस बात पर गौर करें कि आप अपने शरीर को क्या भोजन दे रहे हैं। कुछ फलों और सब्जियों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो आपके दर्द को शांत करने में मदद करते हैं। स्वस्थ आहार के साथ शुरुआत करने में मदद करने के लिए अपने रुमेटोलॉजिस्ट या आहार विशेषज्ञ से बात करें।

मिथक 5: बारिश और नम मौसम से गठिया का दर्द बढ़ जाता है

सच्चाई: किसी भी मौसम का असर तब तक आप पर नहीं होगा जब तक आप नियमित रूप से इलाज करवाते रहेंगे। अगर ठंड के दिनों में  गठिया का दर्द सताता है तो व्यायाम से  इसे आसान बनायें। अपने जोड़ों में ताकत और गति की सीमा बनाए रखना जरूरी है। अपनी सीमा को जानें और एक समय में 20 मिनट के साथ शुरू करें। यदि आपका वर्तमान व्यायाम नियमित रूप से दर्द का कारण बनता है, तो आपका डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

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मिथक 6: जोड़ों में होने वाला हर तरह का दर्द गठिया है

सच्चाई: कभी-कभी चोट लगने या तापमान में बदलाव आने से भी जोड़ों में दर्द होता है। हर दर्द अर्थराइटिस के कारण हो ऐसा जरूरी नहीं है। आमतौर पर ये दर्द 50 के दशक में शुरू होता है और समय के साथ बिगड़ सकता है। हालांकि, जोड़ों के आस-पास कई संरचनाएं हैं जो एक ही जगह में दर्द का कारण बन सकती हैं जैसे टेंडोनाइटिस। दर्द बढ़ने पर चिकित्सक मदद लें। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं। पानी से हमारा शरीर हाइड्रेटेड रहता है और उसे कई तरह के रोगों से लड़ने में मदद मिलती है।   

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मिथक 7: अर्थराइटिस केवल घुटनों को प्रभावित करता है

सच्चाई: कई गठिया की स्थिति जोड़ों के अलावा शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करती है। जैसे गठिया फेफड़े, दिल और नसों को भी प्रभावित कर सकता है। (Psoriatic) गठिया दिल और आंखों को प्रभावित कर सकता है। अगर आपको तेज दर्द उठता है तो रोजाना मालिश करें। इससे जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है पर मालिश हमेशा अनुभवी व्यक्ति से पूछ कर ही करें।

मिथक 8: एलोपैथी अर्थराइटिस में लाभ नहीं पहुंचाती

सच्चाई: कई लोग भयंकर दर्द के बावजूद एलोपैथी इलाज करवाने से डरते हैं। उन्हें लगता है कहीं ऑपरेशन न करवाना पड़े। इससे बचने के लिये वो जड़ी-बूटी से इलाज शुरू कर देते हैं। ऐसा करने से आपकी स्थिति और बिगड़ सकती है। अर्थराइटिस की लास्ट स्टेज पर आकर नी-रिप्लेसमेंट (knee replacement) के अलावा कोई चारा नहीं बचता। फिजियोथेरेपिस्ट और डॉक्टर की मदद से आप समय रहते दर्द ठीक कर सकते हैं। वक्त रहते बीमारी पकड़ में आ जाये तो इलाज संभव है।

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मिथक 9: छोटे बच्चों को नहीं होता गठिया

सच्चाई: ये रोग किसी भी उम्र में हो सकता है। कुछ केसेज में दर्द कुछ दिनों या महीनों तक रहता है वहीं कुछ मामलों में इलाज जीवनभर चलता है। इसका पहला लक्षण है जोड़ों में तेज दर्द या सूजन। पेरेंट्स को बच्चों को बचपन से ही नियमित व्यायाम की आदत डालनी चाहिये। वहीं उनकी डाइट में प्रोटीन, कैल्शियम शामिल करें इससे हड्डियों में मजबूती आयेगी। गठिया को रोकने में प्रतिरक्षा प्रणाली अच्छी होना बहुत जरूरी है।  डाइट में नमक को शाम‍िल करें। नमक में मैग्‍नीशियम सल्‍फेट (Magnesium Sulphate) होता है जो जोड़ों के दर्द को कम करने में असरदार माना जाता है।

दर्द को बढ़ने से पहले उसका इलाज जरूरी है। ऐसा नहीं है कि हर दर्द में सर्जरी हो। समय रहते इलाज करवायें तो दर्द को हरा सकते हैं।  गठिया रोग को हल्के में न लें जल्द उपचार शुरू करें। 

Written by Yashaswi Mathur

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