कई तरह के होते हैं बैक्टीरियल इंफेक्शन, जानें इनके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

कई बार हम बैक्टीरियल इंफेक्शन से होने वाले लक्षणों को हल्के में लेते है लेकिन इससे समस्या बढ़ सकती है।

Dipti Kumari
Written by: Dipti KumariPublished at: Feb 19, 2022Updated at: Feb 19, 2022
कई तरह के होते हैं बैक्टीरियल इंफेक्शन, जानें इनके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

ऐसे तो हमारे शरीर में बैक्टीरियल इंफेक्शन आम होता है, जो कई कारणों से हमें अपनी चपेट में ले सकते हैं लेकिन यह अलग-अलग तरह से शरीर को प्रभावित कर सकते हैं। आमतौर पर यह शरीर की चोट या रोम छिद्रों की मदद से शरीर में प्रवेश करते हैं। बैक्टीरिया आपके शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाते है, जिसकी वजह से आप बार-बार बीमार पड़ सकते हैं। साथ ही किसी अन्य गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं क्योंकि हम सभी का शरीर प्रत्येक चीज के लिए अलग-अलग ढंग से प्रतिक्रिया करता है। हालांकि बैक्टीरिया अच्छे भी होते है, जो शरीर के विकास और पाचन में आपकी मदद करते हैं। आइए बैक्टीरिया इंफेक्शन का कारण, लक्षण और इलाज के बारे में विस्तार से पढ़ते है और जानते है कि यह हमारे शरीर को किसी तरह से नुकसान पहुंचा सकते हैं।

बैक्टीरिया इंफेक्शन के कारण

बैक्टीरिया हमारे पर्यावरण में हर जगह मौजूद होते हैं लेकिन जब आपका शरीर कमजोर होता है या आप दूषित पानी, भोजन और पर्यावरण के संपर्क में आते है, तो ये आपके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। खासकर यह उनलोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है, जिनको पहले से कोई बीमारी हो या उनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो। आपका इम्यून सिस्टम खानपान, दिनचर्या या फिर किसी खास समस्या के कारण कमजोर हो सकता है। हालांकि इसके कई और कारण भी हो सकते हैं।

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लक्षण

आपको सबसे पहले ये जानने की जरूरत है कि बैक्टीरियल इंफेक्शन किसी भी उम्र में हो सकता है। यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों को भी प्रभावित कर सकता है। इसके कारण आपको शरीर के कई हिस्सों में संक्रमण फैल सकता है, जैसे आंत, फेफड़ों, त्वचा, मस्तिष्क और मूत्राशय में इंफेक्शन की समस्या हो सकती है। इसके अलावा यह संक्रमण आपके ब्लड में भी फैल सकते है, जिससे सेप्टीसीमिया जैसी समस्या भी हो सकती है। इससे स्थिति गंभीर हो सकती है। यह आपके शरीर के किसी खास अंग को भी प्रभावित कर सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में दर्द, सूजन, लालिमा, बलगम वाली खांसी और अंगों के कार्य करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। पेट और आंत में परेशानी हो सकती है। आपको सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। यह फेफड़ों में संक्रमण का कारण हो सकता है। 

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बैक्टीरियल इंफेक्शन के प्रकार

1. एस्चेरिचिया कोलाई संक्रमण आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाते है। ये गंभीर नहीं होते हैं और ये बिना गंदा खाना खाने या बिना पकी सब्जियां खाने से हो सकते हैं। 

2. साल्मोनेला एक ऐसा बैक्टीरियल संक्रमण है, जो विषाक्त या बिना पके हुए पोलेट्री खाद्य पदार्थों के सेवन की वजह से होता है। इस वजह से आपका पेट खराब हो सकता है और दस्त या उल्टी की समस्या हो सकती है। ये इंफेक्शन मनुष्य और जानवरों में भी हो सकता है।

3. मेथिसिलिन स्टैफिलोकोकस ऑरियस की समस्या काफी गंभीर होती है। यह उनलोगों को ज्यादा प्रभावतित करती है, जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है इसलिए बैक्टीरिया संक्रमण से बचाने का सबसे उत्तम उपाय अपने शरीर को मजबूत बनाना है।

4. ट्यूबरक्लोसिस संक्रामक रोग माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया के कारण होता है। यह आमतौर पर फेफड़ों का संक्रमण होता है। 

इसके अलावा और भी कई तरह के बैक्टीरियल इंफेक्शन होते है, जो शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करते हैं। 

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इलाज

बैक्टीरियल इंफेक्शन से छीक होने के लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि डॉक्टर आपको संक्रमण की गंभीरता, स्थान, समय और लक्षणों के आधार पर सही सलाह दे सकते हैं। इसके लिए डॉक्टर आपके कई तरह के टेस्ट कर सकते है, जिससे आपकी समस्या का ठीक ढंग से पता लग सकता है और उसका सही इलाज हो सकता है। कई बार बैक्टीरियल संक्रमण अपने आप भी ठीक हो जाते है। लोग इसके लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं लेकिन हम आपको सलाह देंगे कि इस तरह की किसी दवा का प्रयोग बिना डॉक्टर के सलाह के न करें और किसी भी बीमारी या समस्या को हल्के में न लें बल्कि तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

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इन बातों का रखें ध्यान

1. बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचने के लिए छोटे घाव को भी अच्छे से साफ करें और क्रीम लगाएं ताकि पस न जमा हो और घाव जल्दी ठीक भी हो जाए।

2. इसके अलावा इंफेक्शन के लक्षण जैसे बुखार, भूख न लगना, खांसी और सर्दी के लिए अधिक मात्रा में पानी का सेवन करें ताकि शरीर हाईड्रेट रहे और हो सके तो गुनगुने पानी का सेवन करें।

3. इसके अलावा बाहर के खाने से परहेज करें और साफ-सूथरे खाने का सेवन करें। इसके अलावा कोशिश करें कि हमेशा ताजा खाना ही खाएं।

4. पानी को हमेशा फिल्टर या गर्म करके पीएं ताकि उसमें गंदगी न रहे।

5. दूषित पर्यावरण में न रहें और अपने आसपास सफाई रखें और रोज नहाएं।

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